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कटे होंठ की सर्जरी: नीमच में 3 बच्चों को मिला नया जीवन | कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की संवेदनशील पहल Relief and happiness

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Admin Malwa First 24 जनवरी 2026, 09:28 am
कटे होंठ की सर्जरी: नीमच में 3 बच्चों को मिला नया जीवन | कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की संवेदनशील पहल Relief and happiness

कटे होंठ की सर्जरी: नीमच में 3 बच्चों को मिला नया जीवन | कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की संवेदनशील पहल

कटे होंठ की सर्जरी के तहत नीमच जिले में 3 बच्चों की नि:शुल्क सफल सर्जरी हुई। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की पहल से मासूमों की मुस्कान लौटी।

कटे होंठ की सर्जरी: नीमच में तीन मासूमों को मिला नया जीवन

नीमच जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय सोच की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है, जहां राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत जन्मजात विकृति से पीड़ित तीन बच्चों की कटे होंठ की सर्जरी नि:शुल्क कराई गई। इस पहल से न केवल बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटी है, बल्कि उनके माता-पिता की आंखों में भी उम्मीद और राहत की चमक दिखाई देने लगी है। इस मानवीय कार्य के पीछे कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा की सक्रिय भूमिका और संवेदनशील सोच को विशेष रूप से सराहा जा रहा है।

सर्वे में सामने आए कटे होंठ से पीड़ित बच्चे

जिला प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कराए गए सर्वे के दौरान जावद विकासखंड के सिंगोली के दूरस्थ क्षेत्रों में तीन ऐसे बच्चे पाए गए, जिनके होंठ जन्म से कटे हुए थे। यह जन्मजात विकृति बच्चों के बोलने, खाने और सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाल रही थी। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के कारण उनके परिवारजन इन बच्चों को इलाज के लिए जिले से बाहर नहीं ले जा पा रहे थे।

जब यह स्थिति प्रशासन के संज्ञान में आई, तो इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत समाधान की दिशा में कदम उठाए गए।

कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई

कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन बच्चों के इलाज की समुचित व्यवस्था जिले में ही की जाए। उनके आदेश पर जिला चिकित्सालय नीमच में एक विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया, जिसमें भोपाल के मान्यताप्राप्त चिकित्सालय के विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया गया।

जिला प्रशासन ने बच्चों और उनके परिवारजनों की सुविधा के लिए आने-जाने हेतु वाहन व्यवस्था भी करवाई, ताकि इलाज में किसी तरह की देरी या परेशानी न हो।

विशेषज्ञों द्वारा जांच और परामर्श

विशेष शिविर के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तीनों बच्चों की गहन जांच की और यह निष्कर्ष निकाला कि इनकी कटे होंठ की सर्जरी जल्द से जल्द कराना आवश्यक है। जांच और परामर्श के बाद बच्चों को आगे के इलाज के लिए भोपाल भेजने का निर्णय लिया गया।

सभी जरूरी दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और औपचारिकताएं जिला प्रशासन द्वारा पूरी की गईं, ताकि परिवारजनों को किसी प्रकार की भागदौड़ न करनी पड़े।

भोपाल में हुई सफल नि:शुल्क सर्जरी

भोपाल के एक मान्यताप्राप्त निजी चिकित्सालय में तीनों बच्चों की कटे होंठ की सर्जरी विशेषज्ञों द्वारा सफलतापूर्वक की गई। यह पूरी सर्जरी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत पूरी तरह नि:शुल्क कराई गई, जिसका खर्च शासन द्वारा वहन किया गया।

सर्जरी के बाद बच्चों की स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई गई है और डॉक्टरों के अनुसार अब वे धीरे-धीरे सामान्य बच्चों की तरह बोलने, खाने और मुस्कुराने में सक्षम हो जाएंगे।

