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भवानीपुर चुनाव 2026: ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी, क्या बचेगा दीदी का सबसे मजबूत किला?

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Prabhat Khabar 22 मार्च 2026, 04:24 pm
भवानीपुर चुनाव 2026: ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी, क्या बचेगा दीदी का सबसे मजबूत किला?

Bhowanipore Assembly Seat 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति के लगातार बदलते परिदृश्य में भवानीपुर विधानसभा जैसी कुछ ही सीटें हैं, जिनके साथ इतिहास और प्रतीकात्मक महत्व इतनी गहराई से जुड़ा हुआ है. यह केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि वह राजनीतिक सफर है, जो राज्य में कांग्रेस के लंबे प्रभुत्व से लेकर तृणमूल कांग्रेस के उभार तक के बदलाव को साफ तौर पर दर्शाता है.

प्रभावशाली नेताओं का आधार रही भवानीपुर विधानसभा सीट आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ मानी जाने वाली भवानीपुर सीट हमेशा से तृणमूल कांग्रेस की पहचान नहीं रही. आजादी के बाद दशकों तक दक्षिण कोलकाता की यह सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ थी और राज्य के कई प्रभावशाली नेताओं का राजनीतिक आधार रही.

भवानीपुर का सामाजिक गणित : क्यों है यह ‘मिनी इंडिया’? दक्षिण कोलकाता की यह सीट अपनी बहुसांस्कृतिक पहचान के लिए जानी जाती है. यहां की आबादी का मिश्रण ही इसे राजनीतिक रूप से रोचक बनाता है. बंगाली हिंदू : लगभग 42 प्रतिशत गैर-बंगाली (हिंदी भाषी/व्यापारी वर्ग) : 34 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता : करीब 24 प्रतिशत कोलकाता का प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का निवास इसी क्षेत्र में है.

इससे इस सीट का महत्व और बढ़ जाता है. पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे भवानीपुर से जीते पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे ने इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में और बाद में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता. कांग्रेस के अन्य दिग्गज नेताओं जैसे मीरा दत्ता गुप्ता और रथिन तालुकदार ने भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, जिससे भवानीपुर कांग्रेस का प्रमुख शहरी गढ़ बन गया.

कुछ दिनों के लिए वामदलों के कब्जे में रही भवानीपुर कई वर्षों तक यह सीट कांग्रेस के प्रभाव में रही, जबकि वामपंथी दल उस समय केवल 1969 में थोड़े समय के लिए यहां जीत हासिल कर सके, जब इस सीट का नाम बदलकर कालीघाट विधानसभा क्षेत्र कर दिया गया था. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता साधन गुप्ता ने बांग्ला कांग्रेस और माकपा की संयुक्त मोर्चा की दूसरी सरकार के दौरान यह सीट जीती.

वह 1953 में भारत के पहले दृष्टिहीन सांसद बने थे. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 1972 में नक्शे से गायब हो गयी भवानीपुर सीट भवानीपुर की राजनीतिक यात्रा ने तब अप्रत्याशित मोड़ ले लिया, जब यह सीट 1972 में परिसीमन के बाद चुनावी नक्शे से ही गायब हो गयी.

लगभग 4 दशकों तक यह सीट केवल राजनीतिक स्मृतियों में ही बनी रही. वर्ष 2011 के परिसीमन के दौरान यह सीट दोबारा अस्तित्व में आयी, तब पश्चिम बंगाल की राजनीति भी बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही थी. उसी वर्ष वाम मोर्चा के 34 साल के शासन का अंत हुआ और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी का दौर शुरू हुआ.

2011 में सुब्रत बक्शी ने जीती सीट नये सिरे से बनी भवानीपुर सीट जल्द ही तृणमूल के उभार से जुड़ गयी. ममता बनर्जी ने 2011 के पहले चुनाव में अपने करीबी सहयोगी सुब्रत बक्शी को इस सीट से उम्मीदवार बनाया. बक्शी ने 64 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करके माकपा के नारायण जैन को करीब 50,000 वोट से हराया और भवानीपुर को तृणमूल का मजबूत गढ़ बना दिया.

इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: 63 लाख वोटर गायब और ‘अस्मिता’ की जंग, ममता बनर्जी बचा पायेंगी अपना किला? भवानीपुर से उपचुनाव लड़कर पहली बार सीएम बनीं ममता बाद में सुब्रत बक्शी ने सीट छोड़ दी, ताकि तृणमूल की भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री बनीं ममता बनर्जी उपचुनाव के जरिये विधानसभा में प्रवेश कर सकें.

ममता बनर्जी ने करीब 77 प्रतिशत वोट हासिल कर माकपा की नंदिनी मुखर्जी को 54,000 से अधिक मतों से हराया और भवानीपुर में अपना मजबूत राजनीतिक आधार स्थापित किया. तब से यह सीट तृणमूल के कब्जे में बनी हुई है. कई-हाई प्रोफाइल मुकाबले हुए, लेकिन नतीजा नहीं बदला कोलकाता के महापौर और पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री फिरहाद हकीम कहते हैं कि भवानीपुर हमारे लिए सिर्फ एक सीट नहीं है.

यह वह जगह है, जहां लोगों ने ममता बनर्जी की विकास और समावेश की राजनीति पर बार-बार भरोसा जताया है. वर्षों से भवानीपुर में कई हाई-प्रोफाइल मुकाबले हुए, लेकिन नतीजा नहीं बदला. इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: भितरघात और SIR का घातक कॉकटेल, 120 सीटों पर बिगड़ सकता है दिग्गजों का खेल! 2016 में ममता बनर्जी ने दीपा दासमुंशी को हराया वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में वाम दलों और कांग्रेस ने गठबंधन कर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपा दासमुंशी को ममता बनर्जी के खिलाफ उतारा.

इस मुकाबले को ‘दीदी बनाम बौदी’ के रूप में पेश किया गया. ममता दीदी ने 65,520 वोट हासिल कर दीपा दासमुंशी को आसानी से हरा दिया. दीपा को 40,219 वोट मिले. भाजपा के चंद्र कुमार बोस तीसरे स्थान पर रहे, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार से ताल्लुक रखते हैं.

2021 में फिर भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर बनीं सीएम पांच साल बाद 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला किया, जहां उनका मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी से हुआ. भवानीपुर से तृणमूल ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को उम्मीदवार बनाया.

भाजपा ने यहां से अभिनेता रुद्रनील घोष को टिकट दया. घोष को 44,786 वोट मिले, जो इस सीट पर किसी विपक्षी उम्मीदवार को अब तक मिले सबसे ज्यादा वोट थे. फिर भी वह 28,000 से अधिक वोटों से हार गये. इसे भी पढ़ें : बंगाल 2026 चुनाव से पहले Video वायरल, EVM बटन पर ‘इत्र’ का तानाशाही मॉडल? ममता बनर्जी के लिए शोभनदेव ने खाली की थी सीट उसी वर्ष यह सीट और अधिक महत्वपूर्ण हो गयी.

नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी से 1,956 वोटों से हारने के बाद पश्चिम बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उपचुनाव जीतना जरूरी था. एक बार फिर भवानीपुर केंद्र में आया. शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सीट खाली की और टीएमसी सुप्रीमो ने भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल के खिलाफ उपचुनाव लड़ा.

2021 के चुनाव में ममता बनर्जी को मिले 72 प्रतिशत मत ममता बनर्जी ने 58,000 से अधिक वोटों के अंतर से प्रियंका टिबरेवाल को पराजित किया. टीएमसी सुप्रीमो को लगभग 72 प्रतिशत मत मिले. इसके साथ ही भवानीपुर उनकी सबसे भरोसेमंद सीट के रूप में स्थापित हो गयी. इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: एसआईआर में गायब हो गयीं 33 लाख महिला वोटर, क्या होगा असर? भवानीपुर विधानसभा सीट का प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र मुख्यतः कोलकाता नगर निगम के वार्डों से बना है, जो दक्षिण कोलकाता की सामाजिक विविधता को दर्शाता है.

