SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बंगाल से ज्यादा नाम कटने वाले राज्यों में नहीं हुआ मुकदमा
Supreme Court SIR Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हो रही समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि मतदाता सूची समीक्षा का यह काम दूसरे राज्यों में बिना किसी खास विवाद के हो गया. सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस के वकीलों ने बड़ी संख्या में दावों का निपटारा बाकी होने की दलील दी और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की तारीख बढ़ाने की मांग की.
कोर्ट ने कहा कि वह इस पर बाद में विचार करेगा. 45 दिन में 60 लाख केस के निबटारे का लीगल ऑफिसर पर दबाव प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई.
क्या आपको इसका अहसास है? हमने न्यायिक अधिकारियों पर 45 दिनों के भीतर 60 लाख मामलों का निपटारा करने का दबाव डाला है. इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वकील श्याम दीवान ने वोटिंग से 7 दिन पहले मतदाता सूची को फ्रीज करने का सुझाव दिया. अब इस मामले की सुनवाई एक अप्रैल को होगी.
6 अप्रैल से पहले वोटर लिस्ट दुरुस्त करने की मांग ममता बनर्जी की तरफ से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने दलील दी कि पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अप्रैल है. दूसरे चरण के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 9 अप्रैल है. नियम के मुताबिक, नामांकन की अंतिम तारीख के बाद मतदाता सूची में बदलाव संभव नहीं होता.
उन्होंने कहा कि अभी भी लाखों लोगों के दावों का निपटारा लंबित है, इसलिए मतदान से एक सप्ताह पहले तक सूची को दुरुस्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए. बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें लंबित वोटर को भी मिले मतदान का अधिकार दीवान ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के दावे लंबित हैं, उन्हें भी मतदान का अधिकार दिया जाये, क्योंकि उनके नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल थे.
इस पर बेंच के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुझाव दिया कि जिन सीटों पर 6 अप्रैल को नामांकन की समयसीमा समाप्त हो रही है, वहां से जुड़े दावों का पहले निपटारा किया जाना चाहिए. एसआईआर पर बंगाल में भी समस्या अधिक है – चीफ जस्टिस इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पश्चिम बंगाल में ही अधिक समस्याएं सामने आ रही हैं, जबकि कई राज्यों में बंगाल की तुलना में अधिक नाम मतदाता सूची से हटाये गये हैं.
चुनाव आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने बताया कि पूरी प्रक्रिया में कई व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं. उन्होंने उन कठिनाइयों का ब्योरा देते हुए एक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी है. नायडू ने अनुरोध किया कि अगली सुनवाई से पहले जज इस रिपोर्ट को देखें.
7 दिन पहले वोटर लिस्ट को फ्रीज करने पर विचार संभव उन्होंने कहा कि चुनाव कार्यक्रम को देखते हुए इन मामलों का निपटारा आसान नहीं है, इसलिए कोर्ट वोटिंग की तारीख से 7 दिन पहले वोटर लिस्ट को ‘फ्रीज’ (स्थगित) करने पर विचार कर सकता है. इस दौरान सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने बताया कि अभी पूरी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं हुई है.
राजनीतिक पार्टियों को इसकी एक सॉफ्ट कॉपी दी जा सकती है. इस पर भी विचार किया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि इस बारे में 5-6 राजनीतिक पार्टियां एडजुडिकेटिंग ऑफिसर से अनुरोध कर सकती हैं. बिना छुट्टी लिये लगातार काम कर रहे हैं निचली अदालतों के जज सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े दावों और आपत्तियों की सुनवाई न्यायिक अधिकारी (निचली अदालत के जज) कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट कलकत्ता हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस से इस काम में हो रही प्रगति का ब्योरा भी ले रहा है. मंगलवार, 24 मार्च को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगातार हो रहे विवाद को देखते हुए उसने न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर का जिम्मा सौंपा. यह अधिकारी बिना छुट्टी लिये लगातार काम कर रहे हैं.
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