मंदिर की भूमि पर फसल बोने से रोकने का आरोप, पुजारी ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार 17 वर्षों से सेवा दे रहे पुजारी हरिवर्धन उपाध्याय बोले— प्रशासनिक आदेशों के बावजूद नहीं मिल रहा भूमि पर कब्जा, जान से मारने की धमकी का भी लगाया आरोप
रामपुरा (नीमच)। रामपुरा स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के पुजारी हरिवर्धन उपाध्याय ने मंदिर की कृषि भूमि पर फसल नहीं बोने दिए जाने और प्रशासनिक आदेशों के बावजूद कब्जा नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर नीमच को आवेदन सौंपकर न्याय की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो उनके सामने आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
कलेक्टर को दिए आवेदन में हरिवर्धन उपाध्याय ने बताया कि वे वर्ष 2009 से श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, माणक चौक रामपुरा में विधिवत नियुक्त पुजारी हैं और पिछले करीब 17 वर्षों से मंदिर की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर के नाम ग्राम मान्याखेड़ी में दर्ज लगभग 7.03 हेक्टेयर कृषि भूमि से ही उनके परिवार का जीवन-यापन होता है।
आवेदन के अनुसार वर्ष 2024 में कुछ लोगों ने मंदिर की भूमि पर खेती करने से रोक दिया था, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय द्वारा भूमि से बेदखल करने के आदेश पारित किए गए और बाद में अपील भी निरस्त कर दी गई। इसके बाद राजस्व एवं पुलिस दल की मौजूदगी में उन्हें भूमि का कब्जा सौंपा गया।
पुजारी का आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित लोगों ने दोबारा भूमि पर कब्जा कर लिया और जब भी वे खेत पर फसल बोने जाते हैं, उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले में संबंधित लोगों के विरुद्ध राजस्व संहिता के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई, नोटिस जारी हुए और गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए गए, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
हरिवर्धन उपाध्याय ने आवेदन में कहा है कि लगातार प्रशासनिक एवं न्यायालयीन आदेशों के बावजूद उन्हें मंदिर की भूमि पर खेती नहीं करने दी जा रही है, जिससे उनका परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप कर मंदिर की भूमि पर खेती कराने, सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।