Logo
ब्रेकिंग न्यूज़
ओडिशा: बाढ़ में 5 दिन पेड़ से लटके रहे सुंनंदा, कैसे बची जान? समझें शरीर का ‘सर्वाइवल मोड’मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर दी बधाईअगले 24 घंटे में 18 से ज्यादा राज्यों में बरसात, गरज-चमक के साथ पड़ेंगे छींटे, IMD का अलर्टकीर्ति झा आजाद पर FIR दर्ज, तृणमूल सांसद पर 15 लाख की रंगदारी मांगने का आरोप, जांच में जुटी CIDमौसम : लो प्रेशर का असर, झारखंड के अलावा इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्टटाटानगर-आसनसोल रूट के यात्रियों के लिए अलर्ट, 24 से 30 अगस्त तक 4 ट्रेनें रद्दजबलपुर में उपचाररत दोनों बच्चों का पूरा खर्च उठाएगी सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव | मुख्यमंत्री ने जताया दुख, मृतक बच्ची के परिजन को 4 लाख की सहायतावीडियो वायरल: यूपी के मिर्जापुर में कुत्ते के काटने के बाद भौंकने लगा किशोर, डॉक्टर बोले- रेबीज के लक्षणपानी से परिसीमन तक, 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राजनीति और संघवाद पर क्या हुआ फैसला ?मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री श्री नड्डा से भेंट कीकिसान अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव | प्रदेश में 20 अगस्त से चल रहा है फार्मर आईडी बनाने का अभियान मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली से शिवपुरी के बलराम कृषि महोत्सव में वीसी से की सहभागिताChhattisgarh Paper Leak: सुई से छेदकर निकाला पर्चा, 11 हजार में बेचा; प्रोफेसर समेत 6 गिरफ्तारहोमवर्क न करने पर टीचर ने मारा थप्पड़, बच्चे की हुई मौत, CCTV वीडियो वायरलचुनौतियां को अवसर में बदलकर एमपी अब सबसे तेज गति से प्रगति करने वाला राज्य बन गया है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव | आजादी का अमृतकाल चल रहा है, हम सब मिलकर देश के विकास के लिए आगे बढ़ेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव इकॉनामिक टाईम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 में हुए शामिलBCI के को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी ने मांगा चेयरमैन मनन मिश्रा का इस्तीफा, कहा-Bar बेहतर का हकदार

ओडिशा: बाढ़ में 5 दिन पेड़ से लटके रहे सुंनंदा, कैसे बची जान? समझें शरीर का ‘सर्वाइवल मोड’

Author
Prabhat Khabar 23 अगस्त 2026, 12:51 pm
ओडिशा: बाढ़ में 5 दिन पेड़ से लटके रहे सुंनंदा, कैसे बची जान? समझें शरीर का ‘सर्वाइवल मोड’

ओडिशा के भद्रक जिले के बलिपाटना गांव के 35 वर्षीय सुंनंदा बेहरा बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे. इसके बाद वह पानी में डूबे एक ताड़ के पेड़ को पकड़कर करीब 5 दिन तक टिके रहे. बाढ़ प्रभावित इलाके से गुजर रहे ग्रामीणों ने उन्हें देखा और इसकी जानकारी ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) को दी.

इसके बाद उनका रेस्क्यू किया गया. बचाव के समय सुंनंदा काफी कमजोर थे और उनके हाथ-पैर कांप रहे थे. सुंनंदा का इतने लंबे समय तक बाढ़ के पानी के बीच जीवित रहना असाधारण है. लेकिन ऐसे मामले यह समझने का मौका देते हैं कि खतरे में इंसानी शरीर और दिमाग खुद को जिंदा रखने के लिए किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं.

खतरा महसूस होते ही शरीर हो जाता है एक्टिव वैज्ञानिकों के मुताबिक, खतरा महसूस होने पर शरीर में एक्यूट स्ट्रेस रिस्पॉन्स शुरू होता है. इसमें सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है और शरीर खुद को खतरे से निपटने के लिए तैयार करता है. इसे आम तौर पर ‘फाइट, फ्लाइट या फ्रीज’ प्रतिक्रिया कहा जाता है.

