Logo
ब्रेकिंग न्यूज़
Smash the Patriarchy 2: जब गाली बनी Gen Z की स्लैंग, तो लड़कियों के लिए क्यों बदल जाता है पैमाना?हिमालय में भूकंप से कैसे आती है फ्लैश फ्लड, जानिए डेंजर जोन में क्यों रहता है नेपालNepal Flood: भारत-चीन वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर नेपाल की मदद में जुटे, भारत भेज रहा राहत सामग्री; IAF के विमान तैयारमुख्यमंत्री डॉ. यादव पहुंचे तीर्थनगरी ओंकारेश्वर | खेड़ीघाट में श्री राजराजेश्वरी त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर में सपत्नीक किए दर्शन-पूजन मंगल दास त्यागी महाराज से भेंट कर लिया आशीर्वादमुख्यमंत्री डॉ. यादव 27 अगस्त को जबलपुर में ‘माय भारत युवा कनेक्ट-खेलो इंडिया संवाद’ में होंगे शामिलNepal Flood : प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाली पीएम बालेन शाह से फोन पर की बात, कहा- हर संभव मदद के लिए तैयारचम्बल औद्योगिक प्रगति से बना रहा है नई पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव | प्रदेश में निवेशकों का अभूतपूर्व निवेश मेड इन एमपी, फेथ इन एमपी का उत्कृष्ट उदाहरण मप्र में बेरोजगारी दर सबसे कम तेजी से औद्योगिक तरक्की करने में देश में अव्वल है मप्र जीआईएस-25 में मिलएमसीपीएस का सफल परीक्षण सेना की क्षमता और रक्षा तकनीक को देगा मजबूती : मुख्यमंत्री डॉ. यादव | रक्षा क्षेत्र में नई-नई उपलब्धियां हासिल करने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताया हर्षलाड़ली बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बांधी स्नेह और विश्वास से भरी राखियां | मुख्यमंत्री ने दोहराया प्रदेश की हर बहन की खुशहाली का संकल्प महिला सुरक्षा कर्मियों ने भी बांधी राखी मुख्यमंत्री को धन्यवाद पत्र भी भेंट किया लाड़ली बहनोंHeavy Rain Warning: 27 से 31 अगस्त और 1 सितंबर को भारी बारिश, आंधी-तूफान का अलर्टविद्यार्थियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव | विद्यार्थियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले स्कूल वैन चालक पर प्रकरण दर्ज, भेजा जेल स्कूल संचालक के विरुद्ध भी मामला दर्ज, वैन जब्त मुख्यमंत्री के निर्देश पर देवास में त्वरित कार्रवाईKal Ka Mausam: रक्षाबंधन पर बरसेंगे बादल, 28 अगस्त को इन राज्यों में बारिश डाल सकता है खललमोहन भागवत के कार्यक्रम पर ममदानी से भिड़ीं अमेरिकी सिंगर मिलबेन, बोलीं- इवेंट होकर रहेगामुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जौहर दिवस पर किया नमनजमीन खरीदने से पहले कौन से कागजात जांचें? Registry से पहले आम खरीदार के लिए जरूरी चेकलिस्ट

Smash the Patriarchy 2: जब गाली बनी Gen Z की स्लैंग, तो लड़कियों के लिए क्यों बदल जाता है पैमाना?

Author
Prabhat Khabar 26 अगस्त 2026, 11:31 pm
Smash the Patriarchy 2: जब गाली बनी Gen Z की स्लैंग, तो लड़कियों के लिए क्यों बदल जाता है पैमाना?

ऐसे में जब Gen Z लड़कियों की जुबान से बिना कॉमा-फुलस्टॉप के गालियां निकलती हैं, तो कई लोगों को यह किसी कल्चरल शॉक से कम नहीं लगता. सड़क पर कोई लड़की गाली दे दे तो बात सिर्फ उसकी भाषा तक नहीं रहती, उसके चरित्र से होते हुए परिवार की परवरिश और संस्कार तक पहुंच जाती है.

वहीं यही काम कोई लड़का करे तो अक्सर उसे लड़कों की आदत, दोस्तों की भाषा या मस्ती कहकर टाल दिया जाता है. सवाल यह है कि गाली गलत है या उसका जेंडर तय करता है कि उसे कितना गलत माना जाएगा? क्या लड़कियों की जुबान पर लगाई गयी पाबंदियां उन्हें विद्रोही बना रही हैं? या फिर सोशल मीडिया और Gen Z की स्लैंग कल्चर ने भाषा की उन सीमाओं को ही बदल दिया है, जिन्हें पिछली पीढ़ियां मर्यादा मानती थीं? इस कहानी को समझने के लिए हमने अलग-अलग शहरों की Gen Z लड़कियों से बात की.

