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पत्नी, बच्चे और माता-पिता, जानिए सोनम वांगचुक की फैमिली में कौन-कौन हैं?

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Prabhat Khabar 18 जुलाई 2026, 01:05 pm
पत्नी, बच्चे और माता-पिता, जानिए सोनम वांगचुक की फैमिली में कौन-कौन हैं?

Sonam Wangchuk Family : लद्दाख के मशहूर इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन दिनों अपने आमरण अनशन को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर वे 21 दिनों से अनशन पर थे.

तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस घटनाक्रम के बाद लोग सोनम वांगचुक के बारे में और अधिक जानना चाह रहे हैं. आइए जानें कि उनके परिवार में कौन-कौन हैं. कौन हैं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि? सोनम वांगचुक की पत्नी का नाम गीतांजलि जे.

एंगमो है, जो पेशे से एक सोशल एंटरप्रेन्योर और एजुकेशनिस्ट हैं. ओड़िशा के बालासोर में एक पंजाबी-जैन परिवार में जन्मीं गीतांजलि की बचपन से ही सामाजिक विकास में गहरी रुचि थी. उन्होंने ओड़िशा फकीर मोहन विश्वविद्यालय से भौतिकी में डिग्री प्राप्त की और उसके बाद भुवनेश्वर के जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मार्केटिंग और फाइनेंस में एमबीए किया.

ये भी पढ़ें : PHOTO : ह्यूमन चेन, सफेद पर्दा और पुलिस का घेरा... ऐसे जंतर-मंतर से हटाए गए सोनम वांगचुक, देखें तस्वीरें वर्ल्ड चैंपिंयन रह चुकी हैं गीतांजलि एक सामाजिक उद्यमी और शिक्षिका के रूप में उनका करियर सोनम के प्रेरक जीवन के साथ काफी मेल खाता है.

शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ वह कराटे में ब्लैक बेल्ट भी हैं और 2009 में वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी हैं. पिता सोनम वांग्याल भी रहे बड़े जननेता सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल लद्दाख के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में गिने जाते थे. वे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस और बाद में कांग्रेस पार्टी से जुड़े.

अपने राजनीतिक जीवन में वे जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य (MLA) रहे और 1975 में राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने. वर्ष 1984 में उन्होंने लद्दाख के लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर लेह में आमरण अनशन शुरू किया था. उनकी बिगड़ती तबीयत की खबर मिलने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खुद दिल्ली से लेह पहुंचीं और उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया.

इस आंदोलन के कुछ साल बाद 1989 में लद्दाख को एसटी का दर्जा मिला. उनका निधन 1998 में हुआ. ये भी पढ़ें : अभिजीत दीपके का ऐलान: सोनम वांगचुक गए तो क्या, अब मैं बैठूंगा अनशन पर सोनम वांग्याल नाम के एक और शख्स ने बनाया था इतिहास सोनम वांग्याल नाम से एक और प्रसिद्ध शख्स लद्दाख से ही आते हैं, लेकिन उनका सोनम वांगचुक के परिवार से संबंध नहीं है.

वे भारत के जाने-माने पर्वतारोही और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के पूर्व जवान रहे हैं. मई 1965 में कैप्टन एम.एस. कोहली के नेतृत्व वाले भारत के पहले सफल एवरेस्ट अभियान में उन्होंने महज 23 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया था. इसके लिए उन्हें पद्म श्री, अर्जुन पुरस्कार और वर्ष 2017 में तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार (लाइफटाइम अचीवमेंट) से सम्मानित किया गया.

बाद में वे खुफिया ब्यूरो (IB) में सहायक निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए. मां ने घर पर ही दी थी शुरुआती शिक्षा सोनम वांगचुक की मां सेरिंग वांगमो ने उनके बचपन और शिक्षा की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई. उस समय उनके गांव उलेतोकपो में कोई स्कूल नहीं था.

ऐसे में करीब 9 साल की उम्र तक उन्होंने अपने बेटे को घर पर ही पढ़ाया. सेरिंग वांगमो ने उन्हें मातृभाषा लद्दाखी में पढ़ना-लिखना सिखाया और जीवन से जुड़े कई व्यावहारिक सबक भी दिए. सोनम वांगचुक कई बार कह चुके हैं कि अपनी मातृभाषा में मिली शुरुआती शिक्षा ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को मजबूत बनाया.

ये भी पढ़ें : जंतर मंतर से सोनम वांगचुक को हटाया गया, अस्पताल ले गई पुलिस, CJP ने लगाया लाठीचार्ज का आरोप प्रकृति से जुड़ाव की सीख भी मां से मिली स्कूल न होने की वजह से सोनम वांगचुक अपना अधिकतर समय अपनी मां के साथ बिताते थे. वे खेती-बाड़ी और घर के दूसरे कामों में उनका हाथ बंटाते थे, जिससे बचपन से ही उनका प्रकृति और स्थानीय जीवनशैली से गहरा जुड़ाव बना.

यही अनुभव आगे चलकर उनके पर्यावरण और टिकाऊ विकास से जुड़े कामों की प्रेरणा भी बने. छेरिंग वांगमो का अब निधन हो चुका है, लेकिन सोनम वांगचुक आज भी कई मौकों पर अपनी मां को अपनी पहली शिक्षिका और सबसे बड़ी प्रेरणा बताते हैं. सोनम वांगचुक के बच्चों या अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है.

इसका कारण यह कि उन्होंने अपने निजी जीवन के बारे में अधिक जानकारियां साझा नहीं की है..

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