न बैठने की जगह, न पीने लायक पानी, सीएजी रिपोर्ट का दावा- हावड़ा समेत देश के 458 रेलवे स्टेशन सुविधाविहीन
कोलकाता/नई दिल्ली : रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कई स्टेशनों पर कूलरों का पानी पीने योग्य नहीं है.
इसमें ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है. यदि यह बैक्टीरिया पेट में प्रवेश कर जाता है, तो इससे गंभीर संक्रमण हो सकते हैं. संसद में पेश हुई रिपोर्ट कैग की रिपोर्ट में न केवल पीने के पानी की कमी पाई गई है, बल्कि कई स्टेशनों पर शौचालय, बैठने की जगह और पानी के नल जैसी कई न्यूनतम सुविधाओं का भी अभाव है.
रेलवे की यात्री सेवाओं की यह स्थिति 12 अगस्त को संसद में प्रस्तुत सीएजी की रिपोर्ट "भारतीय रेलवे के गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता" (Passenger Amenities and Sanitation at Non-Suburban Railway Stations in Indian Railways) में सामने आई है.
हावड़ा और सियालदह में मूलभूत सुविधाओं की कमी देश के कई महत्वपूर्ण एनएसजी-1 स्टेशनों पर रेल सेवाओं की अपर्याप्त व्यवस्था पाई गई है. इनमें छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल शामिल हैं. इन स्टेशनों पर बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, मूत्रालय, शौचालय, कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन संकेतक बोर्ड भी नहीं हैं.
2,035 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 12 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी थी, आठ स्टेशनों पर पंखों की कमी थी और आठ स्टेशनों पर वाटर कूलर की कमी थी. इसके अलावा पांच स्टेशनों पर साइनबोर्ड की भी कमी थी. 2,035 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी.
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार 201 स्टेशनों पर शौचालयों की कमी है. 403 स्टेशनों पर मूत्रालयों की कमी है. 2,035 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी है. पीने के पानी में ई-कोलाई सीएजी की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि छह क्षेत्रों में स्थित 59 केंद्रों पर पेयजल में बैक्टीरिया की जांच की गई.
कई केंद्रों पर पेयजल में ई. कोलाई बैक्टीरिया की उपस्थिति पाई गई. क्या कहा गया है रिपोर्ट में दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शनों पर कूलरों के पानी में ई-कोलाई पाया गया है. दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन पर भी यही बैक्टीरिया पाया गया था.
सेंट्रल रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला स्टेशनों पर वाटर कूलर के नमूनों में भी ई-कोलाई पाया गया है. पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन पर पानी में ई-कोलाई की उपस्थिति भी पाई गई. इसके अतिरिक्त, 2022-23 में आठ जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म के नलों से लिए गए पेयजल के नमूनों में ई-कोलाई सहित कई बैक्टीरिया पाए गए.
512 स्टेशनों में से 458 में कमियां सीएजी ने रेलवे की यात्री सेवाओं की जांच के लिए देश भर के 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों का निरीक्षण किया. इनमें से 458 स्टेशन, यानी 89 प्रतिशत से अधिक स्टेशन, न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं से वंचित पाए गए. कुछ स्थानों पर कुछ सेवाएं बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं थीं, जबकि अन्य स्थानों पर सेवाएं रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों से नीचे थीं.
2018 तक हो जानी थी व्यवस्था रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में स्टेशनों के लिए न्यूनतम आवश्यक सेवाओं के मानदंड निर्धारित किए थे. सभी स्टेशनों को 31 अगस्त, 2018 तक इन्हें लागू करने या सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था. न्यूनतम सेवाओं में पेयजल, प्रतीक्षा कक्ष, बैठने का क्षेत्र, प्लेटफार्म कैनोपी, मूत्रालय, शौचालय, ऊंचा प्लेटफार्म, पंखा, फुट ओवरब्रिज, कूड़ेदान, घड़ी और सार्वजनिक संबोधन प्रणाली शामिल हैं.
प्रतिदिन चलती है 7,424 से अधिक ट्रेनें सीएजी ने कहा है कि देश में कुल 5,908 गैर-उपनगरीय समूह स्टेशन हैं. 2023-24 में भारतीय रेलवे ने प्रतिदिन 7,424 से अधिक गैर-उपनगरीय यात्री ट्रेनें चलाईं. उस वर्ष गैर-उपनगरीय यात्रियों की संख्या लगभग 292.4 करोड़ थी.
यात्रियों की इस विशाल संख्या को ध्यान में रखते हुए, सीएजी ने कहा है कि स्टेशनों पर यात्री सेवा और स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें सीएजी ने रेलवे को दी सलाह सीएजी ने पेयजल की गुणवत्ता को विशेष महत्व दिया है.
इसने जल आपूर्ति प्रणालियों के नियमित निरीक्षण और सभी निर्धारित मानकों के अनुसार पेयजल के नियमित परीक्षण की सिफारिश की है. सीएजी ने कहा कि यह रिपोर्ट मुख्य रूप से 2019-20 से 2023-24 तक की जांच से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करती है. इसके अलावा, कुछ ऐसी घटनाएं जो पहले पता चली थीं, लेकिन रिपोर्ट में उल्लेखित नहीं हैं, और आवश्यकतानुसार, 2023-24 के बाद की कुछ घटनाओं को भी ध्यान में रखा गया है.
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