कौन थी नर्स सरला भट्ट और क्यों हुई थी श्रीनगर में हत्या? 36 साल बाद मिला जवाब
जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि 1990 में नर्स सरला भट्ट का अपहरण किया गया, उन्हें यातनाएं दी गईं और बाद में उनकी हत्या कर दी गई. जांच एजेंसियों का कहना है कि यह वारदात Jammu and Kashmir Liberation Front (JKLF) द्वारा की गई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना कश्मीरी पंडित समुदाय को निशाना बनाने और उनमें डर फैलाने की एक बड़ी आतंकी साजिश का हिस्सा थी. सरला भट्ट 27 वर्षीय नर्स थीं और श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के नियोनेटोलॉजी डिपार्टमेंट में काम करतीं थीं.
19 अप्रैल 1990 को उनका शव श्रीनगर के मल्लाबाग-ओमर कॉलोनी रोड पर मिला था. उनकी मौत ने उस समय पूरे कश्मीर में सनसनी फैला दी थी और यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा. किन्हें मामले में बनाया गया आरोपी, जानें न्यूज एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों ने मामले को लेकर बात की.
एजेंसी ने इसे आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में ‘‘मील का पत्थर’’ बताया है. एसआईए ने 2024 में मामला सौंपे जाने के बाद इसे फिर से खोला और एनआईए की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया. उस समय आतंकवादी संगठन जेकेएलएफ के स्वयंभू ‘कमांडर-इन-चीफ’ रहे मलिक के अलावा, उसके चार साथियों खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हामिद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सूफी को भी मामले में आरोपी बनाया गया है.
अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है. मोहम्मद यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है. क्या धारा लगाई गई आरोपियों पर आरोपियों को आतंकवाद एवं विध्वंसक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (टाडा),1987 और भारतीय शस्त्र अधिनियम, 1959 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपित किया गया है.
यह मामला मार्च 2024 में एसआईए को सौंपा गया था. जांच एजेंसी ने पिछले दो साल में कई जगहों पर छापेमारी की, ताकि पांचों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया जा सके..