//सफलता की कहानी// फसल विविधीकरण बना समृद्धि का आधार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से फसल विविधीकरण, उद्यानिकी फसलों तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम नीमच जिले के ग्राम हाड़ी पिपलिया के प्रगतिशील किसान श्री हरीश पाटीदार की सफलता के रूप में सामने आया है। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने गुलाब, गेंदा और ड्रैगन फ्रूट की खेती अपनाई, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक श्री हरीश पाटीदार खरीफ मौसम में सोयाबीन एवं मक्का तथा रबी में गेहूं, चना, सरसों, लहसुन, अलसी, मेथी और धनिया जैसी परंपरागत फसलों की खेती करते थे। बढ़ती लागत के बावजूद उन्हें प्रति हेक्टेयर लगभग 1.50 लाख रुपये वार्षिक आय ही प्राप्त हो पाती थी। बेहतर आय और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से उन्होंने नवाचार का मार्ग चुना। नई संभावनाओं की तलाश में उन्होंने मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों तथा महाराष्ट्र का भ्रमण कर सफल किसानों से आधुनिक खेती की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में गुलाब, गेंदा और ड्रैगन फ्रूट की खेती प्रारंभ की। खेती को अधिक वैज्ञानिक एवं लाभकारी बनाने के लिए उन्होंने ड्रिप सिंचाई एवं फर्टिगेशन प्रणाली स्थापित की। साथ ही आत्मा परियोजना के माध्यम से संतुलित पोषण प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा उन्नत खेती संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन भी नियमित रूप से प्राप्त होता रहा। पहले ही वर्ष बेहतर परिणाम मिलने पर उन्होंने इन फसलों का रकबा बढ़ा दिया। वर्तमान में श्री हरीश पाटीदार 3 एकड़ में गुलाब, 2 एकड़ में गेंदा तथा 2 एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। इन फसलों से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 14.72 लाख रुपये की सकल आय प्राप्त हो रही है। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 8 लाख रुपये का शुद्ध वार्षिक लाभ अर्जित हो रहा है। फसल विविधीकरण एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने से उनकी आय पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई है और खेती अब उनके लिए अधिक लाभकारी व्यवसाय बन चुकी है। श्री हरीश पाटीदार की सफलता से प्रेरित होकर गांव के 4 किसानों ने गुलाब तथा 5 किसानों ने गेंदा की खेती प्रारंभ कर दी है। वे स्वयं इच्छुक किसानों को अपने खेत पर बुलाकर आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी देते हैं और उन्हें फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका सपना है कि उनका गांव भविष्य में "फूलों वाले गांव" के रूप में अपनी अलग पहचान बनाए। उनकी सफलता की कहानी सोशल मीडिया के माध्यम से अन्य जिलों तक भी पहुंची है, जिससे कई किसान उनसे संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं। श्री हरीश पाटीदार का कहना है कि युवा किसानों को नवाचार अपनाने के लिए आगे आना चाहिए। आधुनिक तकनीक और फसल विविधीकरण से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। नवाचार अपनाने से मुझे आर्थिक समृद्धि के साथ नई पहचान भी मिली है। श्री हरीश पाटीदार ने अपनी इस सफलता का श्रेय प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग तथा आत्मा परियोजना से प्राप्त तकनीकी मार्गदर्शन को देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में किसानों को आधुनिक खेती, फसल विविधीकरण और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए संचालित योजनाओं एवं प्रोत्साहन का लाभ मिलने से किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।