बंगाल चुनाव 2026: भितरघात और SIR का घातक कॉकटेल, 120 सीटों पर बिगड़ सकता है दिग्गजों का खेल!
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की बिसात बिछ चुकी है. इस बार मुकाबला सिर्फ ‘दीदी’ बनाम ‘दादा’ यानी तृणमूल कांग्रेस बनाम भारतीय जनता पार्टी तक सीमित नहीं है. राज्य की 294 सीटों पर इस बार 2 ऐसे ‘साइलेंट फैक्टर’ काम कर रहे हैं, जो सत्ता की चाबी किसी के भी हाथ से छीन सकते हैं.
2 साइलेंट फैक्टर – बगावत और SIR पहला फैक्टर है- टिकट वितरण के बाद उपजी बगावत. दूसरा फैक्टर है एसआईआर (Special Intensive Revision) के कारण मतदाता सूची में हुआ बड़ा उलटफेर. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 120 से अधिक सीटों पर हटाये गये मतदाताओं की संख्या हार-जीत के अंतर से कहीं ज्यादा है, जो इस चुनाव को अब तक का सबसे अनिश्चित मुकाबला बना रही है.
120 सीटों पर वोटर लिस्ट का बम बंगाल चुनाव के इतिहास में पहली बार मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया निर्णायक साबित हो सकता है. सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राज्य की कम से कम 120 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मतदाता सूची से हटाये गये नामों की संख्या, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन सीटों पर दर्ज की गयी जीत के अंतर (Victory Margin) से अधिक है.
40 क्षेत्रों में यह अंतर 2021 के विधानसभा नतीजों को भी पार कर गया है. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें TMC में सर्जिकल स्ट्राइक : हरिश्चंद्रपुर से चिनसुरा तक आग ममता बनर्जी ने इस बार सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) को काटने के लिए अपने एक-तिहाई यानी 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिये हैं.
यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ पार्टी के लिए सिरदर्द बनती दिख रही है. मालदा जिले की हरिश्चंद्रपुर विधानसभा सीट से 3 बार के विधायक और मंत्री तजमुल हुसैन ने टिकट कटने पर इसे ‘विश्वासघात’ करार दिया है. भाजपाई रहे मतिउर रहमान को टिकट देने से यहां के कार्यकर्ता भड़के हुए हैं.
हुगली जिले की चिनसुरा विधानसभा सीट पर कद्दावर नेता असित मजूमदार का टिकट काटकर युवा चेहरे देवांशु भट्टाचार्य को उतारना जोखिम भरा साबित हो सकता है. मजूमदार ने राजनीति से संन्यास के संकेत दे दिये हैं. आमडांगा विधानसभा सीट पर पीरजादा कासिम सिद्दीकी की एंट्री से भड़के रफीकुर रहमान के समर्थकों ने सड़कों पर टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.
BJP और वामदलों में भी अपनों से जंग सिर्फ सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ही नहीं, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कोलकाता मुख्यालय के बाहर भी कार्यकर्ताओं का हुजूम ‘बाहरी’ उम्मीदवारों और जमीनी नेताओं की अनदेखी के खिलाफ नारेबाजी कर रहा है. प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य इसे केंद्रीय नेतृत्व का फैसला बताकर शांत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बूथ स्तर पर लामबंदी ठप होने का डर बना हुआ है.
अनुशासन के लिए जानी जाने वाली माकपा को भी नदिया के कालीगंज में अपने ही दफ्तर में तोड़फोड़ देखनी पड़ी. बूथ स्तर पर निष्क्रियता बनेगी हार की वजह? राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती की मानें, तो बंगाल जैसे राज्य में जहां 2021 के चुनाव में करीब 45 सीटें 8,000 से कम वोटों के अंतर से जीती गयीं थीं, वहां स्थानीय नेताओं का ‘न्यूट्रल’ या ‘निष्क्रिय’ हो जाना आत्मघाती होगा.
एसआईआर के कारण बदले समीकरणों के बीच अगर नाराज कार्यकर्ता घर बैठ गया, तो बड़े-बड़े दिग्गजों की नाव डूबनी तय है. चुनाव की तारीखें एक नजर में प्रथम चरण 23 अप्रैल 2026 द्वितीय चरण 29 अप्रैल 2026 नतीजे 04 मई 2026 बूथ लेवल के कार्यककर्ता बदल सकते हैं समीकरण अगर बंगाल चुनाव 2021 में किसी सीट पर हार-जीत का अंतर 5,000 वोट था और वहां 8,000 मतदाताओं के नाम कट गये हैं या जांच के दायरे में हैं, तो वहां का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है.
बूथ स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की नाराजगी इस अंतर को हार में बदल सकती है. इसे भी पढ़ें बंगाल 2026 चुनाव से पहले Video वायरल, EVM बटन पर ‘इत्र’ का तानाशाही मॉडल? बंगाल चुनाव 2026: 63 लाख वोटर गायब और ‘अस्मिता’ की जंग, ममता बनर्जी बचा पायेंगी अपना किला? चुनाव से पहले 50 अफसरों के ट्रांसफर से बौखलायीं ममता बनर्जी, चुनाव आयोग पर बोला हमला बंगाल चुनाव 2026: एसआईआर में गायब हो गयीं 33 लाख महिला वोटर, क्या होगा असर?.