श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों को विधिक अधिकारों एवं सशक्तिकरण की दी गई जानकारीनीमच, 30 सितम्बर 2026। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के मार्गदर्शन में साइन लैंग्वेज वीक के अवसर पर ‘अनुगूंज से उद्घोष’ कार्यक्रम के अंतर्गत श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों के लिए विशेष जागरूकता एवं क्षमता-वर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नीमच द्वारा एडीआर सेंटर भवन, नीमच में कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया, जिसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों ने सहभागिता की।कार्यक्रम का उद्देश्य श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों को विधिक अधिकारों, न्याय तक पहुंच, निःशुल्क विधिक सहायता, शिक्षा, रोजगार एवं करियर के अवसर, डिजिटल सुरक्षा तथा हिंसा एवं शोषण से बचाव के संबंध में सरल एवं सुलभ माध्यम से जानकारी प्रदान करना रहा।कार्यक्रम में प्रतिभागियों को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सेवाओं तथा विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया।इस दौरान मानसिक सशक्तिकरण, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास, संवाद कौशल और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों की प्रतिभा एवं रुचियों की पहचान, कला एवं रचनात्मक गतिविधियों, खेल तथा विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध करियर अवसरों के संबंध में भी जानकारी दी गई।कार्यक्रम में हिंसा, दुर्व्यवहार, शोषण एवं लैंगिक अपराधों से सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए संभावित जोखिमों की पहचान, सुरक्षित व्यवहार तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के उपाय बताए गए। जानकारी को अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिए साइन लैंग्वेज तथा दृश्य माध्यमों के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया।इसके साथ ही डिजिटल एवं साइबर सुरक्षा के संबंध में सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी एवं अन्य डिजिटल जोखिमों से बचाव के उपाय बताए गए। प्रतिभागियों को उपलब्ध शिकायत एवं सहायता तंत्र की जानकारी देने के साथ ही मूक-बधिर व्यक्तियों के लिए निर्मित ‘सकून साथी’ एप्लीकेशन का डेमो भी प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि न्याय तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और दिव्यांगजनों को समान रूप से विधिक संरक्षण एवं सहायता प्राप्त होनी चाहिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दिव्यांगजनों के लिए विधिक सेवाओं को अधिक सुलभ, सरल एवं समावेशी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि दिव्यांगता के कारण किसी भी व्यक्ति को न्याय प्राप्त करने में बाधा का सामना न करना पड़े।
स्रोत: जनसंपर्क कार्यालय, नीमच (MPINFO)

