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वकील बनकर कोर्ट जाना ममता बनर्जी को पड़ेगा भारी? बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 48 घंटे में मांगी रिपोर्ट

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Prabhat Khabar 14 मई 2026, 07:02 pm
वकील बनकर कोर्ट जाना ममता बनर्जी को पड़ेगा भारी? बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 48 घंटे में मांगी रिपोर्ट

खास बातें बार काउंसिल ने पूछा- क्या ममता का लाइसेंस सक्रिय है? मीडिया रिपोर्ट्स का बीसीआई ने लिया संज्ञान क्या है नियमों का पेच क्या दीदी से हो गयी बड़ी चूक? सियासी गलियारों में चर्चा तेज ममता बनर्जी को भविष्य में वकालत करने से रोका जा सकता है BCI Report on Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकील के गाउन में कलकत्ता हाईकोर्ट में पेश होने के मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. बार काउंसिल ने पूछा- क्या ममता का लाइसेंस सक्रिय है? बीसीआई ने पूछा है कि क्या ममता बनर्जी का वकालत का लाइसेंस सक्रिय है? क्या मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने नियमों का पालन किया था? इस रिपोर्ट के आने के बाद ममता बनर्जी की ‘प्रोफेशनल’ वकालत की स्थिति पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.

मीडिया रिपोर्ट्स का बीसीआई ने लिया संज्ञान बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सचिव श्रीरामंतो सेन की ओर से जारी पत्र में कई गंभीर सवाल उठाये गये हैं. बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के सचिव को निर्देश दिया है कि 2 दिन के भीतर ममता बनर्जी के पंजीकरण (Registration) से जुड़ी पूरी जानकारी भेजी जाये.

बार काउंसिल जानना चाहता है कि 2011 से 2026 तक, जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद पर थीं, तब उनके वकालत के लाइसेंस की स्थिति क्या थी. इसे भी पढ़ें : वकील के गाउन में अदालत पहुंचीं ममता बनर्जी, बंगाल चुनाव 2026 के बाद हिंसा पर सरकार को घेरा क्या है नियमों का पेच प्रचलित कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी संवैधानिक पद या सरकारी नौकरी में होता है, तो उसे अपना बार लाइसेंस निलंबित (Suspend) करवाना पड़ता है.

दोबारा प्रैक्टिस शुरू करने के लिए इसे फिर से सक्रिय (Re-activate) कराना अनिवार्य है. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें क्या दीदी से हो गयी बड़ी चूक? ममता बनर्जी बृहस्पतिवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में टीएमसी कार्यकर्ताओं की पैरवी करने पहुंची थीं.

वहां उन्होंने बाकायदा काला गाउन पहनकर बहस की. बीसीआई जांच कर रहा है कि क्या मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद ममता बनर्जी ने अपने लाइसेंस को रिन्यू करने के लिए बार काउंसिल में आवेदन किया था? क्या उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए भी अपना पंजीकरण सक्रिय रखा था? यह बार काउंसिल के नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है.

इसे भी पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वाली पहली मुख्यमंत्री बनीं ममता बनर्जी BCI Report on Mamata Banerjee: सियासी गलियारों में चर्चा तेज ममता बनर्जी के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने कार्यकर्ताओं के हक की लड़ाई के लिए यह कदम उठाया है. वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनके पास सक्रिय लाइसेंस नहीं था, तो कानूनी पोशाक (Legal Attire) पहनकर कोर्ट में जिरह करना उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल सकता है.

ममता बनर्जी को भविष्य में वकालत करने से रोका जा सकता है पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को शनिवार तक अपनी रिपोर्ट दिल्ली भेजनी होगी. अगर रिपोर्ट में नियमों की अनदेखी पायी गयी, तो ममता बनर्जी को भविष्य में वकालत करने से रोका भी जा सकता है. फिलहाल, सबकी नजरें बार काउंसिल के अगले कदम पर टिकी हैं.

इसे भी पढ़ें TMC में गृहयुद्ध! नेताओं ने I-PAC को ठहराया जिम्मेदार, ममता बनर्जी को संकट की चेतावनी, क्या खतरे में है दीदी की कुर्सी? सत्ता छिनते ही TMC के अस्तित्व पर संकट, जानें क्यों अब ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह है कठिन ममता बनर्जी 31 सीटों पर ‘वोटर लिस्ट’ को सुप्रीम कोर्ट में देंगी चुनौती, क्या बदल जायेंगे बंगाल के चुनाव परिणाम? बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- मुख्यमंत्री जांच में हस्तक्षेप करें तो लोकतंत्र खतरे में.

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