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उदय होते सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ चार दिवसीय छठ पर्व का समापन

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Admin Malwa First 28 अक्तूबर 2025, 03:46 pm
उदय होते सूर्य को अर्घ्य  देकर  हुआ चार दिवसीय  छठ पर्व का समापन

लोक आस्था और सूर्य उपासना का चार दिवसीय पर्व छठ महापर्व मंगलवार 28 अक्टूबर को रामपुरा में भक्तिभाव और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। गांधी सागर जलाशय रिगवाल पर में बड़ी संख्या में खीमला पावर प्रोजेक्ट के तहत प्रवासी यूपी बिहार से आये श्रद्धालु महिलाएं और परिवारजन एकत्र हुए।संध्या समय जब सूर्य देव अस्ताचल की ओर अग्रसर थे, तब व्रती महिलाओं ने जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु तथा कल्याण की मंगलकामनाएं कीं। पारंपरिक साज-सज्जा में सुसज्जित महिलाएं कलश, नारियल, फल, ठेकुआ और पूजा सामग्री से सजी डलिया लेकर छठ घाट पर पहुंचीं, जहां वातावरण “जय छठी मइया” के जयघोष से गूंज उठा।यह पर्व नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य—इन चार पवित्र चरणों में संपन्न होता है।25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुभारंभ हुआ, जब श्रद्धालु महिलाओं ने स्नान कर शुद्धता और सात्विकता के साथ भोजन किया। 26 अक्टूबर को खरना के अवसर पर निर्जला उपवास रखकर संध्या समय गुड़-चावल की खीर का प्रसाद ग्रहण किया गया। 27 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य का आयोजन हुआ, जो पर्व का सबसे महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है। इस अवसर पर प्रयागराज निवासी पूजा त्रिपाठी ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी अप एवं बिहार झारखंड की बहनों ने रामपुरा नगर में भव्य छठ महापर्व का आयोजन किया गया है।उन्होंने बताया कि मंगलवार, 28 अक्टूबर की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के बाद महिलाएं व्रत का पारायण और प्रसाद वितरण के साथ इस महान लोक आस्था के पर्व का समापन हुआ इस अवसर पर प्रवासी बहनों ने बताया कि छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक एकता, श्रद्धा और उत्तर भारतीय लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की यह प्राचीन परंपरा मनुष्य और प्रकृति के बीच अटूट संबंध और जीवनदायिनी ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता का अनुपम संदेश देती है।

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