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पवित्र भाव बिना सकारात्मक आभामंडल नहीं बनता- आचार्य प्रसन्नचंद्र सागरजी , चातुर्मासिक मंगल धर्म सभा प्रवाहित

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Admin Malwa First 24 नवंबर 2023, 11:03 am
पवित्र भाव बिना सकारात्मक आभामंडल नहीं बनता- आचार्य प्रसन्नचंद्र सागरजी , चातुर्मासिक मंगल धर्म सभा प्रवाहित

पवित्र भाव बिना सकारात्मक आभामंडल नहीं बनता-आचार्य प्रसन्नचंद्र सागरजी , चातुर्मासिक मंगल धर्म सभा प्रवाहित

नीमच। पवित्र भाव हो तभी दीक्षा संयम जीवन का पुण्य फलता है। चरित्र में दोष नहीं होना चाहिए। जीवन में अच्छे विचार का बहुत महत्व है। केवल धर्म स्थान में ही अच्छे विचार नहीं होना चाहिए, अपितु हर जगह रहना चाहिए। मैत्री भाव से सर्व प्राणी के सुख और शांति का भाव रखना अच्छे विचार का प्रतीक है। इससे आभामंडल सकारात्मक रहता है। अच्छे वचन और भाषा का उपयोग भी सकारात्मकता लाता है। इससे संबंधों में सशक्तता आती है और वे दीर्घजीवी बनते हैं।

यह बात श्री जैन श्वेतांबर भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट श्री संघ नीमच के तत्वावधान में बंधू बेलडी पूज्य आचार्य श्री जिनचंद्र सागरजी मसा के शिष्य रत्न नूतन आचार्य श्री प्रसन्नचंद्र सागरजी मसा ने कही। वे चातुर्मास के उपलक्ष्य में मिडिल स्कूल मैदान के समीप पुस्तक स्थित जैन आराधना भवनघ् में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सौम्य यानी अच्छे व्यवहार से जीवन में रस पैदा होता है, जो जीवन को सरल बनाता है। व्यक्ति का सौम्य व्यवहार ही परिवार में स्नेह पैदा करता है सोम्य व्यवहार ही समस्याओं का असली समाधान है। जीवन में अच्छा पुण्य होता है तभी प्रवचन का सौभाग्य मिलता है, चरित्र बिना मोक्ष नहीं होता है। विवाह की पूरी लग्नविधि वैराग्य का कारण है।

प्राचीन काल में महिलाओं को स्वयंवर चयन का अधिकार रहता था। कर्म का फल सभी को भोगना पड़ता है, चाहे वह तीर्थंकर या महान साधु संत क्यों ना हो। संसार में व्यक्ति चाहे कितना ही बड़ा शूरवीर क्यों ना हो स्त्री के सामने सभी आदर भाव से सम्मान देते हैं और झुकते हैं और उनके विचारों का सम्मान करते हैं उनकी मर्यादा की रक्षा करते हैं। इसीलिए विवाहिता पत्नी की सहमति के बिना विवाहित पति की संयम दीक्षा स्वीकार नहीं की जाती है।

श्री संघ अध्यक्ष अनिल नागौरी ने बताया कि धर्मसभा में तपस्वी मुनिराज श्री पावनचंद्र सागरजी मसा एवं पूज्य साध्वीजी श्री चंद्रकला श्रीजी मसा की शिष्या श्री भद्रपूर्णा श्रीजी मसा आदि ठाणा 4 का भी चातुर्मासिक सानिध्य मिला। समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लिया। उपवास, एकासना, बियासना, आयम्बिल, तेला, आदि तपस्या के ठाठ लग रहे है। धर्मसभा में जावद , जीरन, मनासा, नयागांव, जमुनिया, जावी, आदि क्षेत्रों से श्रद्धालु भक्त सहभागी बने। धर्मसभा का संचालन सचिव मनीष कोठारी ने किया।

 

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