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बंगाल में महामुकाबले के बाद अब 4 मई का इंतजार, ममता बनर्जी लगायेंगी जीत का चौका या खिलेगा कमल?

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Prabhat Khabar 01 मई 2026, 06:39 am
बंगाल में महामुकाबले के बाद अब 4 मई का इंतजार, ममता बनर्जी लगायेंगी जीत का चौका या खिलेगा कमल?

खास बातें रिकॉर्डतोड़ वोटिंग, 2011 का महा-कीर्तिमान भी ध्वस्त टूटा 2011 का रिकॉर्ड ममता बनर्जी की साख दांव पर, ‘अग्निपरीक्षा’ का समय भाजपा की उम्मीद- ‘अधूरा मिशन’ पूरा करने की तैयारी सुरक्षा का अभेद्य घेरा, QR कोड और कड़ी निगरानी West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के 46 दिनों तक चला तीखा राजनीतिक संघर्ष बुधवार को रिकॉर्ड मतदान के साथ थम गया.

अब सबकी नजरें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं. यह चुनाव महज सत्ता की जंग नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 वर्षों के वर्चस्व और भाजपा के ‘अधूरे वैचारिक मिशन’ के बीच का सबसे बड़ा फैसला साबित होने वाला है. आजादी के बाद के अब तक के सबसे अधिक मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है.

रिकॉर्डतोड़ वोटिंग, 2011 का महा-कीर्तिमान भी ध्वस्त निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार बंगाल ने मतदान के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं. दो चरणों में हुए इस चुनाव में कुल 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है. पहले चरण में 93.19 फीसदी और दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

टूटा 2011 का रिकॉर्ड इससे पहले साल वर्ष 2011 में सर्वाधिक 84.72 प्रतिशथ मतदान हुआ था. तब ममता बनर्जी ने 34 साल पुराने वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका था. इस बार की ‘लोकतंत्र की सुनामी’ किसके पक्ष में जायेगी, यह बड़ा सवाल है. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ममता बनर्जी की साख दांव पर, ‘अग्निपरीक्षा’ का समय लगातार तीन कार्यकाल के बाद ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन की सबसे निर्णायक लड़ाई है.

यदि दीदी चौथी बार जीतती हैं, तो वह 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरेंगी. इस बार उन्हें सत्ताविरोधी लहर, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप और भर्ती घोटालों जैसे कड़े सवालों के बीच अपनी ‘बंगाली अस्मिता’ की रक्षा करनी है. टीएमसी को भरोसा है कि उनकी ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर भारी पड़ेंगी.

इसे भी पढ़ें : बंगाल ने तोड़ दिये वोटिंग के सारे रिकॉर्ड, दूसरे चरण में 91.66 फीसदी मतदान, महिलाओं ने फिर गाड़े झंडे भाजपा की उम्मीद- ‘अधूरा मिशन’ पूरा करने की तैयारी भाजपा के लिए बंगाल अब भी वह वैचारिक मोर्चा है, जिसे जीतना उनके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है.

वर्ष 2011 में महज 4 प्रतिशत वोट शेयर से शुरू हुई यात्रा वर्ष 2021 में 77 सीटों तक पहुंच चुकी है. भाजपा ने इस बार भ्रष्टाचार और मतदाता सूची में सुधार (SIR) को बड़ा मुद्दा बनाया. भाजपा इसे फर्जी नाम’ हटाने की प्रक्रिया बता रही है, तो टीएमसी ने 91 लाख नाम हटाये जाने को गरीबों के खिलाफ साजिश करार दिया है.

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इस बार काउंटिंग सेंटर्स पर QR कोड आधारित फोटो पहचान पत्र अनिवार्य किये गये हैं, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति प्रवेश न कर सके. 4 मई को होने वाली मतगणना के लिए थ्री-टियर सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. ममता बनर्जी का किला बरकरार रहेगा या भाजपा बंगाल की सत्ता में पहली बार कदम रखेगी? इसका फैसला सोमवार (4 मई) को ईवीएम खुलने के साथ ही हो जायेगा.

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