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बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाएं और जन-कल्याण के लिए 24 हजार 200 करोड़ रूपये की स्वीकृति | मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति के प्रस्ताव पर उप समिति गठित रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों

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MP Info 16 जून 2026, 04:55 pm
बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाएं और जन-कल्याण के लिए 24 हजार 200 करोड़ रूपये की स्वीकृति | मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति के प्रस्ताव पर उप समिति गठित रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण को बड़ी रफ्तार देते हुए कुल 24,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण सहित कुल 19,472 करोड़ 29 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया गया।

राज्य में विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने और परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 'मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026 लागू करने के प्रस्ताव पर मंत्रि-परिषद ने 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति का गठन किया है।

समिति सभी संबंधित पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी। मंत्रि-परिषद ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर चलाने का पायलट प्रोजेक्ट भी मंजूर किया गया। वन्य-प्राणी संरक्षण और संवेदनशील क्षेत्रों के 94 गांवों के विस्थापन व मुआवजे के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि 2026-2031 के तहत 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रुपये आवंटित किए हैं।

सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देते हुए जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक व आवासीय सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रुपये और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से रेशम उत्पादन की विभिन्न योजनाओं के लिए 639 करोड़ 25 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। मंत्रि-परिषद द्वारा श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन,औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिक कल्याण योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रुपये तथा स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन व ऑडिट व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन के लिए 492 करोड़ 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

यह सभी निर्णय आगामी पांच वर्षों में मध्यप्रदेश के समग्र, समावेशी और सतत विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी पहल है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की मूल लागत 7 हजार 500.80करोड़रूपये में 5 हजार 388.58 करोड़ रूपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889.38 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है।

इसके अतिरिक्त उ‌द्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6 हजार 582.91 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस तरह कुल 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

अतिरिक्त वित्त पोषण में भारत शासन और मध्यप्रदेश शासन द्वारा 1,696 करोड़ 74 लाख रूपये की अतिरिक्त इक्विटी और केन्द्रीय करों के लिए 214 करोड़ 64 लाख रूपये का अतिरिक्त अधीनस्थ ऋण, वित्त पोषण एजेंसी बैंकों से ऋण निधि के विरुद्ध 3,496 करोड़ 15 लाख रूपये का अतिरिक्त पीटीए/आंतरिक ऋण, मध्यप्रदेश शासन से राज्य करों के लिए 656 करोड़ 96 लाख रूपये एवं आईडीसीकी लागत के लिए 518 करोड़ 42 लाख रूपये का अतिरिक्त ऋण शामिल है।

प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वन विभाग के अंतर्गत प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के सोलहवें केन्द्रीय वित आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए कुल 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।

स्वीकृति अनुसार प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (नॉन-रिकरिंग), प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (रिकरिंग) और प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (प्रोजेक्ट एलिफेंट) के लिए एक हजार 131 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन तीनों योजनाओं से वन्यप्राणी संरक्षण के वैज्ञानिक सिद्धान्तों के आधार पर बनाई गई प्रबंध योजना का क्रियान्वयन किया जाना है, जिसमें मुख्यतः प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्त्रोतों का विकास, वन मार्गो का रखरखाव आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं उनका रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैम्प निर्माण, दवाईयां क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था आदि कार्य किए जायेंगे।

ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के लिए एक हजार 250 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्य-प्राणियों के संवेदनशील आवास स्थलों को एवं वन्य-प्राणियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहे ग्रामों को संरक्षित वन क्षेत्र के बाहर पुनर्वसित करना है।

इसमें ग्रामीणों के अचल सम्पत्ति का विधि अनुसार अधिग्रहण कर निर्धारित मुआवजा का भुगतान किया जाता है। योजना का क्रियान्वयन संजय टाइगर रिजर्व, सतपुडा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों में किया जायेगा।

श्रमिक कल्याण से संबंधित योजनाओं के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा श्रमिक कल्याण से संबंधित श्रम विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

स्वीकृति अनुसार श्रम आयुक्त कार्यालय के संचालन के लिए 57 करोड़ 48 लाख, श्रम कानूनों के कार्यान्वयन के लिए अमला के लिए 289 करोड़ 89 लाख, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए 75 करोड़ 52 लाख, विभागीय परिसंपति के लिए 1 करोड़ 20 लाख, श्रम कल्याण निधि की स्थापना के लिए 95 करोड़, इंदौर में स्थित हायजिन लैब का आधुनिकीकरण के लिए 0.60 करोड़, बाल श्रमिक सर्वेक्षण/पूनर्वास योजना के लिए 4 करोड, बंधक मजदूरों की पुनर्वास योजना के लिए 4 करोड़, नेशनल डेटाबेस अंसगठित श्रमिक के लिए एक करोड़ 25 लाख, प्रवासी श्रमिक आयोग के लिए 0.05 करोड़, असंगठित शहरी/ग्रामीण कर्मकार मंडल की स्थापना के लिए 0.0005 करोड़, मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए 0.0005 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

