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सांसारिक भौतिक भोग विलास को त्यागे बिना आत्मा को सच्चा सुख नहीं मिलता है-सुप्रभ सागर जी महाराज

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Admin Malwa First 02 अगस्त 2024, 12:09 pm
सांसारिक भौतिक भोग विलास को त्यागे बिना आत्मा को सच्चा सुख नहीं मिलता है-सुप्रभ सागर जी महाराज

सांसारिक भौतिक भोग विलास को त्यागे बिना आत्मा को सच्चा सुख नहीं मिलता है-सुप्रभ सागर जी महाराज

दिगम्बर जैन समाज में चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला प्रवाहित

नीमच। सांसारिक भौतिक भोग विलास को त्यागे बिना आत्मा को सच्चा सुख नहीं मिलता है-सुप्रभ सागर जी महाराज   जीवन में सच्चा सुख चाहिए तो त्याग को अपनाना चाहिए। संयम जीवन के बिना सच्चा सुख नहीं मिलता है।सांसारिक भौतिक भोग विलास के त्याग बिना आत्मा को सच्चा सुख नहीं मिलता है।यह बात सुप्रभ सागर जी महाराज साहब ने कही।वे पार्श्वनाथ दिगंबर जैन समाज नीमच द्वारा दिगम्बर जैन मंदिर‌ में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे ।उन्होंने कहा कि त्याग के बिना
मानव को आत्मा का सच्चा सुख नहीं मिल सकता है।

व्यापार में हमारा मन लगा होता है इसलिए कष्ट आने पर भी हम कष्ट सहन करते हैं लेकिन व्यापार को नहीं छोड़ते हैं। ठीक इसी प्रकार परमात्मा की भक्ति में भी हम मन लगा कर भक्ति करें तो उस समय भी हमें कष्ट आएं तो हमें सहन करना चाहिए । तभी हमें सच्चा सुख मिल सकता है। मुनि वैराग्य सागर जी मसा ने कहा कि परिवार में यदि पवित्रता के साथ सद्भाव के साथ रहे तो परिवार मेंआत्म शांति मिल सकती है।

बुजुर्ग माता-पिता का आदर पूर्वक समय-समय पर देखभाल करते हुए सेवा करते रहें उन्हें परिवार में सम्मान पूर्वक रखना चाहिए। बुजुर्गों के आशीर्वाद से घर में सुख शांति रहती है तनाव नहीं होता है। घर की लड़ाई को बाहर कभी नहीं बताना चाहिए। गलती हो तो क्षमा याचना कर विवाद को समाप्त कर देना चाहिए तभी परिवार में सुख समृद्धि वह शांति रह सकती है। कोई दुःख आ जाए तो जिस प्रकार अंधेरे के बाद उजाला आता है उसी प्रकार दुःख के बाद सुख भी आता है इसलिए शांति पूर्वक परिवार के साथ शांतिपूर्वक रहना चाहिए।

परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती 108 शांति सागर जी महामुनि राज के पदारोहण के शताब्दी वर्ष मे परम पूज्य मुनि 108 श्री वैराग्य सागर जी महाराज एवं परम पूज्य मुनि 108 श्री सुप्रभ सागर जी महाराज जी का पावन सानिध्य मिला। उक्त जानकारी दिगम्बर जैन समाज एवं चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विजय विनायका जैन ब्रोकर्स, मिडिया प्रभारी अमन विनायका ने दी।
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