जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने सर्पदंश पीड़ित 15 वर्षीय अनमोल को दिया नवजीवन
डॉ.सतीश चौधरी व टीम के अथक प्रयास से 6 दिन में हुआ पूर्ण स्वस्थ कहते हैं,कि चिकित्सक भगवान का दूसरा रूप होता है। उक्त बात को जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. सतीश चौधरी एवं उनकी टीम ने सच कर दिखाया। सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेन्द्र पाटील ने बताया कि रामपुरा क्षेत्र के गांव बुरावन के 15 वर्षीय अमनोल पिता गोपाल को 8 मई की रात 3 बजे गर्दन पर किसी जहरीले जानवर के काटने का आभास हुआ। कुछ ही देर में बच्चा अचेत हो गया। परिजनों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बिना एक पल गंवाए उसे सिविल हॉस्पिटल रामपुरा पहुंचाया। सिविल अस्पताल रामपुरा में बच्चे की गंभीर स्थिति का आंकलन कर चिकित्सक द्वारा तत्काल जिला चिकित्सालय ले जाने की सलाह दी गई। परिजन तुरंत जिला चिकित्सालय नीमच पहुंचे। जिला चिकित्सालय पहुंचने पर बच्चे की हालत बेहद नाजुक थी। वह अचेत अवस्था में था तथा लगभग उसके प्राण समाप्त हो चुके थे। ऐसी स्थिति में जिला चिकित्सालय के मेडिकल विशेषज्ञ एवं आई.सी.यू. प्रभारी डॉ. सतीश चौधरी ने जांच के दौरान पाया कि बच्चे को न्यूरो टॉक्सिक सर्पदंश है, जो अत्यन्त खतरनाक स्थिति होती है। डॉ. चौधरी ने अपनी टीम के साथ त्वरित उपचार का दायित्व संभालते हुए तत्काल इलाज प्रारंभ किया तथा 20 यूनिट एंटी स्नैक वेनम इंजेक्शन दिए । चिकित्सक डॉ. चौधरी एवं स्वास्थ्य टीम सतत उपचार की बदौलत-3 दिन तक अनमोल जिंदगी और मौत की जंग लड़ता रहा और अचेत अवस्था में आई.सी.यू. में रहा। किन्तु चिकित्सकों ने हार नहीं मानी तथा परिजनों ने भी हिम्मत नहीं हारी। चिकित्सकों द्वारा दिन-रात स्वास्थ्य सूचकांकों की मॉनिटरिंग की गई तथा बेहतर से बेहतर इलाज दिया गया। परिणामस्वरूप 3 दिवस पश्चात अनमोल को होश आया तथा 6 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद पूर्ण स्वस्थ स्थिति में उसे 13 मई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अनमोल एवं उसके परिजन मध्यप्रदेश सरकार की अस्पताल व्यवस्था, जिला चिकित्सालय की सेवा भावना एवं चिकित्सकों और उनकी टीम को बारंबार धन्यवाद दे रहे हैं। यह घटना जिला चिकित्सालय की तत्परता एवं उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं का प्रमाण है।