अल्पसंख्यक बेल्ट की वोटिंग में 20 प्रतिशत तक उछाल, ये दीदी की सत्ता की गारंटी है या परिवर्तन का संकेत?
खास बातें मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में 2 से 20 फीसदी तक बढ़ा वोट मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज में 20.5 प्रतिशत की रिकॉर्ड छलांग कांग्रेस के पुराने गढ़ में हलचल नाम कटने के बावजूद वोट देने के लिए उमड़ा जनसैलाब बीरभूम और दक्षिण 24 परगना में भी जोरदार मतदान क्या हैं सियासी मायने? West Bengal Election 2026 Muslim Vote Turnout: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उन्होंने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है.
राज्य के चुनावी इतिहास में पहली बार मतदान का आंकड़ा 90 प्रतिशत के पार पहुंचा, लेकिन असली ‘खेला’ उन 85 सीटों पर हुआ है, जिन्हें अल्पसंख्यक बहुल माना जाता है. मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में 2 से 20 फीसदी तक बढ़ा वोट मुस्लिम बहुल इन क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में 2 से लेकर 20 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गयी है.
मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में उमड़ी यह भीड़ बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ में देगी, इसको लेकर कयासों का बाजार गर्म है. मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज में 20.5 प्रतिशत की रिकॉर्ड छलांग मुर्शिदाबाद जिला, जहां 66 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है, वहां वोटरों का उत्साह चरम पर था.
रघुनाथगंज सीट पर 2021 के मुकाबले वोटिंग में 20.5 फीसदी का भारी उछाल आया. जंगीपुर में 17.9 फीसदी, सागरदिघी में 16.4 फीसदी, शमशेरगंज में 16 फीसदी और सूती में 14.5 फीसदी वोटिंग बढ़ी. जिले की सभी 22 सीटों पर मतदान बढ़ा. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें कांग्रेस के पुराने गढ़ में हलचल कांग्रेस का पुराना गढ़ माने जाने वाले मालदा और उत्तर दिनाजपुर में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है, क्योंकि कांग्रेस लंबे समय बाद अकेले चुनाव लड़ रही है.
मालदा के रतुआ में 16.2 प्रतिशत, चांचल में 15.3 प्रतिशत और मालतीपुर में 14.7 प्रतिशत वोटिंग बढ़ी है. यहां किसी भी सीट पर दहाई अंक से कम की वृद्धि नहीं देखी गयी. उत्तर दिनाजपुर के गोआलपोखर में 19.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गयी, जो पूरे बेल्ट में दूसरी सबसे बड़ी उछाल है.
चाकुलिया और इस्लामपुर में भी 13 से 17 फीसदी तक मतदान बढ़ा. इसे भी पढ़ें : बंगाल में फिर ‘दीदी’ के करीब आया अल्पसंख्यक वोट बैंक! स्टिंग और UCC के डर ने बिगाड़ा खेल, जानें नये सियासी समीकरण नाम कटने के बावजूद वोट देने के लिए उमड़ा जनसैलाब हैरानी की बात यह है कि चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत इन जिलों में लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाये गये थे.
मुर्शिदाबाद में 4,55,137 और मालदा में 2,39,375 नाम काटे जाने के बावजूद पोलिंग बूथों पर लंबी कतारें देखी गयीं. यह दर्शाता है कि मतदाता इस बार अपने हक को लेकर बेहद जागरूक थे. इसे भी पढ़ें : बंगाल के ‘सिंहासन’ पर कौन बैठेगा? ये 7 फैक्टर तय करेंगे चुनाव परिणाम, पढ़ें पूरा विश्लेषण बीरभूम और दक्षिण 24 परगना में भी जोरदार मतदान अनुब्रत मंडल के इलाके बीरभूम जिले के मुराराई में 13.3 प्रतिशत और रामपुरहाट में 11 प्रतिशत सहित सभी 11 सीटों पर मतदान बढ़ा.
अभिषेक बनर्जी के गढ़ दक्षिण 24 परगना के मटियाबुर्ज में 18 प्रतिशत और कस्बा में 17.2 प्रतिशत की भारी बढ़त दर्ज की गयी. इसे भी पढ़ें : डायमंड हार्बर या बंगाल का ‘ल्यारी’? अभिषेक बनर्जी के गढ़ का क्या है पाकिस्तान कनेक्शन? West Bengal Election 2026 Muslim Vote Turnout: क्या हैं सियासी मायने? बंगाल चुनाव 2021 में इन 85 में से 75 सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज की थी.
उस समय अल्पसंख्यक वोटों का एकमुश्त ध्रुवीकरण ममता बनर्जी के पक्ष में हुआ था. 2026 में कांग्रेस के स्वतंत्र रूप से लड़ने और आईएसएफ (ISF) जैसी पार्टियों की मौजूदगी ने समीकरण बदल दिये हैं. बढ़ा हुआ मतदान ममता बनर्जी के प्रति वफादारी है या सत्ता विरोधी लहर? इसका फैसला 4 मई को होगा.
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