ग्राम बासनिया, विकासखंड मनासा निवासी श्री भागीरथ नागदा पिछले लगभग 15 वर्षों से जैविक खेती को अपनाकर न केवल पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि नवाचारी फसलों और कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय में भी वृद्धि कर रहे हैं। श्री नागदा बताते हैं कि उनके पास कुल 4 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें वे जैविक पद्धति से खेती करते हैं। सिंचाई के लिए उनके खेत पर कुएं की सुविधा उपलब्ध है। जैविक खेती को और मजबूत करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने खेत पर वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित की है, जिसके माध्यम से वे प्रतिवर्ष लगभग 1000 बैग वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास 12 गायें हैं। पशुओं से प्राप्त गोबर एवं गौमूत्र का उपयोग वे जैविक खाद और वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के साथ-साथ जैविक कीटनाशक बनाने में भी करते हैं। इससे खेती में बाहरी इनपुट पर निर्भरता कम हुई है और जैविक खेती को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है। श्री नागदा पारंपरिक फसलों के साथ अश्वगंधा एवं चिया जैसी नवाचारी फसलों की खेती भी कर रहे हैं। वे विशेष रूप से अश्वगंधा की स्वयं पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे उपभोक्ताओं तक अपने उत्पाद पहुंचाते हैं। इसके साथ ही कृषि विभाग द्वारा संचालित साप्ताहिक जैविक हाट बाजार में भी वे अपने जैविक उत्पादों का विक्रय करते हैं, जिससे उन्हें अपने उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है। श्री नागदा बताते हैं कि खेती के साथ इन अतिरिक्त गतिविधियों से उन्हें लगभग 2.50 लाख रुपये वार्षिक अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती, पशुपालन, वर्मी कंपोस्ट निर्माण, नवाचारी फसलों और सीधे बाजार से जुड़ने के प्रयासों ने उनकी कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने शासन की योजनाओं से मिले लाभ के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं से किसानों को नई तकनीक अपनाने, खेती में नवाचार करने और अपनी आय बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं।
स्रोत: जनसंपर्क कार्यालय, नीमच (MPINFO)