उनकी बातें बताती हैं कि वे गाली को सही नहीं ठहरातीं, लेकिन यह सवाल जरूर उठाती हैं कि भाषा और चरित्र का पैमाना लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग क्यों हो? पहले Gen Z को समझें लखनऊ की शाम्भवी मुखर्जी जो पेशे से एक टीचर हैं कहती हैं कि इस विषय को समझने के लिए पहले आपको जेन जी को समझना होगा.

जेन जी दो तरह के हैं-एक जो मेट्रो सिटी में रहते हैं और दूसरे वो जो स्माॅल टाउन में रहते हैं. आप देखेंगे कि जो स्माॅल टाउन के जेन जी हैं, उनके लैंग्वेज में अभद्र शब्द कम होते हैं, जबकि मेट्रो सिटी के जेन जी में ज्यादा होते हैं. यहां यह गौर करने वाली बात भी है कि दोनों के ब्रिंग अप में भी काफी फर्क होता है.

किसी को अपने पैरेंट्‌स के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका मिलता है और किसी को कम. ऐसे में वे सोशल मीडिया की ओर जाते हैं, जहां अभद्र भाषा और गालियों की भरमार है. अगर बात सिर्फ गाली देने की है, तो इसे ऐसे समझना चाहिए कि हमारे समाज में यह बहुत आम है. शहरी महिलाएं भले ही पब्लिक प्लेस में उस तरह से गालियां ना बकती हों, लेकिन गांव की महिलाएं, छोटे शहरों की महिलाएं काफी पुराने समय से गालियां देती रही हैं.

जेंडर बायसनेस ने महिलाओं को बनाया rebellious शाम्भवी मुखर्जी कहती हैं कि हमारे समाज में जेंडर बायनेस तो आज भी है, चाहे उसकी वजह कुछ भी हो. मैं इस बात को मानती हूं कि मां-बाप अपनी सुरक्षा के लिए लड़कियों पर बंदिश लगाते हैं, लेकिन कहीं ना कहीं इन्हीं बंदिशों ने लड़कियों को रिबेलियस यानी विद्रोही बना दिया.

अगर गाली देना बुरी बात है तो इसके लिए लड़कों को भी रोका जाना चाहिए. सिगरेट पीने से अगर कैंसर होता है, तो यह ज्ञान सिर्फ लड़कियों को नहीं लड़कों को भी देना चाहिए. बस इसी वजह से लड़कियों ने उन मर्यादाओं को तोड़ा, जो उनपर बंदिशें लगा रही थीं. आईआईटी दिल्ली की मुस्कान झा कहती हैं कि गाली देना बुरी बात है यह सबको पता है, लेकिन अगर आप इसे केवल लड़कियों से जोड़ते हैं तो वह सही नहीं लगता है.

इसकी वजह यह कि आप इससे महिलाओं का कैरेक्टर डिफाइन करने लगते हैं. इसमें लड़का और लड़की का फर्क नहीं किया जाना चाहिए. गाली देना किसी की पर्सनालिटी डिफाइन नहीं करता आईआईटी दिल्ली की मुस्कान कहती हैं कि यहां आने से पहले मैं बहुत संकोची स्वभाव की थी और मुझे ऐसा लगता था कि गाली देने वाला व्यक्ति खराब होता है.

आईआईटी दिल्ली आकर मैंने यह जाना कि ऐसा नहीं है, गाली देना अलग बात है और अच्छा इंसान होना अलग. कई लोग ऐसे हैं जो अपनी भाषा में गालियों का प्रयोग नहीं करते, लेकिन उनकी सोच छोटी होती है. लड़कियां जब अपने घरों में रहती हैं ग्रुपिंग के लिए गाली-गलौच की भाषा में बात करते हैं जेन जी मुस्कान कहती हैं कि जेन जी को यह पता है कि भाषा की मर्यादा क्या होती है.

हमलोग अपने दोस्तों के साथ बातचीत में दोस्ताना माहौल के लिए गाली-गलौज की भाषा में जरूर बात करते हैं, लेकिन किसी पब्लिक प्लेस में या अपने पैरेंट्‌स के सामने ऐसे बात नहीं करते हैं. हमें पता है कि भाषा की मर्यादा क्या होती है. मुंबई की आरुषि अभी ग्रेजुएशन कर रही हैं वे कहती हैं कि गाली अब बोलचाल का हिस्सा हो गया है.

जेन जी जिस माहौल में जिस तरह से पल पढ़ रहे हैं, उन्हें इस तरह की भाषा का प्रयोग करना पड़ता है क्योंकि सब कर रहे हैं. अगर नहीं करेंगे तो उनका मजाक बनेगा. रांची की प्राची भी इस बात को कहती हैं कि अगर आप जेन जी के स्लैंग का प्रयोग नहीं करेंगे तो आप उनके ग्रुप से बाहर हो जाएंगे और आपका मजाक बनेगा.

बस इसी चक्कर में वे गालियां देते हैं. सोशल मीडिया ने बिगाड़ी भाषा जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तस्वीर (Photo- PTI) आरुषि कहती हैं कि Gen Z के जीवन का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर गुजरता है. रील्स, मीम्स, कमेंट्स और चैटिंग में जिस तरह की स्लैंग और बेझिझक भाषा का इस्तेमाल होता है, वह धीरे-धीरे उनकी रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन जाती है.