इसी के साथ पूंजीगत मद की विद्यमान योजना श्रम आयुक्त के लिए 1 करोड़ 9 लाख, श्रम कानूनों के कार्यन्वयन के लिए अमला के लिए 0.67 करोड़, औ‌द्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए 0.22 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 492 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने वित्त विभाग के अंतर्गत संचालनालय, स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण सम्बन्धी योजना के 16वें वित्त आयोग की अवधि एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 492 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है।

स्थानीय निधि संपरीक्षा के लिये 491 करोड़ 75 लाख और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिये 00.70 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। संचालनालय स्थानीय निधि संपरीक्षा, प्रदेश की विभिन्न स्थानीय निकायों के लेखों की संपरीक्षा सम्पादित करता है तथा इन निकायों के अंतर्गत आने वाले स्थापना प्रकरणों के वेतन निर्धारण एवं पेंशन प्रकरणों का निराकरण भी किया जाता है।

मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीतिके प्रस्ताव पर उपसमिति गठित मंत्रि-परिषद ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को लागू किए जाने के प्रस्ताव पर 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति का गठन किया है।

उप समिति प्रदेश मेंविश्वस्तरीय तृतीयक एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार विशेषज्ञ व एमबीबीएस डॉक्टर तैयार करना, गरीब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार की गारंटी, अन्य राज्यों में मरीजों के पलायन को कम करना, स्वास्थ्य संकेत कों एमएमआर और आइएमआर में सुधार करने एवं रोगियों को उन्नत सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने आदि का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी।

रीवा, देवास और गुना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी मंत्रि-परिषद ने रीवा, देवास तथा गुना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन आउटसोर्स प्रणाली से किए जाने संबंधी पायलट परियोजना संचालित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है।

प्रदेश के कुल तीन ज़िलों रीवा, देवास तथा गुना में चिह्नित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों जहाँ चिकित्सकों के अधिकांश पद रिक्त है, उनका संचालन आउटसोर्स प्रणाली से किए जाने हेतु पायलट परियोजना संचालित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। उक्त प्रणाली अंतर्गत संदर्भित संस्थाओं के संचालन के लिए निविदा के निर्माण एवं समापक रूप प्रदायगी का कार्य दायित्व लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को प्रदत्त किए जाने एवं निविदा प्रक्रिया एमपीपी एचएससीएल के माध्यम से किए जाने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है।

इस निर्णय से केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं आम जनता को बेहतर ढंग से मिल पाएगी और उन्हें छोटी बीमारियों के लिए जिला अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पाँच वर्षों के दौरान योजना का मूल्यांकन किया जाएगा और परिणाम अच्छे मिलने पर इसका विस्तार प्रदेश के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भी किया जा सकेगा।

जनजातीय विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने जनजातीय कार्य विभाग की एच्छिक संस्थाओं को शैक्षणिक और अन्य कल्याणकारी प्रवृत्तियों के लिए अनुदान संबंधी योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च 2031 में निरंतर संचालन के लिए 687 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है।

इस योजना के तहत प्रदेश के 22 जिलों में कार्यरत 32 अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्थाओं द्वारा संचालित शैक्षणिक, छात्रावास, आश्रम शाला, बालवाडी, आरोग्य केन्द्र आदि संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन भते एवं संचालन के लिए अनुदान दिया जाता है। अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्थाओं द्वारा जनजातीय छात्र/छात्राओं की आवश्यकता वाले छात्र/छात्राओं की मैपिंग कर चयन किया जाता है।

योजना मुख्य रूप से जनजातीय वर्ग के लिए संचालित है। दिव्यांगजनों को नियमानुसार लाभ दिया जाता है। छात्र-छात्राओं को आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में जेंडर समानता का उचित ध्यान रखते हुए लाभान्वित किया जाता है। रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 639 करोड़ 25 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने रेशम संचालनालय में संचालित 8 कार्यक्रमों योजनाओं की निरंतरता के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक की अनुमानित वित्तीय लागत 639 करोड़ 25 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

स्वीकृत राशि से रेशम समृद्धि योजना का संचालन, रेशम उद्योग का विकास कार्य, रेशम उद्योग की योजनाओं का क्रियान्वयन, टसर रेशम विकास एवं विस्तार कार्यक्रम, कुटीर एवं ग्रामोद्योग उत्पादों का प्रमोशन, ब्राण्ड बिल्डिंग एवं विपणन अधोसंरचना, एकीकृत क्लस्टर विकास कार्यक्रम और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के साथ रेशम केन्द्रों पर सिंचाई सुविधाएं एवं अन्य निर्माण कार्य किए जायेंगे।

इन योजनाओं का उद्देश्य प्रदेश के रेशम ककून उत्पादकों, रेशम धागाकरण हितग्राहियों, बुनकरों एवं उद्यमियों की आय में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय स्तर पर सतत् रोजगार के साथ-साथ आजीविका के साधन उपलब्ध कराना है।

Source:MP Info
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