क्या राहुल गांधी नहीं चाहते एक और अन्ना आंदोलन? छात्रों के मुद्दों पर कांग्रेस ने बदली सियासी प्लान
Rahul Gandhi on CJP protest : पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक तरफ जहां दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन चल रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के अलग-अलग हिस्सों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम चला रहे हैं. जिसको लेकर यह पूछा जा रहा कि कांग्रेस CJP को अपना पूरा समर्थन क्यों नहीं देती? इस मामले को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है.
कांग्रेस नहीं चाहती, CJP के पास रहे छात्र आंदोलन का राजनीतिक नेतृत्व राहुल गांधी जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मिलने नहीं पहुंचे.जिसके बाद इसको लेकर अटकलों का दौर शुरू हुआ.हालंकि खबर आई कि कांग्रेस के अंदर इस रणनीति पर चर्चा की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के भीतर हुए, इस मामले को लेकर बातचीत में राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं से कहा कि वह सोनम वांगचुक और छात्रों की मांगों का सम्मान करते हैं, लेकिन वो चाहते हैं कि छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक नेतृत्व कांग्रेस के हाथ में रहना चाहिए, न कि सोनम वांगचुक या CJP के नेताओं के पास.
दिल्ली और पंजाब से कांग्रेस ले रही सीख ! राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रार्टी अपनी पुरानी गलती नहीं दोहराना चाहती और इसलिए वो कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे छात्र आंदोलन को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. दरअसल, कांग्रेस का मानना है कि 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन के दौरान बनी परिस्थितियों ने आम आदमी पार्टी के उभरने का रास्ता तैयार किया था.
बाद में AAP दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस की बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन गई. ऐसे में पार्टी इस बार वैसी स्थिति दोबारा नहीं बनने देना चाहती. यही वजह है कि कांग्रेस ने छात्रों के मुद्दे का समर्थन तो कर रही लेकिन इसके साथ-साथ अपनी अलग राजनीतिक मुहिम भी जारी रखी है.
कांग्रेस चला रही अपना अभियान मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक CJP के छात्र आंदोलन के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने पुरानी राजनीतिक घटनाओं से सबक लेते हुए अपनी रणनीति तय की है. पार्टी का मानना है कि छात्रों के मुद्दे का समर्थन किया जाए, लेकिन यह भी ध्यान रखा जाए कि आंदोलन का पूरा राजनीतिक लाभ किसी दूसरी पार्टी को न मिले.
इसी सोच के तहत राहुल गांधी ने हाल ही में अलग अलग शहरों में "छात्रों की गूंज" अभियान शुरू किया. जिसके जरिए कांग्रेस खुद को पेपर लीक से प्रभावित छात्रों की आवाज के तौर पर पेश करना चाहती है. ये भी पढ़ें : संसद मार्च के लिए CJP ने क्यों चुनी 20 जुलाई की तारीख, जानिए मानसून सत्र को लेकर क्या है रणनीति?.