जंतर-मंतर पर दलित ईसाइयों के प्रदर्शन पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस से कहा- जल्द लें फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन पर अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी (AIDCRPC) की अनुमति संबंधी अर्जी पर कानून के मुताबिक फैसला लेकर शनिवार ( 8 अगस्त ) तक संगठन को सूचित करे.
अदालत ने साफ किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का अधिकार क्षेत्र है. 75 लोगों के शांतिपूर्ण धरने की थी मांग याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने अदालत को बताया कि संगठन 10 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक जंतर-मंतर पर केवल 75 लोगों के साथ शांतिपूर्ण धरना देना चाहता है.
उन्होंने कहा कि इसमें कोई रैली या मार्च नहीं होगा और दिल्ली पुलिस के सभी नियमों का पालन किया जाएगा. संगठन का कहना है कि वह लंबे समय से दलित ईसाइयों को एससी का दर्जा देने की मांग उठा रहा है. कोर्ट में दाखिल याचिका के मुताबिक, AIDCRPC ने 9 जुलाई को प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन दिया था.
संगठन का आरोप है कि कई बार संपर्क करने के बावजूद उन्हें कोई लिखित जवाब नहीं मिला. 4 अगस्त को केवल मौखिक रूप से बताया गया कि अनुमति नहीं दी जाएगी, लेकिन इसका कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया और न ही कोई वैकल्पिक स्थान सुझाया गया. कोर्ट की टिप्पणी- प्रदर्शन से जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए अदालत में सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इससे आम जनता को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए.
अदालत ने टिप्पणी की कि किसी भी प्रदर्शन के कारण पूरे शहर को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन की अनुमति देना या न देना पुलिस और सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है. पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का दिया हवाला केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू है और कई इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है.
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने के मुद्दे पर पहले से सुनवाई चल रही है. ऐसे में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस फैसला करेगी. ये भी पढ़ें: संसद में बढ़ा सियासी तनाव! शाह-बिड़ला की 1 घंटे की बंद कमरे में मीटिंग, क्या टूटेगा विपक्ष का घेराव?.