बुक एक्सचेंज मेले से कमीशनखोरी पर लगी लगाम, पालकों के 15 लाख रुपए बचे, सोमवार को भी रहेगा मेला, सार्थक प्रयास की चारों ओर हो रही सराहना
बुक एक्सचेंज मेले से कमीशनखोरी पर लगी लगाम, पालकों के 15 लाख रुपए बचे, सोमवार को भी रहेगा मेला, सार्थक प्रयास की चारों ओर हो रही सराहना
नीमच। शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती महंगी पुस्तकों और कमीशनखोरी की प्रवृत्ति के बीच नीमच में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। पालक संघ जिला नीमच द्वारा आयोजित दो दिवसीय निःशुल्क बुक एक्सचेंज मेले ने न सिर्फ इस समस्या पर लगाम लगाई, बल्कि पालकों के लगभग 15 लाख रुपए की बचत कर एक बड़ा सामाजिक संदेश भी दिया।
शहर के गौ सेवक पार्थ जोशी एवं मितेश अहीर के आतिथ्य में तथा नन्ही बालिका अश्विता शुक्ला द्वारा दीप प्रज्वलित कर इस मेले का शुभारंभ किया गया। यह आयोजन 5 एवं 6 अप्रैल को पीएम श्री शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 नीमच परिसर में पालक संघ के जिलाध्यक्ष जगदीश शर्मा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
मेले की जानकारी देते हुए महिला विंग की पदाधिकारी श्रीमती नेहा गोयल ने बताया कि इस आयोजन में छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक पिछले सत्र की पुस्तकों को दान कर रहे हैं और बदले में उन्हें नई कक्षा की पुस्तकें उपलब्धता के अनुसार निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं। साथ ही पालक संघ की ओर से कॉपियां और नोटबुक भी मुफ्त वितरित की जा रही हैं।
पहले ही दिन मेले में उत्साहजनक प्रतिसाद देखने को मिला, जहां 400 से अधिक पुस्तकें 50 से अधिक विद्यार्थियों को वितरित की गईं। बड़ी संख्या में पालक और विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएं इस पहल का लाभ उठा रहे हैं।
मेले का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना ही नहीं, बल्कि “पुस्तक दान महादान” अभियान को सफल बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना भी है। उपयोगी पुस्तकों को रद्दी में बेचने के बजाय जरूरतमंदों तक पहुंचाने की यह पहल सामाजिक सहयोग की मिसाल बन रही है।
मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा भी मेले का अवलोकन कर पालक संघ की पूरी टीम और आयोजक जगदीश शर्मा के प्रयासों की सराहना की गई।
महिला विंग की जिला मीडिया प्रभारी आशा सांभर ने बताया कि यह आयोजन शिक्षा को सुलभ बनाने और पालकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पालक संघ के जिलाध्यक्ष जगदीश शर्मा ने शहर के पालकों से अपील की है कि वे अपनी अनुपयोगी पुस्तकों को दान करें, ताकि अन्य जरूरतमंद विद्यार्थियों को लाभ मिल सके और महंगी पुस्तकों के कारण किसी की पढ़ाई प्रभावित न हो।
इस अवसर पर ऊषा मित्तल, आशा सांभर, नेहा गोयल, मंजू जोगनिया, कपिल शुक्ला, संजय नागदा, शशिकांत दुबे, नागेश जोगनिया, सतीश शर्मा, पंडित कमल शर्मा, राजीव दत्त शर्मा, जयंत शुक्ला सहित अनेक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।