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6th Gen फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल होगा भारत, लेकिन दो ग्रुप में फंसा, जानें इनकी खासियत और IAF की चुनौती

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Prabhat Khabar 21 मार्च 2026, 07:22 am
6th Gen फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल होगा भारत, लेकिन दो ग्रुप में फंसा, जानें इनकी खासियत और IAF की चुनौती
India 6th Gen Fighter Jet Program: भारत अब यूरोप में विकसित हो रहे महत्वाकांक्षी ‘छठी पीढ़ी’ (सिक्स्थ जेनरेशन) के फाइटर जेट कार्यक्रमों में शामिल होने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. पहली बार आधिकारिक तौर पर यह बात सामने आई है कि भारतीय वायुसेना (IAF) अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट के साथ-साथ किसी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की भी संभावनाएं तलाश रही है. यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने संसद की स्थायी रक्षा समिति को दी है. संसदीय रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में लड़ाकू विमानों की तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, इसलिए भारत को भी अपनी वायु शक्ति को आधुनिक बनाने की जरूरत है. समिति ने रक्षा मंत्रालय से साफ रोडमैप तैयार करने को कहा है, ताकि भविष्य के युद्धों में भारत की हवाई ताकत मजबूत बनी रहे. रिपोर्ट में बताया गया है कि IAF यूरोप के दो बड़े कंसोर्टियम में से किसी एक के साथ जुड़ने पर विचार कर रही है. पहला है ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP), जिसमें यूनाइटेड किंगडम, इटली और जापान शामिल हैं. दूसरा है फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS), जिसे फ्रांस, जर्मनी और स्पेन मिलकर विकसित कर रहे हैं. भारतीय वायुसेना का उद्देश्य इनमें से किसी एक के साथ साझेदारी कर उन्नत फाइटर जेट तकनीक तक पहुंच बनाना है, ताकि वह वैश्विक दौड़ में पीछे न रह जाए. चीन-पाकिस्तान का गठबंधन भारत की चिंता भारत के इस कदम के पीछे एक बड़ी वजह चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य ताकत भी है. चीन पहले ही J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर तैनात कर चुका है और J-35 जैसे स्टेल्थ जेट विकसित कर रहा है. पाकिस्तान भी ऐसे करीब 40 जेट खरीदने की योजना बना रहा है. इसके अलावा, चीन J-36 और J-50 जैसे छठी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म का परीक्षण कर चुका है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर दबाव बढ़ रहा है. वहीं, अमेरिका अपने बोइंग F-47 पर काम कर रहा है. इसके साथ ही अमेरिका B-21 Raider बॉम्बर पर भी काम कर रहा है. किस ग्रुप को जॉइन कर सकता है भारत? जहां GCAP कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 के दशक के मध्य तक दुनिया का पहला ऑपरेशनल छठी पीढ़ी का फाइटर जेट तैयार करना है. वहीं FCAS भी लगभग इसी समयसीमा पर काम कर रहा है, हालांकि इसमें शामिल देशों के बीच औद्योगिक मतभेदों के कारण ही कुछ देरी हुई है. इन दोनों परियोजनाओं का मकसद ऐसे आधुनिक फाइटर जेट बनाना है, जो मानवरहित ड्रोन के साथ मिलकर काम करें और एक डिजिटल नेटवर्क (कॉम्बैट क्लाउड) के जरिए कई प्लेटफॉर्म को जोड़ सकें. भारत पहले ही राफेल लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर चुका है और 114 अतिरिक्त राफेल खरीदने की योजना भी है. इसी वजह से फ्रांस भारत को FCAS कार्यक्रम में शामिल हो सकता है, ताकि उसके भविष्य के जहाज पुराने वालों के साथ इंटीग्रेट हो सकें. वैसे, FCAS जिस लड़ाकू विमान पर काम कर रहा है, उसे ‘न्यू जेनरेशन फाइटर’ (NGF) नाम दिया गया है. पांचवीं पीढ़ी से कितना अलग होगा सिक्स्थ जेनरेशन फाइटर जेट? छठी पीढ़ी के फाइटर जेट मौजूदा