सोनम वांगचुक मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी अस्पताल में ट्रांसफर की मांग ठुकराई
दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल में ट्रांसफर करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे आंगमो ने सफदरजंग अस्पताल पर अविश्वास जताते हुए वांगचुक का निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति मांगी थी.
गीतांजलि आंगमो का आरोप- सेहत नहीं, आंदोलन रोकना था मकसद सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने केंद्र पर आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाने का कारण उनकी बिगड़ती सेहत नहीं, बल्कि उनका आंदोलन रोकना था, उन्होंने कहा कि अस्पताल ले जाने से पहले वांगचुक के सभी स्वास्थ्य मानक सामान्य थे और पोटैशियम स्तर भी 4.3 था.
उनका आरोप है कि पुलिस ने बिना परिवार को भरोसे में लिए सादे कपड़ों में आकर उन्हें जबरन स्ट्रेचर पर ले गये. पत्नी गीतांजलि ने दायर की थी याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो ने उन्हें प्राइवेट अस्पताल में भर्ती की मांग की थी.
इसके लिए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट में याचिका दायर करने से पहले गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा था कि अब उन्हें सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं रहा, उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में भर्ती कराना चाहती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध के बावजूद अस्पताल प्रशासन केवल सीमित जानकारी दे रहा है और उन्हें दूसरे अस्पताल में ट्रांसफर करने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है.
पोटेशियम जांच रिपोर्ट पर विवाद याचिका में गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल की जांच रिपोर्ट और प्राइवेट लैब से कराई गई जांच के परिणामों में अंतर होने का दावा किया था. आरोप है कि अस्पताल ने करीब साढ़े 10 घंटे की देरी के बाद रक्त का नमूना उपलब्ध कराया. स्वतंत्र जांच में वांगचुक का पोटेशियम स्तर 3.6 मिलीग्राम पाया गया, जबकि अस्पताल की रिपोर्ट में यह 2.9 मिलीग्राम बताया गया था.
गीतांजलि का दावा किया था कि यदि केवल अस्पताल की रिपोर्ट पर भरोसा किया जाता, तो वांगचुक को अनावश्यक रूप से IV (इंट्रावेनस) उपचार दिया जाता, जबकि स्वतंत्र जांच में उनका पोटेशियम स्तर सामान्य पाया गया. उन्होंने इस अंतर को गंभीर बताते हुए अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे.
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा- जबरन अस्पताल में रखने का कोई आधार नहीं सोनम वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दिल्ली हाईकोर्ट में दलील दी थी कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में उनकी इच्छा के विरुद्ध भर्ती रखने का कोई कानूनी या चिकित्सीय आधार नहीं है.
उन्होंने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिससे यह साबित हो कि वांगचुक को अस्पताल में जबरन रखना जरूरी है. सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद के डॉक्टर और अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है. यदि सरकारी डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य निगरानी जारी रखना चाहते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें निजी अस्पताल में इलाज कराने से क्यों रोका जा रहा है.
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को इससे क्या आपत्ति है. कोर्ट का सवाल, सिब्बल का जवाब सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि क्या उन्हें सरकारी डॉक्टरों पर भरोसा नहीं है. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें सरकारी डॉक्टरों पर कोई संदेह नहीं है. उनकी केवल यही मांग है कि सोनम वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी जाए.
सरकार का पक्ष- वांगचुक की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने कहा कि सोनम वांगचुक की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है. उन्होंने कहा कि यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इसलिए प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद कभी सहयोग मिला है तो कभी असहयोग की स्थिति बनी है. सरकार चाहती है कि वांगचुक वहीं रहें, जहां उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके. अस्पताल में पुलिस की मौजूदगी पर विवाद कपिल सिब्बल ने कोर्ट में यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक के अस्पताल के कमरे में पुलिसकर्मी मौजूद हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वांगचुक का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था, तब पुलिसकर्मी कमरे के अंदर क्या कर रहे थे. इस पर ASG चेतन शर्मा ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि अस्पताल के कमरे के अंदर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं है. अदालत एक्टिविज्म का मंच नहीं: ASG सुनवाई के दौरान ASG चेतन शर्मा ने कहा कि अदालत किसी तरह के एक्टिविज्म का मंच नहीं है और कानूनी प्रक्रिया को उसी दायरे में रखा जाना चाहिए.
उन्होंने डॉ. गीतांजलि से सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता वांगचुक को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है. 21 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक सोनम वांगचुक को शनिवार को उनकी भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी.
वांगचुक ने 28 जून को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित अनियमितताओं के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी..