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बंगाल में UCC को शमिक ने बताया जरूरी, तलाक और उत्तराधिकार मामले में आयेगी एकरूपता

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Prabhat Khabar 28 जून 2026, 11:08 am
बंगाल में UCC को शमिक ने बताया जरूरी, तलाक और उत्तराधिकार मामले में आयेगी एकरूपता

कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट Uniform Civil Code : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करना अत्यंत जरूरी है. उनका कहना है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार व दत्तक ग्रहण जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना चाहिए, जिससे संवैधानिक समानता और न्याय को मजबूती मिले.

एसटी समुदाय के अधिकार रहेंगे सुरक्षित सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यूसीसी के मसौदे का हवाला देते हुए शमिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जायेगा. उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा संरक्षित उनके रीति-रिवाज, परंपराएं व विशेष अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे और उन पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा.

‘कोई छिपा एजेंडा नहीं’ शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है, ताकि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियां सुनिश्चित की जा सकें. उन्होंने कहा कि यह कानून बहुविवाह से जुड़ी असमानताओं को दूर करने में भी सहायक हो सकता है, लेकिन इसका बच्चों की संख्या सीमित करने से कोई संबंध नहीं है.

उन्होंने लोगों से यूसीसी को लेकर फैलाये जा रहे भ्रम से बचने की अपील की. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 40 अनुसूचित जनजातियां होंगी छूट के दायरे में उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत राज्य में अधिसूचित 40 अनुसूचित जनजाति समुदाय हैं.

इनमें संताल सबसे बड़ा समुदाय है, जबकि टोटो, बिरहोर और लोढ़ा को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. उन्होंने कहा कि एसटी समुदाय को दी जा रही यह छूट उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू यूसीसी के प्रावधानों के अनुरूप है.

Also Read: कोलकाता में पुनर्जीवित होगी ट्राम सर्विस, ऑस्ट्रेलिया से आयेंगे नये आधुनिक डिब्बे क्या है समान नागरिक संहिता समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भारत के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तावित कानूनों का एक सेट है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो, व्यक्तिगत मामलों जैसे विवाह, तलाक, विरासत और बच्चा गोद लेने को नियंत्रित करने के लिए.

यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य विभिन्न धार्मिक प्रथाओं के आधार पर व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं और संघर्षों को दूर करके लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है..

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