Logo
ब्रेकिंग न्यूज़
हर साल बदलती किताबें: प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा बनी कारोबार, अभिभावकों पर दोहरी मार : मनमानी सिलेबस बदलाव से बढ़ा आर्थिक बोझ, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवालमहिला आरक्षण मुद्दे पर एकजुटता की कोशिश, पीएम मोदी ने सदन के नेताओं से कही ये बातबाबरी मस्जिद की नींव रखूंगा, फिर ईंट उखाड़ फेंकूंगा, अभिषेक बनर्जी ने खोला हुमायूं कबीर का काला चिट्ठाBJP का 3000 रुपए वाला वादा पोंजी स्कीम, TMC ने कहा- लक्ष्मी भंडार ही बंगाल का असली भरोसाPHOTOS: सिलीगुड़ी में आधी रात को ‘मोदी-मोदी’ की गूंज, रोड शो में बदली पीएम की यात्रा, हुई फूलों की बारिशअभिषेक बनर्जी बोले- मुर्शिदाबाद में BJP के 3 एजेंट, हुमायूं कबीर और अधीर रंजन भगवा खेमे का मोहराबंगाल में गरजे पीएम मोदी- बंगालियों को अपनी ही मिट्टी पर अल्पसंख्यक नहीं बनने देंगे, ममता बनर्जी सरकार पर बोला हमलालगभग चार करोड़ की लागत के नगर परिषद के नवीन भवन निर्माण का भूमि पूजन आज, पहले भी दो बार हो चुका है भूमि पूजनबंगाल में बोलीं दिल्ली की CM रेखा गुप्ता- 4 मई के बाद महिलाओं को मिलेंगे 3000 रुपए, घुसपैठियों का होगा हिसाबरामपुरा नीमच का गौरव: अनिल कुमार जैन बने दक्षिण पूर्व रेलवे के नए महाप्रबंधककिसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़, किसानों के विकास के लिए हम हैं प्रतिबद्ध : केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री सिंह | गांव, गरीब और खेती-किसानी की बेहतरी के लिए जारी रहेंगे हमारे प्रयास कृषि क्षेत्र से जुड़ें युवा, यह गौरव का विषय, तकनीक का इस्तेमाल से करें नवाचसमावेशी विकास हेतु मानव अधिकारों का संरक्षण ज़रूरी : अध्यक्ष मानव अधिकार आयोगबांछड़ा समुदाय के युवाओं को स्वरोजगार एवं बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए - श्री सिंहबंगाल चुनाव 2026: सैंथिया में बोले अभिषेक बनर्जी- मोदी की गारंटी मतलब जीरो वारंटी, ममता की गारंटी खांटी सोनाभारत कोई धर्मशाला नहीं है…, बांकुड़ा में गरजे अमित शाह, बोले- जड़ से मिटा देंगे TMC का सिंडिकेट राज

हर साल बदलती किताबें: प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा बनी कारोबार, अभिभावकों पर दोहरी मार : मनमानी सिलेबस बदलाव से बढ़ा आर्थिक बोझ, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

Author
Mukesh Rathor 12 अप्रैल 2026, 11:58 am
हर साल बदलती किताबें: प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा बनी कारोबार, अभिभावकों पर दोहरी मार  : मनमानी सिलेबस बदलाव से बढ़ा आर्थिक बोझ, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
--- **नीमच शिक्षा, जिसे समाज का आधार माना जाता है, अब धीरे-धीरे व्यापार का रूप लेती नजर आ रही है। जिले के निजी विद्यालयों में हर वर्ष पुस्तकों और सिलेबस में बदलाव की बढ़ती प्रवृत्ति ने अभिभावकों की चिंता को गंभीर बना दिया है। पहले से महंगी स्कूल फीस के बीच हर साल नई किताबें खरीदने की मजबूरी अभिभावकों पर दोहरी मार साबित हो रही है। **अभिभावकों का कहना है कि कई निजी स्कूल योजनाबद्ध तरीके से हर साल किताबों के प्रकाशक और सिलेबस बदल देते हैं। इससे पुराने विद्यार्थियों की किताबें पूरी तरह बेकार हो जाती हैं और उनका पुनः उपयोग संभव नहीं रह जाता। नतीजतन, हर वर्ष हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना अभिभावकों की मजबूरी बन गया है। ** मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। कई परिवार ऐसे हैं, जहां बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना कठिन होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित होना पड़ सकता है, जो समाज में असमानता को और बढ़ाएगा। **इस मुद्दे को लेकर स्थानीय अभिभावक संघों में भी रोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि शिक्षा के नाम पर हो रहा यह व्यवसायिकरण न केवल अनैतिक है, बल्कि शिक्षा के मूल उद्देश्य के भी विपरीत है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि निजी स्कूलों की इस मनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाए और एक समान पाठ्यक्रम नीति लागू की जाए।** **हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे अभिभावकों में नाराजगी और अविश्वास दोनों बढ़ रहे हैं। --- क्या **कहते हैं जानकार? शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह प्रवृत्ति आगे चलकर शिक्षा को पूरी तरह व्यवसायिक बना देगी, जिससे आम और गरीब वर्ग के लिए शिक्षा की पहुंच सीमित हो सकती है। ** ---** **जरूरत है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को प्राथमिकता से लेते हुए सख्त नियम बनाए और उनका पालन सुनिश्चित करे। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता लाना समय की मांग है, ताकि हर वर्ग के ब****च्चों को समान अवसर मिल** सके।**
Ad

ताज़ा खबरें