यहां बंगाली मध्यमवर्गीय इलाकों के साथ बड़ी संख्या में हिंदी भाषी व्यापारी समुदाय भी रहता है. इस क्षेत्र में प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर भी है, जो कोलकाता के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. यहीं ममता बनर्जी का निवास भी है. हाई-प्रोफाइल सीट की डेमोग्राफी इस क्षेत्र में लगभग 42 प्रतिशत मतदाता बंगाली हिंदू, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और करीब 24 प्रतिशत मुस्लिम हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सामाजिक मिश्रण ममता बनर्जी की शहरी जनवादी राजनीति के अनुकूल रहा है. राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा- भवानीपुर दक्षिण कोलकाता की बहुसांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है. ममता बनर्जी ने यहां समुदायों से परे एक व्यक्तिगत जुड़ाव बनाया है.

इसे भी पढ़ें : ममता बनर्जी की 10 ‘महा-प्रतिज्ञाएं’: लक्ष्मी भंडार की राशि बढ़ी, बेरोजगारों को भत्ता, जानें दीदी के पिटारे से और क्या निकला फिर राजनीति के केंद्र में आया भवानीपुर जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, भवानीपुर एक बार फिर राजनीति के केंद्र में है.

ममता बनर्जी इसी सीट से चुनाव लड़ रहीं हैं. भाजपा ने उनके खिलाफ नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है, जिन्होंने वर्ष 2021 के बंगाल चुनाव में नंदीग्राम विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता को हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया था. मनोवैज्ञानिक युद्ध का मैदान – राजनीतिक विश्लेषक ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के इस मुकाबले ने इस सीट की राजनीतिक कहानी में एक नया नाटकीय मोड़ जोड़ दिया है.

विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि भवानीपुर में ममता बनर्जी को चुनौती देकर भाजपा इस सीट को मनोवैज्ञानिक युद्ध का मैदान बनाना चाहती है. SIR ने भी तेज की राजनीतिक बहस मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया ने भी इस सीट को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है.

भवानीपुर में मतदाता सूची से 47,000 से अधिक नाम हटाये गये हैं, जबकि 14,000 से अधिक मतदाता कानूनी पचड़े में फंसे हैं. भाजपा नेता सुकांत मजूमदार कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में समय बदल चुका है. जो सीटें कभी अजेय मानी जाती थीं, वे अब चुनौती का सामना कर रही हैं और भवानीपुर भी इसका अपवाद नहीं होगा.

इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: कल्याणकारी योजनाएं बनाम सत्ता-विरोधी लहर, ममता बनर्जी के 15 साल के शासन की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा भवानीपुर में 29 अप्रैल को दूसरे चरण में होगी वोटिंग निकटवर्ती चुनावी मुकाबले से परे भवानीपुर अब राज्य की सबसे प्रतीकात्मक राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में है.

दांव पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी दोनों की साख है. कौन जीतेगा, कौन हारेगा, इसका फैसला 4 मई को होगा, क्योंकि 23 और 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में 2 चरणों में वोटिंग के बाद उसी दिन मतगणना होगा. भवानीपुर विधानसभा सीट पर 29 अप्रैल को मतदान होगा. ममता बनर्जी बनाम भाजपा चुनाव विजेता प्रतिद्वंद्वी अंतर नंदीग्राम 2021 शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी 1,956 भवानीपुर उपचुनाव 2021 ममता बनर्जी प्रियंका टिबरेवाल 58,835 भवानीपुर 2026 ? ? सीधी जंग चुनाव कार्यक्रम अधिसूचना जारी करने की तारीख 02.04.2026 नामांकन की अंतिम तारीख 09.04.2026 नामांकन पत्रों की जांच की तारीख 10.04.2026 नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 13.04.2026 वोटिंग की तारीख 29.04.2026 काउंटिंग की तारीख 04.05.2026 चुनाव की प्रक्रिया हो जायेगी पूरी 06.05.2026 इसे भी पढ़ें बंगाल चुनाव 2026: भवानीपुर समेत 142 विधानसभा सीटों पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण में होगी वोटिंग बंगाल चुनाव 2026: चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा शेड्यूल, देखें आपकी विधानसभा सीट पर कब होगा मतदान विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल की इन 294 सीटों पर होगी वोटिंग, एक-एक सीट का नाम यहां देखें बंगाल चुनाव 2026 का ऐलान : जानिए कब पड़ेगा वोट और किस दिन आएगा रिजल्ट.

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