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मसाला फसलों के उत्पादन में हम अव्वल, उद्यानिकी फसलों के रकबे का करें विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव | किसानों की आय वृद्धि का बड़ा जरिया हैं उद्यानिकी फसलें मध्यप्रदेश फूल-सब्जी की पैदावार में देश में तीसरे और फलोत्पादन में है चौथे स्थान पर फूलों की खेती

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MP Info 29 अप्रैल 2026, 05:15 pm
मसाला फसलों के उत्पादन में हम अव्वल, उद्यानिकी फसलों के रकबे का करें विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव | किसानों की आय वृद्धि का बड़ा जरिया हैं उद्यानिकी फसलें मध्यप्रदेश फूल-सब्जी की पैदावार में देश में तीसरे और फलोत्पादन में है चौथे स्थान पर फूलों की खेती

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उद्यानिकी फसलें छोटी जगह से बड़ी कमाई करने का प्रभावी माध्यम है। प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को इससे जोड़ा जाये। किसानों को सीज़नल और उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के लिए प्राकृतिक खाद का उपयोग कर जैविक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। उद्यानिकी फसलों के माध्यम से किसानों की वास्तविक आय बढ़ाई जाए। किसानों की आय वृद्धि और उनके जीवन में खुशहाली लाने के लिये योजनाबद्ध तरीके से उद्यानिकी फसलों और इनके जोत रकबे का साल-दर-साल विस्तार किया जाए।

उन्होंने कहा कि हमारी उद्यानिकी एवं मसाला फसलों की अंतर्राष्ट्रीय मांग बढ़ रही है। इसकी पूर्ति के लिए बाजार तलाशें, उद्यानिकी उत्पादों की भरपूर ब्रांडिग करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यहां औषधीय गुणों से भरपूर फसलों की खेती भी बहुतायत में की जाती है।

इनकी बड़ी संभावनाएँ है। औषधि निर्माण के लिए जरूरी इन फसलों की इन्टरनेशनल मार्केट में मांग अनुसार आपूर्ति के लिए पूरी सप्लाई चेन तैयार की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में हर साल नये-नये आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल खोले जा रहे हैं।

इनमें देशी/आयुर्वेदिक दवाईयों की आपूर्ति में प्रदेश की औषधीय फसलों एवं उप-उत्पादों का भरपूर उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि मसाला फसलों के उत्पादन में हम पूरे देश में पहले स्थान पर है। यह उपलब्धि हमें इस क्षेत्र में और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मंत्रालय में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में विभागीय संचालित योजनाओं की प्रगति और हितग्राहियों को लाभ प्रदाय पर गहन चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ - 2028 के मद्देनजर उज्जैन में फूलों की खेती को प्रोत्साहन एवं विस्तार किया जा रहा है।

इसके लिए उज्जैन में सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है। सेंटर स्थापना के लिए उज्जैन शहर के पास एक गांव में 19 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर समुचित समन्वय भी किया जा रहा है। दुनिया में मिलेगी मप्र की उद्यानिकी फसलों को पहचान बैठक में बताया गया गया कि वर्ष 2030 तक उद्यानिकी क्षेत्र का रकबा 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा।

बागवानी फसलों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिएप्रदेश में हॉर्टिकल्चर प्रमोशन एजेंसी की स्थापना करने की कार्रवाई जारी है। मध्यप्रदेश के उद्यानिकी उत्पादों को दुनिया में पहचाना जाएगा। इसके लिए जी आई टैग दिलवाने की प्रक्रिया जारी है। विशेष रूप से जबलपुरी मटर, गुना का कुंभराज धनिया, बुरहानपुर का केला, रतलाम का रियावन लहसुन, खरगोन की मिर्च, इंदौर का मालवी आलू, बरमन भटा, छतरपुर का पान जैसे उद्यानिकी उत्पादों को जल्दी ही विशिष्ट भौगोलिक पहचान मिल जाएगी।

मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का उत्पादन एवं देश में स्थान क्रं उद्यानिकी फसल/उत्पादन का नाम देश में कुल उत्पादन मप्र में कुल उत्पादऩ देश में स्थान 1. मसाला फसलें 129.52 लाख मी. टन 57.72 लाख मी. टन पहला 2. पुष्प उत्पादन 32.26 लाख मी. टन 4.88 लाख मी. टन तीसरा 3. सब्जी उत्पादन 2177.96 लाख मी. टन 259.52 लाख मी. टन तीसरा 4. फल उत्पादन 1176.48 लाख मी. टन 102.44 लाख मी. टन चौथा मध्यप्रदेश में हो रही मखाना की खेती, इस साल और बढ़ाएंगे रकबा बैठक में बताया गया कि प्रदेश में मखाना की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मखाना क्षेत्र विस्तार योजना के तहत प्रदेश के 14 जिलों यथा नर्मदापुरम, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, रीवा, शहडोल, रायसेन, अनूपपुर, पन्ना एवं सतना में मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। मखाना उत्पादन का रकबा इस वर्ष बढ़ाकर 85.00 हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्र सरकार द्वारा मखाना उत्पादन की कुल परियोजना लागत (एक इकाई) पर 40 प्रतिशत तक की अनुदान सहायता दी जाती है। जून में भोपाल में होगा आम महोत्सव बैठक में बताया गया कि प्रदेश में इसी वर्ष जून माह में भोपाल में आम महोत्सव, जुलाई में खरगौन में मिर्च महोत्सव, सितम्बर में बुरहानपुर में केला महोत्सव, अक्टूबर में इंदौर में सब्जी महोत्सव, नवम्बर में ग्वालियर में अमरूद महोत्सव मनाया जाएगा।

साथ ही दिसंबर में ग्वालियर में मधुमक्खी पालन व्यवसाय के प्रोत्साहन एवं जागरूकता के लिए एक कार्यशाला/सेमिनार भी आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को संतरा महोत्सव भी आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम महोत्सव के दौरान प्रदेश के सभी 10 संभागों में आम के 10 बाग लगाने के प्रयास किए जाएं।

केला महोत्सव में केले के तने से रेशे बनाने वाले उद्यमियों/उद्योगपतियों को जोड़ा जाये। सब्जी महोत्सव के दौरान नागरिकों को अपने घरों में किचन गार्डन लगाने के लिए जागरूक एवं प्रोत्साहित किया जाए। 40 नर्सरियां हो रहीं हाईटेक बैठक में बताया गया कि प्रदेश में प्रेसराईज इरीगेशन वाले जिलों में 15 हज़ार हैक्टेयर रकबे में सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र का विस्तार भी किया जा रहा है।

दो स्मार्ट बीज फार्म का विकास, सागर में झिला फार्म एवं देवास में कन्नौद फार्म विकसित किया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग के अधीन 40 नर्सरियों का उन्नयन कर इन्हें पूरी तरह से हाईटेक किया जा रहा है। धार जिले के बदनावर के समीप रूपाखेड़ा गांव में युवाओं द्वारा फूलों की खेती की जा रही है।

यह गांव मध्यप्रदेश में स्विट्जरलैंड के किसी गांव की तरह फूलों की खेती में विशेष पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां उद्यानिकी फसलों के लिए बेहद अनुकूल हैं, इसका पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वे क्षेत्रवार विशेष फसलों की पहचान कर किसानों को उनकी खेती के लिए प्रोत्साहित करें। उद्यानिकी फसलों के रकबे में तेजी से वृद्धि के लिए किसानों को जोड़कर एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जाए। साथ ही किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं और बाजार उपलब्ध कराने के लिए कृषि एवं उद्यानिकी से सम्बद्ध विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उद्यानिकी क्षेत्र में ठोस और परिणामोन्मुखी कदम उठाए जाएं। पारम्परिक खेती के साथ-साथ किसानों को फल, फूल, सब्जी, मसाला, औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी फसलों से जोड़ना जरूरी है, जो उन्हें त्वरित और अधिक नकद आय प्रदान कर सकें। खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए किसानों को जोड़कर सभी उपाय किये जायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाकर इन्हें और प्रभावी बनायें।

योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। सरकार की योजनाओं का लाभ पाने के लिए किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई न होने पाए। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यानिकी फसलों एवं इनके उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर किसानों को बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास से किसानों की आय भी बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दिशा में छोटे-छोटे स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना ही हमारी प्राथमिकता है।

इसके लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे। राज्य सरकार कृषि को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण से हम किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की ओर बढ़ेंगे। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।

उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों को विभागीय अनुदान योजनाओं की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक खेती-बाड़ी के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। बैठक में सामाजिक न्याय, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री आलोक कुमार सिंह, संचालक उद्यानिकी तथा अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

Source:MP Info
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