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स्वदेशी राखियों से रक्षाबंधन का उत्सव, ‘किलकारी’ के बच्चों ने पेश की आत्मनिर्भर भारत की प्रेरणा

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Admin Malwa First 06 अगस्त 2025, 06:56 am
स्वदेशी राखियों से रक्षाबंधन का उत्सव, ‘किलकारी’ के बच्चों ने पेश की आत्मनिर्भर भारत की प्रेरणा

स्वदेशी राखियों से रक्षाबंधन का उत्सव, ‘किलकारी’ के बच्चों ने पेश की आत्मनिर्भर भारत की प्रेरणा

नीमच। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वदेशी अपनाओ – आत्मनिर्भर बनाओ” संकल्प को साकार करते हुए नीमच के रेडक्रॉस आश्रयगृह “किलकारी” में रह रहे बच्चों ने रक्षाबंधन के अवसर पर पूरी तरह स्वदेशी सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कीं। स्थानीय पीजी कॉलेज की दो छात्राओं के द्वारा सिर्फ एक बार सिखाने के बाद इन बच्चों ने रात रात भर जाग कर अपने हाथों से बनी इन राखियों की कीमत 15 से 35 रुपए रखी गई। आज 5 अगस्त को कलेक्ट्रेट परिसर में दोपहर 3:30 से 5:00 बजे तक राखियों का स्टॉल लगाया गया, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों ने इन्हें खरीदकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

बच्चों की मेहनत, सृजनशीलता और आत्मनिर्भरता का यह जीवंत उदाहरण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। इन सुंदर राखियों की सराहना हर किसी ने की। खास बात यह रही कि बच्चों ने कलेक्टर हिमांशु चंद्रा को भी विशेष रूप से तैयार की गई राखी भेंट की।
प्रधानमंत्री के “वोकल फॉर लोकल” अभियान को बच्चों ने अपने हुनर से साकार कर दिखाया। इस पहल ने रक्षाबंधन जैसे पर्व को आत्मनिर्भर भारत के संदेश से जोड़ते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि स्वदेशी अपनाकर ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है।

नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने बताया कि रेड क्रॉस एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा किलकारी आश्रय गृह के बच्चों जिनकी उम्र 6 से 18 वर्ष है उनको विभाग द्वारा राखी बनाने का प्रशिक्षण दिलवाया गया है, इस प्रशिक्षण में बच्चों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया है और उन्होंने बेहतर राखियां बनाई है, आज जिसका शुभारंभ कलेक्टर कार्यालय में किया गया है, यहाँ एक राखी शॉप भी लगाई गई है। जिसमे कलेक्टर कार्यालय के जो भी अधिकारी हैं वह रक्षाबंधन की शॉपिंग यहीं से कर रहे हैं। यह उत्साह की बात है कि किलकारी आश्रय के बच्चों द्वारा उत्साह के साथ बहुत ही सुंदर राखियां निर्मित की गई है वे बधाई के पात्र हैं।

नीमच के पीजी कॉलेज की छात्रा व प्रशिक्षक अंजली पाठोंदिया
ने बताया कि मैं आज यहां कलेक्टर कार्यालय आयी हूं। यहां किलकारी के बच्चों द्वारा बनाई गई राखियों की स्टॉल लगाई गई है। बच्चों ने काफी मेहनत की है। इनको बनाने के लिए हमने उनको एक बार थोड़ा सा प्रशिक्षण दिया था, उन्होंने रात रात भर जागकर उन्होंने ये सुंदर और आकर्षक राखियां बनाई है। बहुत ही प्रतिभाशाली हूनर है जो उनका जो अभी आप सभी के सामने आया है।

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