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मंत्री भी, लाभार्थी भी! केंद्रीय मंत्री को अपने ही मंत्रालय की स्कीम से मिली 99 लाख की मदद

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Prabhat Khabar 27 जून 2026, 09:07 am
मंत्री भी, लाभार्थी भी! केंद्रीय मंत्री को अपने ही मंत्रालय की स्कीम से मिली 99 लाख की मदद

राजस्थान के बीचों-बीच फैले एक बड़े फार्म में ऊंची पत्थर की दीवारें और कांटेदार तार लगे हैं. यहां बाग, कृत्रिम तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस बने हुए हैं. फार्म पर लगे एक बोर्ड पर साफ लिखा है कि इस परियोजना को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से सहायता मिली है.

फार्म पर लगे बोर्ड के मुताबिक, इस परियोजना के लाभार्थी भागीरथ चौधरी हैं. बोर्ड पर यह भी लिखा है कि उन्हें राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत 50 प्रतिशत यानी 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है. लेकिन इस बोर्ड पर एक अहम बात का जिक्र नहीं है. इसमें यह नहीं बताया गया कि लाभार्थी भागीरथ चौधरी सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार में कृषि राज्य मंत्री भी हैं.

इस संबंध में द इंडियन एक्सप्रेस ने खबर प्रकाशित की है जिसके बाद सवाल उठने लगे हैं. तीन महीने पहले 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिली केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को तीन महीने पहले 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिली थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह सब्सिडी उसी मंत्रालय की एक योजना के तहत दी गई, जिसमें वह मंत्री हैं. इतना ही नहीं, जिस बोर्ड ने इस परियोजना को मंजूरी दी, उसके पदेन उपाध्यक्ष भी भागीरथ चौधरी ही हैं. यही बात अब विवाद की वजह बन गई है. यह योजना बड़े पैमाने पर सब्जियों और फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी.

इसे मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत 2014-15 में लॉन्च किया गया था. इस योजना का संचालन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) करता है, जो कृषि मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है. मंत्रालय फिलहाल भागीरथ चौधरी के जिम्मे है. भागीरथ चौधरी NHB बोर्ड के हैं उपाध्यक्ष राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की वेबसाइट के मुताबिक, इसकी गतिविधियों का संचालन एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स करता है.

इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष केंद्रीय कृषि मंत्री होते हैं, जबकि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं. ऐसे में भागीरथ चौधरी इस बोर्ड के उपाध्यक्ष भी हैं. NHB की वेबसाइट पर पदेन उपाध्यक्ष के तौर पर सिर्फ “कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री” का पद लिखा है.

हालांकि, संपर्क के लिए जो ईमेल दिए गए हैं, वे सीधे भागीरथ चौधरी से जुड़े बताए गए हैं. इनमें एक सरकारी ईमेल आईडी और एक जीमेल पता शामिल है. इससे यह स्पष्ट होता है कि बोर्ड में उपाध्यक्ष की भूमिका फिलहाल भागीरथ चौधरी ही निभा रहे हैं. सब्सिडी प्रस्तावों पर फैसला कौन लेता है? राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अन्य सदस्यों में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक और बागवानी क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी व उद्योग प्रतिनिधि शामिल हैं.

यही बोर्ड विभिन्न परियोजनाओं और सब्सिडी प्रस्तावों पर फैसला लेता है. कागजों के आधार पर रिपोर्ट में बताया गया है कि इस योजना के तहत सब्सिडी वाली परियोजनाओं को मंजूरी देने में कृषि राज्य मंत्री की कोई सीधी भूमिका नहीं होती. अंतिम मंजूरी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की परियोजना अनुमोदन समिति देती है.

इस समिति में बोर्ड के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते. ऐसे में तकनीकी रूप से परियोजना की स्वीकृति प्रक्रिया में मंत्री की सीधी भागीदारी नहीं मानी जाती. इस मामले पर जवाब लेने के लिए द इंडियन एक्सप्रेस ने भागीरथ चौधरी को सवालों की एक सूची भेजी थी.

उनसे पूछा गया था कि क्या अपने ही मंत्रालय की योजना के तहत सब्सिडी लेना हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का मामला माना जा सकता है. खबर प्रकाशित होने तक भागीरथ चौधरी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी..

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