फर्जी मेडिकल बनाकर जमानत बढ़ाने की साजिश नाकाम, पिता-पुत्र समेत 3 दोषियों को 7-7 साल की सजा
मनासा (नीमच), 25 जुलाई। अंतरिम जमानत की अवधि बढ़वाने के लिए फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार कर न्यायालय को गुमराह करने के मामले में मनासा न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री आशुतोष यादव ने पिता-पुत्र सहित तीन आरोपियों को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए अधिकतम 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है।
दोषियों में अमरलाल मालवीय (55) और उसका पुत्र दीपक मालवीय (37) निवासी ग्राम बर्डिया, तहसील मनासा तथा फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार करने वाला रोहित यादव (33) निवासी आजाद नगर, भीलवाड़ा (राजस्थान) शामिल हैं।
अभियोजन के अनुसार, एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में जेल में बंद अमरलाल को पत्नी के इलाज के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से एक माह की अंतरिम जमानत मिली थी। बाद में उसने जमानत बढ़वाने के लिए यह दावा किया कि उसके पैर में एसीएल टियर और फ्रैक्चर हो गया है। इसके समर्थन में भीलवाड़ा के मालू अस्पताल के कथित मेडिकल दस्तावेज, चिकित्सीय प्रमाण-पत्र, प्लास्टर चढ़े पैर की तस्वीरें तथा बेटे दीपक का शपथ-पत्र हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
हाईकोर्ट के निर्देश पर दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, जिसमें सभी मेडिकल दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर थाना मनासा में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। विवेचना में खुलासा हुआ कि अमरलाल और दीपक ने जेल वापस जाने से बचने के लिए ₹10,000 देकर भीलवाड़ा के एक नर्सिंग स्टाफ कर्मचारी रोहित यादव से फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार करवाए थे।
जांच पूरी होने के बाद अभियोजन ने न्यायालय में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए। अपर लोक अभियोजक गुलाबसिंह चंद्रावत ने सभी महत्वपूर्ण गवाहों के बयान कराकर आरोपियों का अपराध संदेह से परे सिद्ध कराया। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
सजा का विवरण:
अमरलाल मालवीय एवं दीपक मालवीय को धारा 420 में 5-5 वर्ष तथा धारा 467, 468, 471 एवं 120-बी के तहत 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ अर्थदंड।
रोहित यादव को धारा 420 में 5 वर्ष तथा धारा 467 और 468 के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा।
शासन की ओर से प्रभावी पैरवी:
इस प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक गुलाबसिंह चंद्रावत ने प्रभावी पैरवी की।