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शिक्षा मंत्री प्रधान को 13 जून तक का अल्टीमेटम सीजेपी संस्थापक दीपके ने दिया, देखें क्या कहा

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Prabhat Khabar 08 जून 2026, 11:12 am
शिक्षा मंत्री प्रधान को 13 जून तक का अल्टीमेटम सीजेपी संस्थापक दीपके ने दिया, देखें क्या कहा

नेपाल और बांग्लादेश में हाल में हुए ‘जेन जेड’ के प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर दीपके ने रविवार (7 जून) को इस बात पर जोर दिया कि सीजेपी आंदोलन शांतिपूर्ण रहा और इसकी तुलना पड़ोसी देशों में हुए प्रदर्शनों से नहीं की जा सकती. उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी पूरी तरह से ‘जेन जेड’ के लिए है.

इसकी किसी राजनीतिक दल से संबद्धता नहीं होगी. कॉकरोच जनता पार्टी ने देश में कथित पेपर लीक के मामले में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छह जून को नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था. रविवार रात को ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में दीपके ने कहा कि मैंने पहले कहा था कि अगर धर्मेंद्र प्रधान शनिवार (13 जून) तक इस्तीफा नहीं देते हैं तो आंदोलन व्यापक स्तर पर चलेगा.

उसी संदर्भ में मैं यह भी कहना चाहता हूं कि अगर प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो मैं व्यक्तिगत रूप से विभिन्न शहरों और राज्यों में जाकर उनके इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करूंगा. उन्होंने दिल्ली में आंदोलन के अगले चरण की योजनाओं के बारे में भी बात की.

Please note. https://t.co/dV1vsYdQxn — Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) June 7, 2026 प्रधान के इस्तीफे तक हम नहीं रुकेंगे : दीपके दीपके ने कहा कि अगर राज्यों में प्रदर्शन के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो हमारे पास फिर से आंदोलन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.

तब देश के विभिन्न कोनों से छात्र नयी दिल्ली में इकट्ठा होंगे और शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करेंगे. उन्होंने ने कहा कि प्रधान के इस्तीफे तक हम नहीं रुकेंगे. उन्हें एक करोड़ से अधिक छात्रों का भविष्य बर्बाद करने के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए. पड़ोसी देशों में हुए आंदोलन को लेकर क्या बोले दीपके इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपके ने कहा कि ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टा) शब्द के विरोध में एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में शुरू हुए सीजेपी आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों में हुए आंदोलनों से नहीं की जा सकती.

उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि पड़ोसी देशों में ‘जेन जेड’ के कारण जो ‘‘क्रांति’’ हुई वह भारत में भी हो सकती है. इस पर दीपके ने कहा कि मैं इसकी (आंदोलन की) तुलना पड़ोसी देशों से नहीं करना चाहता क्योंकि यहां (भारत में) एक व्यवस्था है. लेकिन बांग्लादेश और नेपाल में जो हुआ है उससे तुलना करते हुए एक अलग व्याख्या हो रही है.

वे यह भी कहते हैं कि हम देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग हमारे आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों में हुए आंदोलनों से करते हैं उन्हें यह जानना चाहिए कि जंतर-मंतर आंदोलन बहुत शांतिपूर्ण रहा, जबकि वहां काफी भीड़ थी. आंदोलन में शामिल होने वाले युवा देश के कोने-कोने से आए थे.

अब आगे और भी बड़े प्रदर्शन होंगे और वे भी शांतिपूर्ण होंगे..

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