कटे होंठ की सर्जरी

जिन बच्चों को मिला नया जीवन

इस मानवीय पहल के तहत जिन तीन बच्चों की कटे होंठ की सर्जरी कराई गई, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • ग्राम भोजपुरा, जावद के तीन वर्षीय बालक रमेश, पिता ओमप्रकाश गुर्जर

  • ग्राम दौलतपुरा, जावद की दो वर्षीय बालिका हर्शिता, पिता चुन्नीलाल सालवी

  • ग्राम बाणदा, जावद के दो वर्षीय बालक रामलाल, पिता उदयलाल भील

इन तीनों बच्चों के चेहरे पर अब एक नई मुस्कान दिखाई दे रही है और वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

सर्जरी के बाद लौटी मासूमों की मुस्कान

सर्जरी के बाद जब बच्चे अपने गांव लौटे, तो उनका स्वागत बेहद भावुक माहौल में किया गया। जो बच्चे पहले बोलने और मुस्कुराने में झिझकते थे, अब वे बेझिझक हंसते और खेलते नजर आ रहे हैं।

उनके माता-पिता की आंखों में आंसू थे, लेकिन ये आंसू दुख के नहीं बल्कि खुशी और राहत के थे। परिजनों ने कहा कि प्रशासन की मदद के बिना वे अपने बच्चों का इलाज कभी नहीं करवा पाते।

परिजनों ने जताया प्रशासन का आभार

तीनों बच्चों के परिजनों ने जिला प्रशासन और विशेष रूप से कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा का दिल से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह पहल उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।

परिजनों के अनुसार, अब उनके बच्चे भी सामान्य बच्चों की तरह स्कूल जा सकेंगे, दोस्तों के साथ खेल सकेंगे और बिना झिझक समाज में घुल-मिल सकेंगे।

आरबीएसके टीम की अहम भूमिका

बच्चों के इलाज में महिला बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आरबीएसके टीम द्वारा समय पर सर्वे, पहचान और रिपोर्टिंग के चलते ही इन बच्चों तक यह सुविधा पहुंच सकी। टीम लगातार गांव-गांव जाकर बच्चों की जांच कर रही है और जन्मजात विकृतियों से पीड़ित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध करा रही है।

नीमच में अब तक 546 बच्चों का उपचार

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत नीमच जिले में अब तक कुल 546 जन्मजात विकृति वाले बच्चों का नि:शुल्क उपचार और सर्जरी कराई जा चुकी है। इनमें हृदय रोग, दृष्टि दोष, श्रवण दोष और कटे होंठ की सर्जरी जैसे कई मामले शामिल हैं।

यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि यह योजना जिले में बेहद प्रभावी ढंग से लागू की जा रही है।

समाज के लिए प्रेरणादायक पहल

कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा की यह संवेदनशील पहल न केवल एक प्रशासनिक निर्णय है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भी एक मजबूत मिसाल है।

उनकी इस सोच से न जाने कितने बच्चों को नई जिंदगी मिल रही है और उनका भविष्य संवर रहा है। यह पहल यह भी दर्शाती है कि जब प्रशासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तो असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं।

भविष्य की उम्मीदें

नीमच जिले में जिस तरह से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों की पहचान और इलाज का कार्य तेज़ी से हो रहा है, उससे आने वाले समय में और भी अधिक बच्चों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के शारीरिक विकास में मदद कर रहा है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और सामाजिक जीवन को भी एक नई दिशा दे रहा है।

कटे होंठ की सर्जरी के माध्यम से नीमच जिले में तीन बच्चों को नया जीवन मिलना प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय करुणा का उत्कृष्ट उदाहरण है। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा की पहल से न केवल मासूमों की मुस्कान लौटी है, बल्कि उनके परिवारों को भी एक नई उम्मीद मिली है।

अब तक 546 बच्चों का उपचार कर जिले ने प्रदेश स्तर पर एक मिसाल कायम की है। यह पहल साबित करती है कि सही नीयत और समर्पण से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इन मासूम चेहरों पर लौटी मुस्कान ही इस पूरे प्रयास की सबसे बड़ी सफलता है

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