इस दौरान एड्रेनालिन जैसे हार्मोन की भूमिका होती है. दिल की धड़कन और सांस लेने की गति बढ़ सकती है और मांसपेशियों को ज्यादा ऊर्जा मिलती है. दिमाग का अमिग्डाला खतरे से जुड़ी प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यानी खतरे के समय शरीर सामान्य स्थिति की तरह काम नहीं करता, बल्कि उसकी प्राथमिकता तुरंत खुद को सुरक्षित रखना बन जाती है.

कई दिनों तक संकट रहे तो शरीर ऊर्जा बचाने लगता है एड्रेनालिन और तत्काल तनाव प्रतिक्रिया इंसान को कई दिनों तक नहीं चला सकती. अगर लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता, तो शरीर पहले से जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करना शुरू करता है. लंबे समय तक भोजन की कमी रहने पर शरीर ऊर्जा के लिए फैट और फिर दूसरे ऊतकों का इस्तेमाल कर सकता है.

बाढ़ के पानी में रहना शरीर के लिए बड़ी चुनौती लगातार पानी में रहने की अपनी अलग चुनौती होती है. NOAA के मुताबिक, पानी शरीर से गर्मी हवा की तुलना में करीब 25 गुना तेजी से निकाल सकता है. इसलिए ठंडे पानी में लंबे समय तक रहने से शरीर का तापमान तेजी से गिर सकता है और हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ सकता है.

सुंनंदा के मामले में इसके अलावा कई दिनों तक पेड़ को पकड़े रहना, लगातार पानी के संपर्क में रहना और शरीर को एक ही स्थिति में बनाए रखना भी अतिरिक्त शारीरिक दबाव रहा होगा. ये भी पढ़ें: बंगाल की खाड़ी में डूबा पनामा-फ्लैग वाला जहाज, इंडियन नेवी का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी ‘सर्वाइवल मोड’ में दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता मुश्किल हालात में सिर्फ शरीर ही नहीं, दिमाग भी लगातार स्थिति के मुताबिक प्रतिक्रिया करता है.

खतरे के दौरान डर और तनाव से जुड़ी मस्तिष्क की प्रक्रियाएं व्यक्ति को तेजी से प्रतिक्रिया करने में मदद करती हैं. शोध में अमिग्डाला को खतरे और डर से जुड़ी प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण माना गया है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लिए यह तय करना महत्वपूर्ण हो सकता है कि कहां टिके रहना है, ऊर्जा कैसे बचानी है और किस तरह खतरे से बचना है.

हालांकि, लंबे समय तक तनाव का असर सोचने और निर्णय लेने की क्षमता पर भी पड़ सकता है. ये भी पढ़ें: सोते-सोते मुस्कुराता है आपका नन्हा बच्चा? जानें क्या होती है इसके पीछे की असली वजह शरीर और दिमाग मिलकर बढ़ाते हैं बचने की संभावना सुंनंदा बेहरा की घटना यह दिखाती है कि बेहद कठिन परिस्थितियों में इंसानी शरीर कई स्तरों पर खुद को बचाने की कोशिश करता है.

तनाव की तत्काल प्रतिक्रिया, ऊर्जा का इस्तेमाल और बचाने की कोशिश, मानसिक स्थिति और आसपास के वातावरण सभी इसमें भूमिका निभाते हैं. हालांकि, किसी व्यक्ति के इतने लंबे समय तक जीवित रहने की वजह सिर्फ एक ‘सर्वाइवल मोड’ नहीं होती. स्थिति, पानी का तापमान, शरीर की हालत, भोजन-पानी की उपलब्धता, चोट, मानसिक स्थिति और बचाव तक पहुंचने का समय जैसे कई कारक मिलकर तय करते हैं कि कोई व्यक्ति कितने समय तक जीवित रह सकता है..

Ad

ताज़ा खबरें