Logo
ब्रेकिंग न्यूज़
जिले में अब तक औसत 231.1 मि.मी. वर्षा दर्जकलेक्टर ने जावी में पूजा घाणी एवं लघु उद्योग का किया निरीक्षणकलेक्टर श्री चंद्रा ने मालखेड़ा और जावी में जैविक खेती का किया निरीक्षणकलेक्टर ने मालखेड़ा एवं जावी के प्राथमिक विद्यालयों का किया निरीक्षणपशुपालकों से संवाद कर कलेक्टर ने परखी डेयरी योजनाओं की प्रगतिकलेक्टर ने जावी की आंगनवाड़ी में बच्चों के बीच बैठकर परखीदिल्ली में भारी बारिश के बीच गिरी बिल्डिंग, मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका, राहत-बचाव जारीमंत्रि-परिषद ने प्रदेश में अधोसंरचनात्मक विकास और पुनर्वास कार्यों के लिये दी 2,300 करोड़ रूपये की स्वीकृति | मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को 2031 तक निरंतर रखे जाने के लिए 495 करोड़ रूपये मंजूरी नमो हरित नगर योजना के लिये 100 करोड़ रूपये की स्वीकृति मध्यप्रदनीमच की बेटी, चित्तौड़गढ़ की बहू बनी महिला सशक्तिकरण की मिसाल, राजस्थान पुलिस ने किया सम्मानित 'महिला सुरक्षा संकल्प' अभियान में उत्कृष्ट योगदान पर एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने प्रशंसा-पत्र देकर किया सम्मानRain Warning: 8 से 14 जुलाई तक कई राज्यों में मूसलाधार बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनीतीस वर्षों से लंबित सरदार सरोवर परियोजना का सर्वसम्मति से समाधान होना बड़ी उपलब्धि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव | मध्यप्रदेश को अब डेढ़ हजार करोड़ रूपए के स्थान पर केवल 217 करोड़ रूपए ही देना होंगे मध्यप्रदेश बना वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला पहला राज्य ज्ञान भासंजय राउत ने कहा- राम मंदिर किसी की जागीर नहीं, मंदिर ट्रस्ट पर उठाए गंभीर सवालमुख्यमंत्री डॉ. यादव का पदोन्नत अधिकारी-कर्मचारियों ने माना आभार | मंत्रालय में ढोल-नगाड़े के साथ किया स्वागत-अभिनंदनमुंबई में भारी बारिश का कहर: गृह मंत्री अमित शाह की फडणवीस से बात, जताया मदद का भरोसाशोपियां मुठभेड़: 5 दिनों की घेराबंदी के बाद लश्कर का आतंकी ढेर, सुरक्षा बलों ने दिया कड़ा संदेश

विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु | जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता की मार्गदर्शक सेवा और अध्यात्म के संगम से ही समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बैतूल में

MPINFO
MP Info 18 जून 2026, 04:15 pm
विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु | जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता की मार्गदर्शक सेवा और अध्यात्म के संगम से ही समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बैतूल में

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति में आत्म विश्वास, आत्म सम्मान, जागरूकता और दायित्व बोध का विकास हो। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज आत्म सम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति का अनुभव कराती है तथा सकारात्मक सोच को जीवन के उच्च आदर्शों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन को संबोधित कर रही थी।

विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। शाश्वत विकास वही है जो हमारी जड़ों को मजबूत बनाते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करे। राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब देश का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगी। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत सुरक्षित और अक्षुण्ण रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय समाज के आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक जागरूकता और समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मध्यप्रदेश शासन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनजातीय कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में इस बीमारी की संभावना अधिक पायी जाती है और इसके उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से जनजातीय समाज का स्वास्थ्य स्तर और बेहतर होगा। राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मू ने कहा कि मध्यप्रदेश का बैतूल जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है।

यहां के जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। सामूहिकता, सहयोग, सरलता, ईमानदारी और आध्यात्मिकता जैसे उच्च जीवन मूल्यों का जीवंत स्वरूप बैतूल की जनजातीय संस्कृति में दिखाई देता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लक्ष्य पर केंद्रित इस महासम्मेलन में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।

उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ब्रह्मकुमारी संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल बैतूल या मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि महासम्मेलन में तैयार होने वाली कार्य योजनाएं जनजातीय समाज को राष्ट्र की प्रगति का सशक्त भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान ने मातृशक्ति को केंद्र में रखकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। संस्थान की आंतरिक शुचिता, मानवीय गरिमा, सेवा भावना तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में आंतरिक शुचिता और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।

इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज में समतापरक आचरण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित होती है। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है।

