सिद्धारमैया ने किया भावुक पोस्ट, कहा- मैंने कभी सोचा भी नहीं था
Siddaramaiah Emotional Post: सिद्धारमैया ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से लिखा- आज, मैं लोक भवन गया और, गवर्नर की गैर-मौजूदगी में, मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा गवर्नर के स्पेशल सेक्रेटरी को सौंप दिया. मैंने कभी सोचा भी नहीं था… एक ऐसे इंसान के तौर पर जिसका जन्म और पालन-पोषण एक छोटे से गांव में हुआ, मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन मैं MLA, मंत्री, विपक्ष का नेता बनूंगा, और दो बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा करूंगा.
इतना बड़ा सपना सिर्फ बाबासाहेब डॉ बी आर अंबेडकर द्वारा लिखे गए संविधान की वजह से ही मुमकिन हो पाया. 48 साल के सार्वजनिक जीवन में मैंने हमेशा ईमानदारी से काम किया : सिद्धारमैया सिद्धारमैया ने अपने पोस्ट में आगे लिखा- बुद्ध, बसवन्ना, बाबासाहेब अंबेडकर और महात्मा गांधी ने हमेशा मुझे सही रास्ता दिखाया है.
अपने अड़तालीस साल के सार्वजनिक जीवन में, मैंने हमेशा ईमानदारी से गरीबों, दबे-कुचलों, उपेक्षितों और समाज में जिन्हें मौके नहीं मिले, उनके साथ खड़े होने की कोशिश की है. यही मेरे जीवन की सबसे बड़ी संतुष्टि है. सिद्धारमैया ने सोनिया, राहुल और खरगे का जताया आभार मैं हमेशा उन पार्टी विधायकों का आभारी रहूंगा जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मुझे अपना नेता चुना; अपने कैबिनेट सहयोगियों का, जो हर चुनौती में मेरे साथ चले; और श्रीमती सोनिया गांधी, श्री राहुल गांधी और AICC अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे का, जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी.
Today, I went to Lok Bhavan and, in the absence of the Governor, handed over my resignation letter from the post of Chief Minister to the Governor’s Special Secretary. As someone who was born and brought up in a small village, I had never imagined that one day I would become an… pic.twitter.com/T1YxxoH7PQ — Siddaramaiah (@siddaramaiah) May 28, 2026 मैं कर्नाटक की जनता के सामने सिर झुकाता हूं: सिद्धारमैया सिद्धारमैया ने अपने पोस्ट में आगे लिखा- मैं कर्नाटक की जनता के सामने अपना सिर झुकाता हूं.
लाखों प्यारे दिलों के सामने, जिन्होंने मुझे अपना ही एक हिस्सा माना, मुझे आशीर्वाद दिया, मेरा हौसला बढ़ाया, मेरी गलतियों को सुधारा, मुश्किल समय में मेरे साथ खड़े रहे, और इस लंबी यात्रा में हर कदम पर मेरा हाथ थामे रखा. आज मैं जो कुछ भी हूं, वह आप ही की वजह से हूं.
मेरा इस्तीफा सिर्फ मुख्यमंत्री के पद से है, सार्वजनिक जीवन से नहीं : सिद्धारमैया संविधान ही मेरा धर्म है, और जनता ही मेरे भगवान हैं. मेरा इस्तीफा सिर्फ मुख्यमंत्री के पद से है, सार्वजनिक जीवन से या जनता के प्रति मेरी प्रतिबद्धता से नहीं. अपनी आखिरी सांस तक, मैं सामाजिक न्याय के लिए लड़ता रहूंगा और उन फूट डालने वाली सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ खड़ा रहूंगा जो हमारे संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं.
इस यात्रा के हर कदम पर आपके प्यार, भरोसे और साथ के लिए धन्यवाद. ये भी पढ़ें: सिद्धारमैया ने राज्यसभा का ऑफर ठुकराया, कहा- मुझे राष्ट्रीय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं.