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शासन की नजर में शिक्षक या सस्ता श्रमिक? 3500 रुपये में गुजर-बसर को मजबूर राजेंद्र चौहान पूरा दायित्व शिक्षक का, वेतन बंधुआ मजदूर जैसा; शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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Mukesh Rathor 30 मई 2026, 04:34 pm
शासन की नजर में शिक्षक या सस्ता श्रमिक? 3500 रुपये में गुजर-बसर को मजबूर राजेंद्र चौहान पूरा दायित्व शिक्षक का, वेतन बंधुआ मजदूर जैसा; शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
**नीमच/रामपुरा । शिक्षा विभाग में वर्षों से कार्यरत एक कर्मचारी आज भी सम्मानजनक वेतन और शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित है। यह मामला राजेंद्र चौहान (नाई), पिता स्वर्गीय फुलचंद जी चौहान का है, जो पिछले लगभग 28 वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें मात्र 3500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार राजेंद्र चौहान की नियुक्ति दिनांक 17 अगस्त 1998 को शिक्षा गारंटी योजना (ईजीएस) के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक विद्यालय हाडाखेड़ी में 500 रुपये मासिक मानदेय पर की गई थी। बाद में विद्यालय में शून्य नामांकन होने के कारण लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आदेशानुसार उनका स्थानांतरण शासकीय प्राथमिक विद्यालय गुगलखेड़ा, संकुल बैंसला में कर दिया गया। राजेंद्र चौहान की प्रारंभिक शैक्षणिक योग्यता 10वीं होने के कारण उन्हें समय-समय पर शासन द्वारा लागू विभिन्न लाभकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया। इसके बाद उन्होंने स्वयं प्रयास कर वर्ष 2019 में उर्दू एजुकेशन बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण की तथा अपने समस्त दस्तावेज विभागीय अधिकारियों और संबंधित कार्यालयों में जमा कराए। इसके बावजूद आज तक उनकी पात्रता और वेतन संबंधी मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। राजेंद्र चौहान का कहना है कि वर्तमान में भी उन्हें मात्र 3500 रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जा रहा है, जो न तो किसी नियमित वेतनमान के अनुरूप है और न ही कलेक्टर दर के बराबर है। उनका आरोप है कि विभाग उनसे पूर्णकालिक कार्य तो ले रहा है, लेकिन वेतन के नाम पर वर्षों से उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डी.एड. (D.Ed.) की डिग्री नहीं होने के कारण उन्हें कई शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया, लेकिन इसके बावजूद उनसे विद्यालय में नियमित रूप से कार्य लिया जा रहा है। उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा जिला प्रशासन से गुहार लगाई। यहां तक कि कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में भी अनेक आवेदन प्रस्तुत किए, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका। राजेंद्र चौहान का कहना है कि वर्तमान समय में प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को 30 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन प्राप्त हो रहा है, जबकि लगभग तीन दशक की सेवा देने के बाद भी उन्हें मात्र 3500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की है कि उनकी सेवा अवधि, योग्यता और कार्य को देखते हुए उन्हें न्याय दिलाया जाए तथा उचित वेतन और शासकीय लाभ प्रदान किए जाएं। अब देखना यह होगा कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे राजेंद्र चौहान की आवाज शासन और प्रशासन तक कब पहुंचती है और उन्हें उनके अधिकार कब प्राप्त होते**
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