मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक खेती में बड़ा स्कोप है। यह बड़े मुनाफे का काम है। किसानों को चाहिए कि वे परम्परागत खेती के स्थान पर जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनायें। मुख्यमंत्री ने इस साल अल्प वर्षा की आशंका को देखते हुए प्रदेश के किसानों से अपील की है कि वे अपने कृषि कार्यों की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक योजना बनाएं तथा कम अवधि और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को विशेष प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा एवं कृषि उत्पादन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर रही है। कृषि, उद्यानिकी एवं संबंधित विभागों के माध्यम से जिलेवार सतत समीक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जल संरक्षण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग का विशेष महत्व है।
किसान भाई-बहन खेतों में उपलब्ध नमी का संरक्षण करें, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें और सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों का अधिकाधिक उपयोग करें। कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग द्वारा जारी तकनीकी सलाह का पालन करते हुए परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से विशेष रूप से श्रीअन्न (मोटा अनाज) जैसे कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा सहित अन्य कम पानी में सफलतापूर्वक पैदा होने वाली फसलों का रकबा बढ़ाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि ये फसलें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप होने के साथ कम लागत, अधिक पोषण एवं किसानों की आय वृद्धि के बेहतर विकल्प की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भी श्रीअन्न के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाकर ही उत्पादन और आय को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का अन्नदाता अपने अनुभव, परिश्रम और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन, कृषि आदान उपलब्ध कराने तथा परिस्थितियों के अनुरूप हर संभव सहयोग सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का प्रयास है कि किसी भी किसान को कठिनाई का सामना न करना पड़े। कृषि उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों के हित भी हर तरह से सुरक्षित रहें। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कृषि और अन्नदाता प्रदेश के साथ देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक जरूरतों के अनुसार उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारा कर्तव्य है।
इसी आशय से प्रदेश में वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों को कर रहे जागरूक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को मानसून और बारिश की अपडेट्स के लिए सोशल मीडिया आधारित मैसेजिंग सिस्टम पर विशेष जोर दिया है। बारिश कम होने की स्थिति में बीज उपचार, बुवाई की तकनीक, कम पानी में उपज देने वाली फसलों जैसे- बाजरा, ज्वार, उड़द, मूंग, अरहर, कोदो-कुटकी की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ऐसी फसलें कम पानी और कम अवधि में बेहतर उत्पादन के लिए अच्छा विकल्प हैं। इसके अलावा किसानों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर भी मौसम के पूर्वानुमान से जुड़ी सलाह दी जा रही है।
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