गरीबों की महुआ मोईत्रा दीप्सिता धर के 450 रुपए वाले ‘विदेशी’ बैग का सच और उत्तर दमदम का सियासी समीकरण
खास बातें अनोखा चुनाव प्रचार : दीदी नहीं, अब DD को बोलो भवानीपुर से चुनाव लड़ने से इनकार? विज्ञापन जैसा टैगलाइन बन गया दिप्सिता का चुनावी मंत्र 450 रुपए की बैग पर ‘लुई विटों’ का लोगो बैग का निकला सरोजिनी मार्केट का कनेक्शन बिल्लियों से प्यार और अकाल मृत्यु का गम नागासाकी दिवस पर हुआ डीडी का जन्म Dipsita Dhar North Dum Dum: आमी एक यायावर… यानी मैं एक यायावर हूं… मशहूर गायक भूपेन हजारिका के ये बोल सीपीएम की फायरब्रांड युवा नेता दीप्सिता धर के राजनीतिक जीवन पर बिल्कुल सटीक बैठते हैं.
32 वर्षीय दीप्सिता का चुनावी सफर किसी खानाबदोश की तरह रहा है. 2021 में बाली विधानसभा, 2024 में श्रीरामपुर लोकसभा और अब 2026 में उत्तर दमदम विधानसभा से ताल ठोक रही हैं. जेएनयू (JNU) से अपनी राजनीति की धार तेज करने वाली दीप्सिता के दादा पद्मनीधि धर कभी सीपीएम के विधायक थे, लेकिन दीप्सिता के लिए चुनावी राजनीति में अभी बड़ा धमाका करना बाकी है.
अनोखा चुनाव प्रचार : दीदी नहीं, अब DD को बोलो उत्तर दमदम के चुनावी मैदान में दीप्सिता ने प्रचार का एक डिजिटल और अनोखा तरीका निकाला है. ममता बनर्जी के ‘दीदी के बोलो’ की तर्ज पर दीप्सिता ने अपने नाम और सरनेम के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर कैंपेन शुरू किया है ‘DD के बोलो’ यानी ‘डीडी को बोलो’.
भवानीपुर से चुनाव लड़ने से इनकार? सियासी गलियारों में चर्चा है कि उन्हें पहले भवानीपुर विधानसभा सीट से बंगाल की चीफ मिनिस्टर और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ लड़ने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. हालांकि, पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगायी.
इसे भी पढ़ें : शुभेंदु अधिकारी का ‘हिंदुत्व’ अवतार : श्रीखोल बजाकर संकीर्तन और 500 किमी का सफर, 35 साल तक नहीं देखी फिल्म विज्ञापन जैसा टैगलाइन बन गया दिप्सिता का चुनावी मंत्र सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने उनकी फोटो के साथ लिखा- आंख बंद करके भरोसा किया जा सकता है.
समर्थकों को शायद यह नहीं पता कि यह किसी मशहूर उत्पाद की टैगलाइन है, लेकिन दीप्सिता के लिए यह चुनावी मंत्र बन गया. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 450 रुपए की बैग पर ‘लुई विटों’ का लोगो दीप्सिता धर हाल ही में एक ऐसी कंट्रोवर्सी में फंस गयीं थीं, जिसने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया था.
एक तस्वीर में दीप्सिता के हाथ में महंगे फ्रांसीसी ब्रांड लुई विटों (Louis Vuitton) के लोगो वाला बैग दिखा. फेसबुक पर ट्रोलर्स ने उन्हें ‘सर्वहारा की पार्टी’ की अमीर नेता बताते हुए घेर लिया. इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव : 4 मई को खत्म होगा वामपंथ का वनवास या ढह जायेगा अस्तित्व? क्या कहते हैं सियासी समीकरण बैग का निकला सरोजिनी मार्केट का कनेक्शन विवाद बढ़ा, तो पता चला कि वह बैग पेरिस से नहीं, बल्कि दिल्ली के सरोजिनी मार्केट से खरीदी गयी था.
इसकी कीमत मात्र 450 रुपए थी. इसके बाद लोगों ने उन्हें मजाक में ‘गरीबों की महुआ मोईत्रा’ कहना शुरू कर दिया. दीप्सिता को असल में एक ऐसे भारतीय ब्रांड के बैग का शौक है, जो दलित कलाकारों के श्रम से जुड़ा है. हालांकि, उन्होंने उसे अभी तक खरीदा नहीं है. इसे भी पढ़ें : ममता बनर्जी के लिए सत्ता की राह इस बार सबसे कठिन! नबान्न बचाने में ये 5 फैक्टर बनेंगे रोड़ा, क्या फिर दिखेगा दीदी का करिश्मा? बिल्लियों से प्यार और अकाल मृत्यु का गम राजनीति की तल्खियों के बीच दीप्सिता का एक कोमल पक्ष भी है.
उन्हें बिल्लियां पालने का बहुत शौक है. वह अक्सर उन्हें अपने साथ रखती थीं, लेकिन हाल ही में उन्होंने अपनी दोनों पालतू बिल्लियों को अकाल मृत्यु के कारण खो दिया, जिसका गम उन्हें आज भी है. इसे भी पढ़ें : लियोनेल मेसी के साथ वो फोटो और ‘बिगड़ैल’ कुत्ते का काटना, जानें टॉलीगंज के ‘फर्स्ट बॉय’ अरूप विश्वास के राज Dipsita Dhar North Dum Dum: नागासाकी दिवस पर हुआ डीडी का जन्म नागासाकी दिवस (9 अगस्त) को जन्मी दीप्सिता क्या इस बार उत्तर दमदम में अपनी जीत का धमाका कर पायेंगीं, यह देखना दिलचस्प होगा.
पद्म (बीजेपी) की घोर विरोधी यह ‘पद्मनीधि’ की पोती अब लाल झंडे को उसकी पुरानी जमीन दिलाने के लिए पसीना बहा रही हैं. इसे भी पढ़ें शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर में दोहरायेंगे इतिहास? नंदीग्राम के ‘नायक’ से ममता बनर्जी का सबसे बड़ा ‘दुश्मन’ बनने की पूरी कहानी लाठी चलाने में माहिर और ड्रैगन फ्रूट की खेती का विचार, जानें बीजेपी के ‘गेमचेंजर’ दिलीप घोष की अनसुनी दास्तां भाईजान : वॉलीबॉल के नेशनल प्लेयर से विधायक तक का सफर, जेल और हमले भी न डिगा सके नौशाद सिद्दीकी का हौसला बंगाल में ‘गढ़’ ढहेंगे और ‘स्विंग जोन’ तय करेंगे सत्ता का भविष्य, 2026 के नतीजों में चौंकायेंगे नये समीकरण.