मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने फील्ड अमले को काउंसलिंग, एवं पोषण परामर्श का प्रशिक्षण दिया जाएगा
कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय मातृ , शिशु तथा बाल मृत्यु प्रकरणों की समीक्षा बैठक में प्रसव उपरांत माताओ एव जन्म से 5 वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य अमले को मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी आशा, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सीएचओ प्रत्येक प्रसूता महिलाओं ,नवजात की गृहभेंट कर काउंसलिंग सुनिश्चित करें। मेडिकल ऑफिसर द्वारा काउंसलिंग एवं गृहभेट कार्य का सत्यापन किया जाए। प्रसूता के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के दिन ही स्वास्थ्य अमले द्वारा गृहभेंट अनिवार्य रूप से की जाए। सभी आशा, एएनएम, सीएचओ को मातृ एवं शिशु केयर एवं पोषण आहार संबंधी परामर्श संबंधी समुचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। प्रसव केंद्र पर नर्सिंग ऑफिसर द्वारा मातृ एवं शिशु केयर संबंधी काउंसलिंग सुनिश्चित की जाए। ➡️सख्त निगरानी तंत्र: एचबीएनसी का सत्यापन जिला स्तरीय सुमन हेल्पडेस्क के माध्यम से करवाया जाए। बच्चे की माता से बात कर पुष्टि की जाए कि आशा द्वारा गृहभेंट एवं काउंसलिंग की गई अथवा नहीं। एचबीएनसी न करने वाले अमले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग के लिए ओडीके एप्प पर मेडिकल ऑफिसर, अधिकारी व सुपरवाईजरी स्टाफ नियमित जानकारी दर्ज करें। ➡️उच्च जोखिम वाले बच्चों पर विशेष फोकस: एएनएम एवं सीएचओ उच्च जोखिम वाले बच्चों की विशेष गृहभेंट एवं काउंसलिंग करें। एनबीएसयू में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा परिवहन के दौरान बच्चे की विशेष देखरेख सुनिश्चित की जाए। बैठक में माह अप्रैल में मातृ एवंशिशु मृत्यु के प्रकरणों में कारणों की समीक्षा कर विभाग को तत्काल कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश प्रसाद, सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र पाटिल, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. मनीष यादव, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लाड धाकड़ एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष जोशी उपस्थित थे।