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भोजशाला मामले पर कोर्ट के फैसले से 'खफा' ओवैसी, बाबरी का जिक्र करते हुए कही ये बात

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Prabhat Khabar 16 मई 2026, 08:32 am
भोजशाला मामले पर कोर्ट के फैसले से 'खफा' ओवैसी, बाबरी का जिक्र करते हुए कही ये बात

Bhojshala Temple: शुक्रवार को मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर को लेकर इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. 24 दिन तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने 15 मई के अपने फैसले में इस परिसर को हिंदू मंदिर माना. हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस आदेश की कड़ी आलोचना की और दावा किया कि यह फैसला भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है.

शुक्रवार को हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि यह फैसला बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद के कानूनी रास्ते की ही तरह प्रतीत होता है. उन्होंने कहा, ‘यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है. बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद में दिए गए फैसले में एक धर्म को प्राथमिकता दी गई, जबकि दूसरे समुदाय के पूजा के अधिकारों को प्रभावी रूप से कमजोर किया गया.

इसके अलावा, इस फैसले ने कई नए विवादों के लिए रास्ता खोल दिया है. कल कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक स्थल की पवित्रता को चुनौती देने के लिए सामने आ सकता है.’ ओवैसी ने न्यायपालिका के रुख में विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले बाबरी मस्जिद मामले में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को संविधान की ‘बेसिक स्ट्रक्चर’ से जोड़ा था, लेकिन अब उसी सिद्धांत को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है.

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का मजाक बना दिया गया है.’ बाबरी मस्जिद केस जैसा साबित हुआ यह फैसला- ओवैसी बाबरी मस्जिद मामले से सीधी तुलना करते हुए ओवैसी ने कहा, ‘यह फैसला बिल्कुल बाबरी मस्जिद मामले जैसा साबित हुआ है. बाबरी मस्जिद केस में अदालत ने कहा था कि मुसलमानों का उस स्थल पर कब्जा नहीं था.

लेकिन इस मामले में आज तक मेरे पास कब्जा था.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने पहले भी कहा था कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर दिया गया फैसला गलत था और केवल आस्था के आधार पर दिया गया था. मैंने चेतावनी दी थी कि उस समय दिया गया फैसला आगे चलकर ऐसे कई विवादों का रास्ता खोलेगा.

उस समय बहुत से लोगों ने मुझसे कहा था कि चुप रहो. आज देखिए क्या हो रहा है. जिस फैसले को मैंने उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए कहा था कि इससे ऐसे कई घटनाक्रम सामने आएंगे, अब वही हो रहा है और वही राहत दी जा रही है.’ वीडियो में देखें असदुद्दीन ओवैसी का पूरा बयान.

#WATCH | Hyderabad, Telangana | On the Bhojshala case, AIMIM President Asaduddin Owaisi says, "This judgment has turned out to be exactly like the Babri Masjid case. In the Babri Masjid case, the court had stated that the Muslims did not have possession of the site.

But in this… pic.twitter.com/7mAR9PnmIy — ANI (@ANI) May 15, 2026 महली बोले- अयोध्या मामले से अलग भोजशाला फैसला इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय में निराशा जरूर है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट अभी भी कानूनी लड़ाई के लिए खुला मंच है.

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को बाबरी मस्जिद केस से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘भोजशाला मामले में हाई कोर्ट के फैसले से मुसलमानों में गहरी निराशा हुई है, क्योंकि आज ही नहीं बल्कि सदियों से वहां स्थित मस्जिद में मुसलमान नमाज अदा करते आ रहे हैं.

हालांकि, यह हाई कोर्ट का फैसला है और मुसलमानों के लिए सुप्रीम कोर्ट का रास्ता अभी खुला है.’ उन्होंने कहा, ‘अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इस मामले में संदर्भ जरूर लिया गया है. लेकिन अयोध्या मामला पूरी तरह अलग था और वर्तमान मामला भी अलग है.

इसलिए हम दोनों मामलों के बीच कोई संबंध नहीं देखते. जहां तक कानूनी पहलुओं का सवाल है और मुस्लिम समुदाय के पास जो ऐतिहासिक दस्तावेज एवं सबूत हैं, उनके आधार पर हमें विश्वास है कि इंशाअल्लाह सुप्रीम कोर्ट में हमें सफलता मिलेगी.’ ये भी पढ़ें:- NEET पेपर लीक केस: मास्टरमाइंड गिरफ्तार! सीबीआई जांच में पूरे रैकेट का भंडाफोड़ ये भी पढ़ें:- हैदराबाद के विधायक ने PM मोदी से की अपील: राम मंदिर की तरह भोजशाला मंदिर भी बनवाएं कोर्ट ने हिंदू पक्ष को दिया पूजा का अधिकार मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया और परिसर को राजा भोज से संबंधित माना.

हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले को ‘ऐतिहासिक’ बताया और कहा कि अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है. जैन ने कहा कि अदालत ने हमें पूजा-अर्चना का अधिकार दिया है और सरकार को स्थल के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है.

ASI का वह पुराना आदेश, जिसमें नमाज की अनुमति दी गई थी, पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है. अब वहां केवल हिंदू पूजा ही होगी..

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