शुरुआत में जो शब्द सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित होते हैं, वही दोस्तों के बीच बातचीत में आने लगते हैं और फिर आदत का हिस्सा बन जाते हैं. कई बार ऐसी भाषा को ‘कूल’, बेबाक और ग्रुप में घुलने-मिलने का तरीका भी माना जाता है. यही वजह है कि Gen Z के लिए कुछ ऐसे शब्द, जिन्हें पिछली पीढ़ियां अभद्र मानती थीं, अब सामान्य बोलचाल और स्लैंग का हिस्सा बन चुके हैं.

जंतर-मंतर पर जो हुआ वह गलत इस स्टोरी के दौरान प्रभात खबर ने अलग-अलग शहरों की कई Gen Z लड़कियों से बात की. दिलचस्प बात यह रही कि एक भी लड़की ने जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री के प्रति इस्तेमाल की गयी आपत्तिजनक भाषा को सही नहीं ठहराया. उनका साफ कहना था कि असहमति जताने और किसी के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के बीच फर्क होना चाहिए.

देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है-चाहे वह कोई लड़का करे या लड़की. हालांकि, इन लड़कियों ने एक और सवाल भी उठाया कि अगर किसी की भाषा आपत्तिजनक है, तो उसकी आलोचना होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ लड़की होने की वजह से उसे कठघरे में खड़ा करना भी सही नहीं है.

गाली को गलत मानने का पैमाना जेंडर के आधार पर नहीं, बल्कि सबके लिए एक जैसा होना चाहिए. महिलाओं की भाषा पर पहरे की कोशिश बहुत पुरानी अमेरिकी भाषाविद् और समाजभाषाविज्ञानी रॉबिन लैकॉफ ने 1973 में अपनी चर्चित किताब Language and Woman's Place में महिलाओं की भाषा को लेकर समाज की उम्मीदों पर सवाल उठाया था.

उनका तर्क था कि महिलाओं से बोलचाल में अधिक विनम्र, संयमित और स्त्रियोचित होने की अपेक्षा की जाती है. यानी समाज सिर्फ यह तय नहीं करता कि महिला क्या करेगी, बल्कि यह भी तय करने की कोशिश करता है कि वह किस तरह बोलेगी.लैकॉफ के विश्लेषण में महिलाओं से तीखे शब्दों और गालियों यानी से बचने की सामाजिक अपेक्षा भी शामिल थी.

यही वजह है कि किसी महिला की बेबाक या आक्रामक भाषा को अक्सर उसके पुरुष समकक्ष की तुलना में ज्यादा असामान्य माना जाता है. ये भी पढ़ें: Smash the Patriarchy 1 : प्यार-मोहब्बत अपनी जगह,सेल्फ आइडेंटिटी से समझौता नहीं चाहती हैं Gen Z लड़कियां राहुल गांधी के Smash the Patriarchy नारे के बीच क्यों ट्रेंड कर रहीं शाहबानो? जानिए पूरा मामला.

Ad

ताज़ा खबरें

हिमालय में भूकंप से कैसे आती है फ्लैश फ्लड, जानिए डेंजर जोन में क्यों रहता है नेपाल
राष्ट्रीय

हिमालय में भूकंप से कैसे आती है फ्लैश फ्लड, जानिए डेंजर जोन में क्यों रहता है नेपाल

Nepal Flood: भारत-चीन वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर नेपाल की मदद में जुटे, भारत भेज रहा राहत सामग्री; IAF के विमान तैयार
राष्ट्रीय

Nepal Flood: भारत-चीन वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर नेपाल की मदद में जुटे, भारत भेज रहा राहत सामग्री; IAF के विमान तैयार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहुंचे तीर्थनगरी ओंकारेश्वर | खेड़ीघाट में श्री राजराजेश्वरी त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर में सपत्नीक किए दर्शन-पूजन मंगल दास त्यागी महाराज से भेंट कर लिया आशीर्वाद
मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहुंचे तीर्थनगरी ओंकारेश्वर | खेड़ीघाट में श्री राजराजेश्वरी त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर में सपत्नीक किए दर्शन-पूजन मंगल दास त्यागी महाराज से भेंट कर लिया आशीर्वाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 27 अगस्त को जबलपुर में ‘माय भारत युवा कनेक्ट-खेलो इंडिया संवाद’ में होंगे शामिल
मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 27 अगस्त को जबलपुर में ‘माय भारत युवा कनेक्ट-खेलो इंडिया संवाद’ में होंगे शामिल

Nepal Flood : प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाली पीएम बालेन शाह से फोन पर की बात, कहा- हर संभव मदद के लिए तैयार
राष्ट्रीय

Nepal Flood : प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाली पीएम बालेन शाह से फोन पर की बात, कहा- हर संभव मदद के लिए तैयार