केरल में जनता के हीरो वीडी सतीशन को पार्टी ने दिया सम्मान, 18 मई को लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ
V D Satheesan : केरल विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के दस दिन बाद केरल में मुख्यमंत्री कौन होगा इसकी घोषणा हो गई है. प्रदेश में कांग्रेस गठबंधन यूडीएफ की जीत से पहले तक वीडी सतीशन विपक्ष के नेता थे और उनकी छवि एक जुझारू, शालीन और जनता के लिए उपलब्ध नेता की रही है.
उन्होंने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा और उनकी नीतियों को लेकर आक्रामक रहे. केरल में कांग्रेस को मजबूती दी वीडी सतीशन केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता थे. वे एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने जनता के मुद्दों को समझा और उनसे जुड़े. वे हमेशा जनता के लिए उपलब्ध रहते थे.
उन्होंने पिछले 5 सालों में विधानसभा में केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन के खिलाफ आक्रामक रुख रखा और उन्हें भ्रष्टाचार और कई प्रशासनिक मुद्दों पर घेरा. सतीशन ने चुनाव से पहले यह कहा था कि अगर यूडीएफ 100 सीटें नहीं जीतता है, तो वे राजनीति छोड़ देंगे. चुनाव परिणाम सतीशन के अनुसार ही आए.
ऐसे में पार्टी के कार्यकर्ता यह मानते हैं कि केरल में यूडीएफ अगर जीता है, तो उसमें प्रमुख योगदान वीडी सतीशन का है. यही वजह है कि केरल के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ता उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए सड़क पर भी उतरे थे.उनके संघर्ष की वजह से पार्टी केरल में मजबूत हुई और पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद सौंपने का निर्णय लेकर एक तरह से उनके कार्यों का सम्मान किया है.
सरकार में रहने का अनुभव नहीं होने के बाद भी दिखाई मैच्योरिटी जुझारू नेता वीडी सतीशन वीडी सतीशन 2001 से विधानसभा चुनाव जीत रहे हैं, लेकिन उनके पास सरकार में रहकर काम करने का अनुभव नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री बनने से पहले ही यह कहकर अपनी मैच्योरिटी का परिचय दिया कि वह और अन्य नेता एक टीम के रूप में काम करेंगे और नया केरल बनाएंगे.
चुनाव अभियान के दौरान ही उन्होंने यह कहा था कि यूडीएफ गठबंधन की जीत होगी, ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे सतीशन को अपनी जीत का अनुमान पहले से ही हो गया था. राहुल गांधी ने 2021 में सतीशन को बनाया था विपक्ष का नेता 2021 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस पार्टी हार गई थी, तब उस कठिन दौर में राहुल गांधी ने सतीशन को विपक्ष का नेता बनाया था.
उस वक्त यह फैसला जोखिम भरा लग रहा था, लेकिन आज के समय में उस निर्णय की तारीफ हो रही है. अब पार्टी के भीतर उसे एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है.सतीशन के जमीनी स्तर के काम और स्थानीय मुद्दों पर लगातार ध्यान देने से संगठन और मतदाताओं का भरोसा फिर से मजबूत हुआ है.
छात्र आंदोलन से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे वीडी सतीशन ने छात्र आंदोलन से राजनीति की शुरुआत की थी और आज के दौर में वे केरल की सबसे मुखर आवाजों में से एक हैं.वीडी सतीशन ने खुद को रणनीतिक तौर पर कुशल नेता के रूप में स्थापित किया है, जो कानूनी समझ और राजनीतिक चतुराई का संयोजन करते हुए हाल के वर्षों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा को फिर से मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं.एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर निवासी सतीशन की राजनीति में शुरुआती पकड़ एसएच कॉलेज थेवरा में छात्र राजनीति में सक्रियता के जरिये बनी और बाद में उन्होंने महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में छात्र नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं.
1996 में परवूर विधानसभा क्षेत्र से हार के साथ शुरू हुआ राजनीतिक सफर सतीशन का चुनावी सफर 1996 में परवूर विधानसभा क्षेत्र से एक हार के साथ शुरू हुआ, लेकिन उन्होंने इस असफलता को जल्द ही एक नये अवसर में बदल दिया. अपने अगले प्रयास में उन्होंने शानदार जीत हासिल की और इसके बाद लगातार इस सीट को बरकरार रखते हुए दो दशक से अधिक समय में मजबूत जमीनी पकड़ बनाई.पूर्व मुख्यमंत्री के करुणाकरण के निष्ठावान समर्थक रहे सतीशन ने परवूर से 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार जीत दर्ज की.
इस प्रकार विधानसभा की राजनीति में उनका 25 वर्षों से अधिक का सफर तय हुआ है. ये भी पढ़ें : क्या है पीएम मोदी की 7 अपील का राज, जानिए विदेशी मुद्रा भंडार कब होता है प्रभावित?.