27 लाख वोटर की ‘नो एंट्री’, सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने पलटी बाजी, अंतिम समय में जुड़े 2 नाम, कौन हैं वो?
Voter List Supreme Court Order: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पर छिड़े घमासान के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. एक ओर राज्य के करीब 27 लाख विचाराधीन मतदाताओं के लिए वोटर लिस्ट के दरवाजे बंद कर दिये गये हैं, तो दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अंतिम समय में 2 हाई-प्रोफाइल नाम मतदाता सूची में जोड़े गये हैं.
इस फैसले ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश और वो ‘2’ वीआईपी नाम आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जिन 2 लोगों के नाम जोड़े गये हैं, वे कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं. एक हैं महताब शेख.
वह फरक्का विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. दूसरे शख्स का नाम है- मोत्तकिन आलम. वह पूर्व विधायक हैं. वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने के तुरंत बाद मानिकचक से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया. 27 लाख का भविष्य अधर में, न्यायाधिकरण अब भी ठप एक ओर इन दो नेताओं को राहत मिली है, तो दूसरी ओर आम जनता के लिए संघर्ष जारी है.
न्यायिक फैसले के बाद विचाराधीन 27 लाख मतदाताओं को फिलहाल सूची में जगह नहीं मिली है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि नाम हटाने के खिलाफ सुनवाई के लिए प्रस्तावित 19 न्यायाधिकरणों (Tribunals) ने अभी तक काम करना शुरू ही नहीं किया है. ऑनलाइन आवेदनों की बाढ़ : बृहस्पतिवार तक इन न्यायाधिकरणों के पास दो लाख से अधिक ऑनलाइन आवेदन जमा हो चुके हैं.
तैयारी अधूरी : श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान में न्यायाधिकरण बनाने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कामकाज शुरू होने में अभी एक-दो दिन का समय और लग सकता है. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें BDO और DM दफ्तर के बाहर उमड़ी भीड़ ट्रिब्यूनल्स के कामकाज में देरी और अस्पष्टता के कारण पूरे बंगाल में अफरा-तफरी का माहौल है.
हजारों मतदाता अपने दस्तावेजों के साथ प्रखंड विकास अधिकारियों (BDO) और जिला मजिस्ट्रेट (DM) के कार्यालयों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं. मतदाताओं का कहना है कि मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, लेकिन अभी तक उनकी सुनवाई शुरू नहीं हुई है. उन्हें यह भी नहीं पता कि केवल ऑनलाइन आवेदन करना उनके वोटिंग अधिकार को सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त होगा या नहीं.
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इसके लिए नाम जोड़ने की प्रक्रिया 6 अप्रैल को ही बंद कर दी गयी थी. दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा. इसके लिए भी बृहस्पतिवार (9 अप्रैल) को प्रक्रिया रोक दी गयी. चुनाव आयोग, हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल्स के बीच तालमेल बिठाने के लिए एक वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी को अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है.
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उस दिन सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई होगी. इसी सुनवाई में तय होगा उन लाखों लोगों को, जिनके आवेदन अभी भी लंबित हैं, उन्हें वोट डालने का मौका मिलेगा या नहीं. इसे भी पढ़ें बंगाल में 90 लाख लोगों को मिलेगा वोटिंग का हक? वोटर लिस्ट फ्रीज मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 13 को महा-सुनवाई बंगाल चुनाव 2026: मतुआ वोट बैंक में सेंध लगा पायेगी भाजपा? SIR ने बढ़ायी बेचैनी बंगाल चुनाव 2026: भितरघात और SIR का घातक कॉकटेल, 120 सीटों पर बिगड़ सकता है दिग्गजों का खेल! बंगाल में 91 लाख वोटर ‘गायब’, 120 सीटों का बिगड़ा गणित! SIR ने उड़ायी टीएमसी और भाजपा की नींद.