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सुप्रीम कोर्ट को मिले पांच नए जज; कॉलेजियम की सिफारिशों पर राष्ट्रपति की मुहर, शीर्ष अदालत में अब 37 न्यायाधीश

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Prabhat Khabar 01 जून 2026, 09:21 am
सुप्रीम कोर्ट को मिले पांच नए जज; कॉलेजियम की सिफारिशों पर राष्ट्रपति की मुहर, शीर्ष अदालत में अब 37 न्यायाधीश

Supreme Court Five New Judges: सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से भेजे गए पांच नामों को मंजूरी दे दी है. इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट अपनी नई स्वीकृत न्यायिक क्षमता के लगभग पूर्ण स्तर पर पहुंच जाएगा.

हाल ही में केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या में भी बढ़ोतरी की थी. राष्ट्रपति ने नियुक्तियों को दी मंजूरी केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है.

इनमें चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं. In exercise of the power conferred by clause (2) of Article 124 of the Constitution of India, the President of India, after consultation with Chief Justice of India, is pleased to appoint the following as Judges of the Supreme Court of India.

I convey my best wishes to them:- pic.twitter.com/WxHaRYWF6p — Arjun Ram Meghwal (@arjunrammeghwal) June 1, 2026 कौन-कौन बने सुप्रीम कोर्ट के नए जज? जिन नामों को मंजूरी मिली है, उनमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली शामिल हैं.

इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहन को भी सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है. इन नियुक्तियों को केवल रिक्त पद भरने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा रहा है. न्यायिक नियुक्तियों में वरिष्ठता, योग्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और विविधता जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है.

पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट की संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. कॉलेजियम ने पहले की थी सिफारिश इन नियुक्तियों की प्रक्रिया कुछ दिन पहले शुरू हुई थी, जब 27 मई को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इन पांच नामों को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी.

यह सिफारिश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाले कॉलेजियम की पहली बड़ी नियुक्ति सूची मानी जा रही है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नवंबर 2025 में देश के प्रधान न्यायाधीश का पद संभाला था. ये भी पढ़ें:- सोनारपुर हमला अभिषेक बनर्जी की अग्नि परीक्षा, जन-आक्रोश को ममता की तरह सहानुभूति में बदल पायेंगे ‘भाईपो’? ये भी पढ़ें:- न्यायपालिका की गरिमा धूमिल करने की साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा : चीफ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट की संख्या 37 तक पहुंचेगी इन नियुक्तियों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने का फैसला किया था.

सुप्रीम कोर्ट (नंबर ऑफ जजेज) संशोधन अध्यादेश, 2026 के जरिए शीर्ष अदालत में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई थी. अब पांच नए न्यायाधीशों के शामिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुल न्यायाधीशों की संख्या 37 हो जाएगी. इसका मतलब है कि स्वीकृत 38 पदों में से केवल एक पद ही रिक्त रहेगा.

कुल न्यायाधीशों की संख्या में मुख्य न्यायाधीश को नहीं जोड़ा जाता, इसलिए अध्यादेश में ‘सुप्रीम कोर्ट में अब कुल जजों की संख्या 33 से बढ़कर 37’ किया गया. लंबित मामलों के बोझ को कम करने की कोशिश न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करना है.

इसके साथ ही अधिक नियमित संविधान पीठों के गठन में भी सुविधा होगी, जिससे महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की सुनवाई तेज हो सकेगी. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नई नियुक्तियों से शीर्ष अदालत की कार्यक्षमता बढ़ेगी और मामलों के निपटारे की गति में सुधार आएगा..

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