//सफलता की कहानी// नीमच जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बचा रही हैं 324 बगिया
"एक बगिया माँ के नाम" जिले में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण का अनुपम उदाहरण बन रही है। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अमन वैष्णव के मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्र की महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हितग्राही रोपित फलदार पौधों को जीवन देने में जुटी हैं। जिले में 300 बगिया के लक्ष्य के विरुद्ध 324 बगिया स्थापित की जा चुकी हैं। प्रत्येक हितग्राही महिला द्वारा संतरा, नींबू और अमरूद के 100-100 पौधे लगाए गए हैं, जिन्हें एक वर्ष पूर्ण होने को है। गर्मी में विशेष प्रबंध: भीषण गर्मी में पौधों को जीवित रखने के लिए महिलाएं टैंकर व ड्रिप सिस्टम के माध्यम से सिंचाई कर रही हैं। पौधों की सुरक्षा हेतु हितग्राहियों द्वारा वायर फेंसिंग का कार्य भी किया जा रहा है। सतत निगरानी एवं मार्गदर्शन: कृषि सखियों एवं ग्राम पंचायत द्वारा हितग्राहियों से समय-समय पर संपर्क कर पौधों को पानी पिलाने, खरपतवार हटाने एवं कीटनाशक दवा का छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है। कृषि सखी संगीता मालवीय द्वारा ग्राम तालखेड़ा, कुचडौद एवं फोफलिया में परियोजना की हितग्राही महिलाओं को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।यह परियोजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि "माँ" के नाम पर लगाए गए ये पौधे आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली और पोषण सुरक्षा की गारंटी भी बन रहे हैं। ग्राम पंचायत कुचडौद के गांव परासली में नाथी बाई भंवरलाल अहिरवार के संतरे के बगीचे में कृषि सखी संगीता समय-समय पर पौधे को पानी पिलाने, खरपतवार हटाने और कीटनाशक दवा का छिड़काव करने की सलाह दे रही हैं।