अब सुखेंदु शेखर रॉय के बागी तेवर, बोले- बंगाल में अराजकता का हुआ अंत, क्या ममता बनर्जी के करीबियों पर गिरेगी गाज?
खास बातें भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देने वालों पर हमला जूलियस सीजर और पतन का जिक्र बुद्धिजीवियों की अनदेखी, आजाद ख्याल पर पहरा आरजी कर कांड में जनता की नब्ज पहचानने में फेल रही टीएमसी क्यों अहम है सुखेंदु शेखर रॉय की आवाज? टीएमसी के लिए खतरे की घंटी Sukhendu Sekhar Ray TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद अब पार्टी के भीतर ‘आंतरिक विस्फोट’ की स्थिति है.
काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे के बाद अब राज्यसभा के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर ऐसे सवाल उठाये हैं, जिसने तृणमूल भवन में हड़कंप मचा दिया है. भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देने वालों पर हमला रॉय ने ऐतिहासिक संदर्भों का सहारा लेते हुए सीधे तौर पर राज्य की पिछली स्थिति को ‘असहनीय अराजकता’ करार दिया है.
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रॉय का इशारा पार्टी के भीतर मौजूद उन ‘शकुनियों’ की तरफ है, जिन्होंने भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दे दिया. जूलियस सीजर और पतन का जिक्र सुखेंदु शेखर रॉय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पोस्ट के जरिये पार्टी के मौजूदा हालात की तुलना रोम के पतन से की है.
रॉय ने लिखा- 44 ईसा पूर्व में रोमन सम्राट जूलियस सीजर की सीनेट में हत्या कर दी गयी थी. लेकिन बंगाल में मई के मध्य से पहले ही जनता ने असहनीय अराजकता की स्थिति का अंत कर दिया. इसे भी पढ़ें : टीएमसी में बगावत! काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा, I-PAC पर फोड़ा हार का ठीकरा, ममता को दी सलाह- ‘भूंइफोड़’ संस्थाओं से बचें बुद्धिजीवियों की अनदेखी, आजाद ख्याल पर पहरा एक अन्य पोस्ट में उन्होंने चेतावनी दी कि जब भ्रष्ट लोग फलते-फूलते हैं और बुद्धिमानों को परिषद (Council) से बाहर कर दिया जाता है, तब गणतंत्र का पतन निश्चित है.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र विचार आवश्यक हैं, वरना व्यवस्था ढह जाती है. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Sukhendu Sekhar Ray TMC: आरजी कर कांड में जनता की नब्ज पहचानने में फेल रही टीएमसी रॉय के करीबियों के अनुसार, वे इस बात से बेहद आहत हैं कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में 29 सीटें जीतने वाली पार्टी महज 2 साल में कैसे अर्श से फर्श पर आ गयी.
रॉय का मानना है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी के बाद जो जनाक्रोश सड़कों पर उतरा, पार्टी उसे समझने में पूरी तरह विफल रही. सुखेंदु शेखर लिखते हैं कि जब सड़कों पर अभूतपूर्व भीड़ थी, तब पार्टी के कुछ नेता इसे ‘राजनीतिक साजिश’ बता रहे थे, जबकि रॉय इसे जनता का स्वतःस्फूर्त विद्रोह मान रहे थे.
रॉय ने निजी बातचीत में स्वीकार किया है कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार ‘संस्थागत रूप’ ले चुका है, जिसने तृणमूल की जड़ों को खोखला कर दिया. इसे भी पढ़ें : बंगाल में हार के बाद ममता बनर्जी को याद आया INDIA गठबंधन! दिल्ली में बड़ी बैठक की तैयारी, क्या कांग्रेस देगी साथ? क्यों अहम है सुखेंदु शेखर रॉय की आवाज? सुखेंदु शेखर रॉय टीएमसी में कोई मामूली चेहरा नहीं हैं.
कांग्रेस की पृष्ठभूमि से आये रॉय पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेहद करीबी रहे हैं. वे संवैधानिक मामलों और संघीय ढांचे के विशेषज्ञ माने जाते हैं. संसद में टीएमसी का सबसे प्रखर चेहरा रहे हैं. छह दशकों से बंगाल की राजनीति को करीब से देखने वाले रॉय का यह ‘विद्रोह’ इशारा कर रहा है कि पार्टी के पुराने वफादार अब आई-पैक (I-PAC) और नये नेतृत्व की कार्यशैली से बेहद खफा हैं.
टीएमसी के लिए खतरे की घंटी काकोली घोष दस्तीदार के बाद सुखेंदु शेखर रॉय का यह रुख स्पष्ट करता है कि हार के बाद टीएमसी में पुराने बनाम नये (Old vs New) की जंग अब निर्णायक मोड़ पर है. यदि ममता बनर्जी ने जल्द ही पार्टी के भीतर ‘सर्जरी’ नहीं की, तो आने वाले दिनों में कई और बड़े विकेट गिर सकते हैं.
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