बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बीच खूनी खेल! शुभेंदु अधिकारी के करीबी का कत्ल क्या बड़े ‘राजनीतिक आतंकवाद’ की आहट है?
खास बातें राजनीतिक आतंकवाद या प्रतिशोध की आग? आक्रोश का सैलाब और डर का विमर्श भाजपा के लिए चुनौती और अवसर दोनों संवेदनशील जिलों में ध्रुवीकरण और असुरक्षा TMC के लिए खतरनाक जाल बनी घटना बंगाल में खत्म नहीं हुई वर्चस्व की लड़ाई West Bengal Post Poll Violence 2026: पश्चिम बंगाल में 15 साल पुराने शासन के अंत और भाजपा की ऐतिहासिक जीत के महज 48 घंटे के भीतर एक ऐसी वारदात हुई, जिसने राज्य को सियासी हिंसा के मुहाने पर खड़ा कर दिया.
शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद साथी चंद्रनाथ रथ की हत्या ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाये हैं, बल्कि एक बड़े टकराव की आशंका को जन्म दे दिया है. जानकारों की मानें तो यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बंगाल की सत्ता के ट्रांजीशन पीरियड (बदलाव के दौर) में क्षेत्रीय वर्चस्व की सबसे बड़ी और खतरनाक लड़ाई है.
राजनीतिक आतंकवाद या प्रतिशोध की आग? भाजपा नेतृत्व ने इस घटना को ‘राजनीतिक आतंकवाद’ करार दिया है. पार्टी का आरोप है कि पुरानी व्यवस्था के अवशेष नयी सरकार के शपथ लेने से पहले भय का माहौल पैदा करना चाहते हैं. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि चंद्रनाथ की हत्या से पहले कई दिनों तक उनकी रेकी की गयी थी.
इस घटना को प्रोफेशनल हिट जॉब की तरह अंजाम दिया गया मामला है. आक्रोश का सैलाब और डर का विमर्श उत्तर 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर जैसे जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा उबल रहा है. भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने ही आवेशित कार्यकर्ताओं को जवाबी हिंसा से रोकने की है.
राजनीतिक विश्लेषक सुभोमोय मोइत्रा के अनुसार- एक शासन के पतन और दूसरे के उदय के बीच का समय सबसे संवेदनशील होता है. इस दौरान होने वाली हर हिंसा प्रतीकात्मक संदेश देती है. इसे भी पढ़ें : कौन थे चंद्रनाथ रथ, जिनकी हत्या से दहल गया बंगाल, कभी बनना चाहते थे संन्यासी भाजपा के लिए चुनौती और अवसर दोनों यह हत्याकांड भाजपा के लिए दोहरी स्थिति लेकर आया है.
भाजपा अब अपने उस पुराने आरोप को पूरी तरह पुष्ट कर रही है कि बंगाल में ‘लक्षित हमलों’ और ‘हिंसा की संस्कृति’ की जड़ें कितनी गहरी हैं. इससे पार्टी को ‘विक्टिम कार्ड’ (पीड़ित होने का विमर्श) मजबूत करने में मदद मिली है. शपथ ग्रहण से पहले कानून-व्यवस्था को संभाले रखना और कार्यकर्ताओं के ‘स्वतःस्फूर्त प्रतिशोध’ को नियंत्रित करना कड़ी परीक्षा है.
खुद शुभेंदु अधिकारी ने कार्यकर्ताओं से शांति बनाये रखने की भावुक अपील की है. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें संवेदनशील जिलों में ध्रुवीकरण और असुरक्षा चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद उत्तर 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्वी मेदिनीपुर जैसे जिलों में राजनीतिक ध्रुवीकरण और गहरा गया है.
इन इलाकों में पार्टी दफ्तरों पर हमले और तोड़फोड़ की छिटपुट खबरें पहले से आ रही थीं, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मर्डर ने जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच असुरक्षा की भावना को चरम पर पहुंचा दिया है. भाजपा के भीतर अब मांग उठ रही है कि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद अस्थिर क्षेत्रों में पुलिस का बड़ा फेरबदल और आक्रामक कार्रवाई की जाये.
इसे भी पढ़ें : चंद्रनाथ रथ मर्डर केस में बड़ा खुलासा- ग्लॉक 47X पिस्टल से गोली मारी, प्रोफेशनल शूटर्स का हाथ West Bengal Post Poll Violence 2026: TMC के लिए खतरनाक जाल बनी घटना चुनावी हार के बाद पहले से ही संगठनात्मक बिखराव झेल रही तृणमूल कांग्रेस के लिए यह घटना किसी जाल से कम नहीं है.
टीएमसी ने हत्या की निंदा करते हुए अदालत की निगरानी में CBI जांच की मांग की है. पार्टी का दावा है कि उनके अपने कार्यकर्ताओं पर भी हमले हो रहे हैं, लेकिन भाजपा ने विक्टिम विमर्श को इतनी मजबूती से खड़ा कर दिया है कि टीएमसी के दावे दबते नजर आ रहे हैं. इसे भी पढ़ें : चंद्रनाथ की मां का रो-रोकर बुरा हाल, कहा- भवानीपुर में ममता बनर्जी की हार का बदला है मेरे बेटे का कत्ल बंगाल में खत्म नहीं हुई वर्चस्व की लड़ाई बंगाल की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है, जहां सत्ता की कुर्सी तो बदल गयी है, लेकिन सड़कों पर वर्चस्व की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.
आने वाले दिनों में भाजपा का रुख और भी सख्त होने की संभावना है, जिससे राज्य का राजनीतिक तापमान और अधिक बढ़ सकता है. इसे भी पढ़ें कब होगा शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत पीए चंद्रनाथ रथ का अंतिम संस्कार? भाजपा ने क्या कहा शुभेंदु के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में ममता बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग, नवीन मिश्रा ने लगाये गंभीर आरोप बंगाल में कत्लेआम-बमबाजी : शुभेंदु के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या, हावड़ा में बम बरसे, कमरहट्टी में BJP कार्यकर्ता के घर तांडव ममता बनर्जी की जिद पर भड़के जेठमलानी, कहा- इस्तीफा न दें, तो धक्के मारकर निकालें, वह अब ऑफिस में घुसपैठिया.