Road Safety: सड़क हादसे पर लगाम लगाने के लिए रोड एंबुलेंस के निर्माण में होगा बदलाव
Road Safety: देश में हर साल सड़क हादसे में लाखों लोगों को जान गंवानी पड़ती है. सड़क सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड(एआईएस)-125 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है. संशोधित प्रस्ताव का मकसद रोड एंबुलेंस की सुरक्षा और मेडिकल क्षमता को सशक्त बनाना है.
रोड एंबुलेंस आपातकालीन सुविधा का महत्वपूर्ण अंग है और यह लोगों का जीवन बचाने के काम में आता है. मंत्रालय का मानना है कि अगर सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर मेडिकल सुविधा मिल जाए तो कई लोगों की जान बचायी जा सकती है. कई अध्ययनों से यह बात सामने आयी है कि सड़क हादसे में 50 फीसदी तक मौत को कम किया जा सकता है, यदि पीड़ित को हादसे के एक घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचा दिया जाए.
हालांकि सड़क हादसे में घायल लोगों को अस्पताल और जरूरी चिकित्सा सेवा मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री-रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट(पीएम-राहत) जैसी योजना चल रही है. इस योजना के तहत सड़क हादसे में घायल लोगों के लिए तत्काल रोड एंबुलेंस महैया कराना है ताकि घायल को समय पर चिकित्सा मिल सके.
तय मानक के आधार पर होगा ‘रोड एंबुलेंस’ का निर्माण मंत्रालय ने रोड एंबुलेंस के निर्माण और संचालन जरूरत को बेहतर बनाने के लिए अधिसूचना सितंबर 2016 में जारी की थी. इसके तहत ‘रोड एंबुलेंस’ के लिए तय मानक के आधार पर निर्माण करना है.
इसके तहत विभिन्न श्रेणी के हादसों से निपटने के लिए रोड एंबुलेंस में तय मेडिकल उपकरण लगाना जरूरी होगा ताकि वे सही तरीके से मरीज को अस्पताल ले जा सके. अब मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है ताकि रोड एंबुलेंस की क्षमता और सुरक्षा बेहतर हो सके.
इसके तहत बीमार और समय से पहले जन्मे बच्चे को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस का निर्माण अलग तरीके से होगा क्योंकि इसके लिए उच्च-स्तर की मेडिकल सुविधा का होना जरूरी है. सड़क हादसे में घायलों के लिए कई स्ट्रेचर वाले रोड एंबुलेंस बनेगें ताकि घायल को एक समय में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके.
सभी रोड एंबुलेंस में बचाव उपकरण का होना अनिवार्य कर दिया है. रोड एंबुलेंस को बी, सी और डी में वर्गीकृत किया जाएगा और सभी में आपातकाल और बचाव उपकरण को होना जरूरी है. ताकि सड़क हादसे में घायल लोगों को गाड़ी से निकालने और राहत काम में सहयोग मिल सके. विभिन्न हितधारकों से सलाह-मशविरा के बाद मंत्रालय संशोधित प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देगा और फिर इसे लागू कर दिया जाएगा..