राष्ट्रपति श्री मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय की जीवन शैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों और प्रकृति के निकट रही है। जनजातीय समाज, जिसे आदिवासी समाज भी कहा जाता है, सृष्टि के आरंभ से ही धरती के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता आया है। यह समाज सुख, शांति, आनंद और प्रेम के साथ जीवन बिताना जानता है तथा हिंसा से दूर रहता है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति ही नहीं, बल्कि पंचतत्वों—धरती, आकाश, वायु, जल, सूर्य और चंद्रमा—को पूजनीय मानता है। इनके लिए किसी विशेष मंदिर या पूजा स्थल की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पूरी प्रकृति ही उनके लिए आराधना का केंद्र है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि धरती, जल और वायु के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।

जनजातीय समाज प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसका संरक्षण करता है। वे धरती को क्षति नहीं पहुंचाते, जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करते और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज किसी भी संसाधन के उपयोग से पहले प्रकृति को नमन करता है, यही कारण है कि उनकी जीवनशैली पर्यावरण संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करती है।

आज जब पेड़-पौधों, नदियों और समुद्रों के संरक्षण की आवश्यकता पूरी दुनिया महसूस कर रही है, तब जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु द्वारा कलश एवं ध्वज को ब्रह्मकुमारी बहनों को प्रदान कर अध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन का शुभारंभ किया।

महासम्मेलन में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु और राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल सहित अन्य अतिथियों का राजयोगिनी मंजू दीदी द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने महासम्मेलन परिसर में बैतूल जिले की सांस्कृतिक झलक और विकास योजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

उन्होंने जनजातीय समाज द्वारा प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और विदेशी कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग भूमि की उर्वरता को नष्ट कर रहा है तथा इसके कारण अनेक प्रकार की बीमारियां भी बढ़ रही हैं।

प्राकृतिक खेती भारत की मूल परंपरा रही है और आज देश पुनः उसी दिशा में लौट रहा है। प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह मन, शरीर और आध्यात्मिक चेतना को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान लंबे समय से जनजातीय समाज के साथ मिलकर प्राकृतिक जीवन शैली और प्रकृति संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहा है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि तेजी से बदलते वर्तमान दौर में जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ना आवश्यक है, जिससे वे आधुनिक संसाधनों का लाभ उठा सकें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत सुरक्षित बनी रहे।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान पिछले कई दशकों से बैतूल और आसपास के क्षेत्रों में आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों के प्रसार, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से संस्थान ने हजारों लोगों के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार किया है।

जनजातीय समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने में संस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जब सेवा और अध्यात्म का संगम होता है, तब समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। यह महासम्मेलन उसी संगम का सशक्त उदाहरण है और समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने सभी नागरिकों से वर्ष @2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए अधिक प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिक चेतना और मानव कल्याण ही समावेशी एवं विकसित भारत की आधारशिला बनेंगे।

आध्यात्मिक जागृति जनजातीय समाज के सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम : राज्यपाल श्री पटेल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक मूल्यों के माध्यम से समाज को उन्नत, संस्कारित एवं सम्मानपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन के लिए प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए संस्था के सभी भाई-बहनों को शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि उनका प्रजापिता ब्रह्मकुमारी संस्था से वर्ष 1995 से आत्मीय जुड़ाव रहा है। नवसारी में उनके निवास के सामने स्थित ब्रह्मकुमारी केंद्र से लेकर माउंट आबू, गांधीनगर सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में उन्हें सहभागी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा आध्यात्मिक जागरण के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य सराहनीय एवं अनुकरणीय है। राज्यपाल श्री पटेल ने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर कहा कि प्रतिदिन कुछ समय ध्यान एवं मेडिटेशन के लिए निकालने से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है।

ऐसे आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सद्भाव का संचार करते हैं तथा समाज को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष और कर्तव्य निष्ठा का अनुपम उदाहरण: केंद्रीय मंत्री श्री उइके केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उईके ने कहा कि ओडिशा के एक छोटे से जनजातीय गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाली राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, संविधान की महानता और सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल हैं।

केंद्रीय मंत्री श्री उइके ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष, समर्पण, सेवा और कर्तव्य निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपनी कर्मठता, धैर्य और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के बल पर न केवल सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित किया है, अपितु देश की प्रत्येक बेटी, जनजातीय समाज और आम नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के बैतूल आगमन से जिले का प्रत्येक जनजातीय परिवार स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनका नेतृत्व सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति सभी को प्रेरित करता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के आगमन पर अनहद संगीत महाविद्यालय बैतूल की 7 सदस्यीय कलाकारों द्वारा आकर्षक और मनमोहक स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी गई।

इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, ब्रह्मकुमारी संस्थान से राजयोगिनी शैलजा दीदी, राजयोगिनी मंजू दीदी, राजयोगी डॉ बी के नथमल जी उपस्थित हैं।

Source:MP Info
Ad

ताज़ा खबरें