विकास कार्यों से बनाई पहचान, महिला दिवस पर सम्मानित हुईं पार्षद संतोषी बाई बड़ोलिया

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मिला सम्मान

महिला पार्षद संतोषी बाई बड़ोलिया का रिपोर्ट कार्ड सब पर भारी

भारत में हाल के अध्ययनों और रिपोर्टों से यह पता चलता है कि महिला पार्षद स्थानीय निकायों (जैसे नगर परिषद् नगर पालिका ) में सक्रिय रूप से विकास कार्य कर रही हैं और कई मामलों में पुरुषों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
महिला पार्षद के रिपोर्ट कार्ड के मुख्य बिंदु (सब पर भारी क्यों?) रिपोर्टों के अनुसार, नगर परिषद् के टॉप 15 पार्षदों में से अक्सर 7 से अधिक महिलाएँ होती हैं। रामपुरा जैसे शहरों में महिला पार्षदों का औसत स्कोर पुरुषों की तुलना में बेहतर पाया गया 

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम बात करेंगे एक ऐसी ही महिला पार्षद की जिसने

घर की दहलीज लांघकर समाजसेवा के संकल्प के साथ अपने वार्ड को एक आदर्श वार्ड के रूप में स्थापित करने का काम किया है वार्ड क्रमांक 3 की पार्षद श्रीमती संतोषी अमरलाल बड़ोंलिया ने राजनीति में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करायी है. नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर 03 से उन्होंने 89मतों के अंतर से जीत हासिल कर वार्ड पार्षद की जिम्मेदारी संभाली हैं. खास बात यह है कि संतोषी बाई के पति श्री अमरलाल बड़ोलिया की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं रही है. इसके विपरीत उनके पति और उनका पूरा परिवार धार्मिक एवं आध्यात्मिक के प्रति जुड़ाव होने के चलते उनकी लोकप्रियता पूरे वार्ड में एक धार्मिक परिवार के रूप में जानी जाती है जिसका लाभ उन्हें मिला मूल रूप से रामपुरा की रहने वाली संतोषी बाई का विवाह 12 अप्रैल 1996 को राजमिस्त्री का काम करने वाले श्री अमरलाल बड़ोलिया के साथ हुआ था. पति की लोकप्रियता एवं धार्मिक पृष्ठभूमि के बनायी पहचान : मात्र प्राथमिक शिक्षा तक शिक्षित संतोषी बाई पूरी तरह से एक घरेलू महिला रही हैं. उनके मायके या ससुराल मे कोई भी सदस्य राजनीति से नहीं जुड़ा है. बावजूद इसके, उन्होंने अपने पति की प्रेरणा से वार्ड की समस्याओं को समझा और लोगों के बीच संघर्ष कर अपनी अलग पहचान बनायी. इसी का नतीजा रहा कि जनता ने उन्हें त्रिकोणी संघर्ष में89मतों से विजयी बनाया.

स्वच्छ और सुंदर वार्ड बनाना है लक्ष्य :

पार्षद संतोषी बाई का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता वार्ड वासियों को उनके अधिकार दिलाना और मूलभूत समस्याओं का समाधान करना है. वे मोहल्ले के लोगों के साथ मिलकर विकास का खाका तैयार कर रहीं हैं. उनका संकल्प है कि वे वार्ड 03को नगर पंचायत का सबसे स्वच्छ, सुंदर और विकसित वार्ड बनायेंगी.
क्या कहा महिला पार्षद संतोषी बाई अमरलाल बड़ोलिया ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर

*पुरुष प्रधान देश में महिला पार्षद का महत्व और उसकी भूमिका को कैसे देखते है*

महिला पार्षद नगर परिषद् की बैठकों में अपनी अनूठी दृष्टि लाती हैं, जिससे जल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषयों पर अधिक संवेदनशील फैसले लिए जाते हैं।
जमीनी स्तर की समस्या की समझ: वे शहरी विकास (जैसे- अमृत 2.0 योजना) में महिलाओं की गतिशीलता (mobility) को प्राथमिकता देने और वार्ड स्तर की समस्याओं का सही फीडबैक देने में माहिर होती हैं।
प्रेरणा और सशक्तिकरण: एक महिला पार्षद का चुनाव जीतना और सक्रिय रूप से काम करना, वार्ड की अन्य महिलाओं और युवा लड़कियों को राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित करता है।
विकास में नेतृत्व: वे केवल प्रतिनिधि नहीं, बल्कि बदलाव लाने वाली कड़ी बनी हैं, जो जल संरक्षण, स्वच्छता और महिला सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाती हैं।

*एक महिला पार्षद के तौर पर आप अपने प्रमुख जिम्मेदारियां किसे मानती हैं*

वार्ड में बुनियादी सुविधाओं (सड़क, पानी, बिजली) की स्वच्छता सुनिश्चित करना।
महिलाओं के लिए सुरक्षित, समान और आत्मनिर्भर माहौल का निर्माण करना (जैसे- स्ट्रीट लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, महिला हेल्पलाइन)।
स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को बढ़ावा देना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत करना।

*वर्तमान में महिला पार्षद को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है*
पति या पुरुष रिश्तेदारों का हस्तक्षेप: कई बार निर्वाचित महिला पार्षद के स्थान पर उनके पति या ससुर काम करते हैं (जैसे- घूंघट प्रथा या ‘प्रधान पति/पार्षद पति’ की संस्कृति), जो वास्तव में नारी सशक्तिकरण के उद्देश्य को बाधित करता है। ठीक इसके विपरीत मेरे पति श्री अमरलाल जी बड़ोलिया द्वारा मुझे समय-समय पर मार्गदर्शन एवं एक पद प्रदर्शक़ की भूमिका निभाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है

*राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव की कमी कैसे समझा*

: शुरुआत में तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझने में कठिनाई, होती है जिसके लिए प्रशिक्षण शिविरों की आवश्यकता होती है।

*निष्कर्ष और भविष्य की राह*

महिला पार्षद को सशक्त बनाने के लिए उन्हें निरंतर प्रशिक्षण प्रदान करना, निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनके कार्यों में पुरुषों के हस्तक्षेप को रोकना आवश्यक है। जब एक महिला पार्षद को अपने फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता मिलती है, तो वह वास्तव में एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज का निर्माण कर सकती है।

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