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पीएमएफएमई योजना से बदली किस्मत, पिपलिया मंडी के दीपक माहेश्वरी बने सफल उद्यमी लहसुन कारोबार से 25 लोगों को दिया रोजगार

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Admin Malwa First 14 मार्च 2026, 12:06 pm
पीएमएफएमई योजना से बदली किस्मत, पिपलिया मंडी के दीपक माहेश्वरी बने सफल उद्यमी लहसुन कारोबार से 25 लोगों को दिया रोजगार

सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना छोटे उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी योजना का लाभ लेकर मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी निवासी दीपक कुमार माहेश्वरी (7974384883) ने अपने छोटे कारोबार को बड़े उद्योग में बदल दिया। आज वे परिधि ट्रेडर्स के माध्यम से लहसुन के प्रसंस्करण और व्यापार का सफल व्यवसाय चला रहे हैं और न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बने हैं बल्कि 25 से अधिक लोगों को रोजगार देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना रहे हैं। दीपक कुमार माहेश्वरी पहले छोटे स्तर पर लहसुन के व्यापार से जुड़े हुए थे। उनके मन में हमेशा यह सपना था कि वे इस काम को बड़े स्तर पर स्थापित करें, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके सामने बड़ी बाधा थी। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित पीएमएफएमई योजना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क कर योजना के अंतर्गत आवेदन किया। आवेदन स्वीकृत होने के बाद उन्हें सेंट्रल बैंक, पिपलिया मंडी से लगभग 28 लाख 43 हजार रुपए का ऋण प्राप्त हुआ, जिस पर उन्हें 10 लाख रुपए की सब्सिडी भी मिली। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने आधुनिक मशीनों के साथ अपने लहसुन प्रसंस्करण कार्य को नई दिशा दी। दीपक माहेश्वरी ने अपने व्यवसाय में आधुनिक ग्रेडिंग मशीन और बल्क ब्रेकर मशीन लगाई हैं। ग्रेडिंग मशीन के माध्यम से लहसुन की छोटी-बड़ी कलियों को अलग किया जाता है, जिससे गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग ग्रेड तैयार होते हैं। वहीं बल्क ब्रेकर मशीन के जरिए लहसुन की कलियों को साफ किया जाता है। इसके अलावा उनके यहां लहसुन से जुड़े विभिन्न प्रकार के प्रसंस्करण कार्य जैसे गार्लिक ग्रेडिंग, पीलिंग, पेस्टिंग और अन्य उत्पादों का निर्माण भी किया जाता है। मशीनों के माध्यम से लहसुन की कलियों को पीसकर गार्लिक पेस्ट तैयार किया जाता है। दीपक बताते हैं कि उनकी इकाई में प्रतिदिन लगभग 1 टन गार्लिक पेस्ट का उत्पादन किया जाता है। उनके द्वारा तैयार किया गया गार्लिक पेस्ट और अन्य उत्पाद उत्तर प्रदेश, बिहार, बेंगलुरु, तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में भेजे जाते हैं। वहीं ग्रेडिंग के बाद निकलने वाला बड़े आकार का लहसुन सीधे दक्षिण भारत के बाजारों में भेजा जाता है, जिससे उन्हें अच्छा लाभ मिलता है। दीपक माहेश्वरी पिछले लगभग 10 वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने उद्योग के माध्यम से 25 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। इस प्रकार वे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दे रहे हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। दीपक का कहना है कि मंदसौर की लहसुन की गुणवत्ता पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां की लहसुन की मांग भारत के विभिन्न राज्यों में रहती है। वे बताते हैं कि लहसुन एक ऐसी फसल है जिसका लगभग हर हिस्सा उपयोगी होता है। प्रसंस्करण के बाद बचने वाले लहसुन के अवशेषों को वे गौशालाओं में भेजते हैं, जिसे गायों के चारे के रूप में उपयोग किया जाता है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के माध्यम से मिली सहायता ने दीपक कुमार माहेश्वरी को अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया है। आज वे न केवल सफल उद्यमी हैं बल्कि अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं। दीपक कहते है कि सही योजना और मेहनत के दम पर छोटा व्यवसाय भी बड़े उद्योग का रूप ले सकता है।

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