Logo
ब्रेकिंग न्यूज़
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लिखा नये भारत के निर्माण का स्वर्णिम अध्यायजल गंगा संवर्धन अभियान- जिले में सभी अमृत सरोवरों के कार्य पूर्णकांग्रेस को बड़ा झटका: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, भाजपा में जश्न का माहौलमीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस बोली- 'सीट चोरी', EC दफ्तर के बाहर हंगामा, लोकतंत्र की हत्या का आरोपयोग केगिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए ऑनलाइन योग सत्र में जुड़ेंजीर्ण-शीर्ण भवनों के खिलाफ न.पा. की कार्यवाही-उर्वरक की सोसायटी में उपलब्‍धता एवं वितरण सुनिश्चित करें- श्री चंद्राशहजाद भट्टी के आतंकी नेटवर्क पर NIA का एक्शन, हरियाणा-पंजाब में 18 ठिकानों पर रेडकपास पर मंडी फीस की दर 1% से घटाकर 0.5% करने का अनुमोदन | विकास, तकनीकी नवाचार और किसान कल्याण के लिए 13 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 13,565.84 करोड़ रूपये की स्वीकृति आई.टी. सजनसुनवाई में मिली दिव्यांग पूनमचंद को रेडक्रास से 10 हजार की आर्थिक सहायताराज्यसभा चुनाव: बीजेपी के लोग 'नोटों से भरी थैली' लेकर पहुंच रहे हैं विधायकों के पास, कांग्रेस का आरोपमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित कीअफगानिस्तान में नरसंहार, भारत के खिलाफ 'नफरत की फैक्ट्री' चला रहा... भारत ने दुनिया के सामने पाकिस्तान को लताड़ाराज्यसभा चुनाव : डिनर टेबल पर सियासी रणनीति, कांग्रेस को सताने लगा टूट का डर?कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार और रीतब्रत बनर्जी, जिन्होंने लगा दी ममता बनर्जी की ‘लंका’, जानिए 2 बागियों की इनसाइड स्टोरी

ग़म-ए-हुसैन से भीगी रात: नई आबादी, सोयत कला से निकला ताजिया जुलूस — इमामे हुसैन की याद में डूबा नगर

Author
Admin Malwa First 07 जुलाई 2025, 04:22 am
ग़म-ए-हुसैन से भीगी रात: नई आबादी, सोयत कला से निकला ताजिया जुलूस — इमामे हुसैन की याद में डूबा नगर

ग़म-ए-हुसैन से भीगी रात:
नई आबादी, सोयत कला से निकला ताजिया जुलूस — इमामे हुसैन की याद में डूबा नगर
मोहर्रम की 9 तारीख की रात… जब चाँद भी ग़मगीन था और हवाओं में मातम की सरगोशियाँ थीं। नई आबादी, सोयत कला से उठे ताजिया जुलूस ने मानो इतिहास की किसी ज़िंदा तस्वीर को फिर से जी लिया। यह महज़ एक परंपरा नहीं, बल्कि इमामे हुसैन की शहादत को सलाम पेश करने वाली रूहानी यात्रा थी।

 

 

इस जुलूस में शामिल हुजूम कोई साधारण भीड़ नहीं, बल्कि हर चेहरा, हर कदम, हर अश्क इमाम की याद का अक्स था।
“या हुसैन, या सकीना, या अब्बास” की सदाएं हर गली और चौक में गूंज रही थीं। ने अपनी पूरी हुई मन्नतों पर फूल चढ़ाए, बच्चों को तोलकर ताजियों को चढ़ाया गया, मिठाई और फल वितरित किए गए — यह रस्म आस्था से जन्मी और मोहब्बत से निभाई गई। यह जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ सुबह 10 बजे इमामबाड़ा हुआ। पूरे रास्ते में अखाड़ों का प्रदर्शन, ढोल-नगाड़ों की थाप और नारे इमामे हुसैन की याद को जीवंत बनाए रखते रहे। हर जुबां पर सलाम था, हर दिल में सच्ची अकीदत।

नगर के विभिन्न मोहल्लों से उठे ताजिए भी इस मिलन में शामिल होकर फातिहा पढ़ते हुए अपनी-अपन। यह आयोजन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि इमाम की याद में एकता, इंसानियत और मुहब्बत की मिसाल था।

यह जुलूस एक पैग़ाम था —
कि ज़माना बदल सकता है,
हालात बदल सकते हैं,
लेकिन इमामे हुसैन की मोहब्बत और उनका पैग़ाम आज भी दिलों की रगों में उसी तरह बहता है।

> 〝यह जुलूस एक इबादत था,
यह रात एक एहसास थी,
और यह याद…
इमामे हुसैन की अमर कुर्बानी का जीवन्त प्रतीक〞

सिंगोली नगर के सभी धर्म के भाइयों का सहयोग रहा उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं और दुआएं करते हैं ऐसा ही नगर का पूरा सहयोग मिलता रहेके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

पुलिस अधिकारियों एवं प्रशासनिक अमले का विशेष सहयोग रहा। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुस्तैदी से उपस्थित रहकर उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी, जिससे जुलूस शांतिपूर्वक और भावनात्मक माहौल में संपन्न हो सका। सिंगोली से ख्वाजा हुसैन मेवाती

Ad

ताज़ा खबरें