स्टेल्थ विमानों जैसे F-22, F-35 या J-20 से भी आगे की तकनीक का प्रतिनिधित्व करते हैं. जहां पांचवीं पीढ़ी के जेट स्टेल्थ और नेटवर्क आधारित युद्ध पर ध्यान देते हैं, वहीं छठी पीढ़ी के जेट ‘सिस्टम ऑफ सिस्टम्स’ के रूप में काम करेंगे. ये ड्रोन के झुंड को नियंत्रित करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से निर्णय लेने और उन्नत सेंसर व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का उपयोग करने में सक्षम होंगे. इनमें एडवांस इंजन, लेजर जैसे हथियार और बेहद कम दिखाई देने वाली तकनीक भी शामिल होगी. इसके साथ ही इन्हें मानवरहित बनाने और सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक हथियारों से भी लैस करने पर काम चल रहा है. बदलते युद्ध हालातों से नई तकनीक आई सामने हाल के युद्धों से भी यह साफ हुआ है कि भविष्य का युद्ध कैसा होगा. रूस-यू्क्रेन युद्ध, भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 का चार दिनी तनाव और ईरान युद्ध से जुड़े संघर्षों ने दिखाया है कि स्टेल्थ तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और ड्रोन सिस्टम कितने अहम हो चुके हैं. कम लागत वाले ड्रोन भी महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं, जबकि उन्नत स्टेल्थ विमान दुश्मन के इलाके में घुसकर जानकारी जुटाने और हमलों का समन्वय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. ऐसे हालात में छठी पीढ़ी के फाइटर जेट भविष्य के जटिल युद्धक्षेत्र के लिए जरूरी माने जा रहे हैं, जहां मजबूत एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक हमले और स्वायत्त सिस्टम एक साथ काम करेंगे. ये भी पढ़ें:- ‘अगर ईरान से इतना प्यार है, तो वहां चले जाओ’, शिया मौलानाओं पर भड़के आसिम मुनीर, मचा बवाल भारत की चुनौती क्या है? हालांकि, इस दिशा में भारत के सामने एक और चुनौती है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, IAF की स्वीकृत क्षमता 42 फाइटर स्क्वाड्रन की है, लेकिन फिलहाल केवल 31 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं. ऐसे में नए फाइटर जेट्स की जरूरत और भी बढ़ जाती है. भारत पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्लेन को अपने बेड़े में शामिल नहीं कर पाया है. भारत के पास अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57/75 का विकल्प है, लेकिन भारत ने पहले ही राफेल जेट्स (आमतौर पर 4.5 जेनरेशन का माना जाता है) की अच्छी खासी संख्या को शामिल कर लिया है. ऐसे में वह पांचवीं पीढ़ी के एयरक्राफ्ट की जगह, अब सीधे सिक्स्थ जेनरेशन पर जंप करना चाहता है और इसमें पीछे भी नहीं होना चाहता. रिपोर्ट से यह भी साफ है कि AMCA प्रोजेक्ट भारत की प्राथमिकता बना हुआ है, लेकिन इसके साथ-साथ भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगे की योजना भी बनाई जा रही है. भारत अभी अपने तेजस Mk1A जैसे चौथी पीढ़ी के विमानों की डिलीवरी सुनिश्चित करने में लगा है, वहीं AMCA को अगले दशक (2035) तक ऑपरेशनल बनाने की दिशा में काम तेज किया जा रहा है. ये भी पढ़ें:- ईरान ने डिएगो गार्सिया में US बेस पर किया हमला, करीब 4000 किमी दूर हिंद महासागर में दागी मिसाइल भविष्य की तैयारी में जुटा है भारत इसके अलावा, भारतीय वायुसेना LCA Mk2 और AMCA जैसे प्रोजेक्ट्स में सक्रिय रूप से शामिल है. AH-64 Apache, HAL Prachand और HAL Dhruv Mk4 जैसे कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पहले से सेवा में हैं. BrahMos जैसी मिसाइलें, आधुनिक हथियार और अंतरिक्ष आधारित सिस्टम भी भारत की सैन्य ताकत को लगातार मजबूत कर रहे हैं. कुल मिलाकर, भारत अब सिर्फ मौजूदा जरूरतों को ही नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए अपनी वायु शक्ति को नई दिशा देने की तैयारी कर रहा है..
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